राजनीति व्यंग्य पराजय का समीक्षा सत्र October 10, 2019 / October 10, 2019 by विजय कुमार | Leave a Comment शर्माजी मेरे परममित्र हैं। चार-छह दिन यदि उनसे भेंट न हो, तो मुझे उनके दर्शन करने जाना पड़ता है। वैसे इससे मुझे कई लाभ होते हैं। शाम का टहलना और शर्मा मैडम के हाथ की तुलसी और अदरक वाली कड़क चाय। यदि भाग्य अच्छा हो, तो चाय के साथ मिठाई या पकौड़े भी मिल जाते […] Read more » पराजय का समीक्षा सत्र
व्यंग्य बोलो मियां नियाजी September 30, 2019 / September 30, 2019 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment “ख्वाबे गफलत में सोये हुए मोमिनों ऐशो इशरत बढ़ाने से क्या फायदा आँख खोलो याद रब को करो उम्र यूँ ही गंवाने का क्या फायदा “अल्लामा इक़बाल का ये शिकवा आजकल जनाब इमरान खान नियाजी साहब पर खूब सूट करता है जो यूनाइटेड नेशन के मंच से दुनिया भर के लोगों का आह्वन कर रहे हैं कि या […] Read more » बोलो मियां नियाजी
चुटकुले व्यंग्य “तब्दीली आयी रे “ September 23, 2019 / September 23, 2019 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment “हजारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है , तब कहीं जाकर होता चमन में एक बिदनवार पैदा” यही शेर आजकल पाकिस्तान में बच्चा बच्चा कह रहा है क्योंकि जो ऊपर वाले ने ऐसा छप्पर फाड़ कर दिया कि पाकिस्तानियों को अपनी खुशकिस्मती पर यकीन नहीं हो रहा है कि “या इलाही ये माजरा क्या है “पाकिस्तान […] Read more » शेख रशीद और फवाद चौधरी
व्यंग्य बप्पा और सेल्फी वाले भक्त September 11, 2019 / September 11, 2019 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल भक्ति की अपनी शक्ति है। भक्ति और उसकी धारा का विच्छेदन और विश्लेषण करना आसान नहीं है। कण-कण में भक्ति का भाव समाया हुआ है। तेरे में मेरे में खड्ग में और खंभ में भी भक्ति विराजमान है। […] Read more » सेल्फी वाले भक्त
व्यंग्य नॉट आउट @हंड्रेड September 9, 2019 / September 9, 2019 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment “ख्वाबों,बागों ,और नवाबों के शहर लखनऊ में आपका स्वागत है” यही वो इश्तहार है जो उन लोगों ने देेखा था जब लखनऊ की सरजमीं पर पहुंचे थे। ये देखकर वो खासे मुतमइन हुए थे । फिर जब जगह जगह उन लोगो ने ये देखा कि “मुस्कराइए आप लखनऊ में हैं “तो उनकी दिलफ़रेब मुस्कराहटें कान […] Read more »
व्यंग्य लोहा टू लोहा (व्यंग्य ) August 26, 2019 / August 26, 2019 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment दिलीप कुमार आजकल देश में मोटा भाई कहने का चलन बहुत बढ़ गया है।माना जाता है कि बंधुत्व और दोस्ती का ये रिश्ता लोहे की मानिंद सॉलिड है। पहले ये शब्द भैया कहा जाता था ,लेकिन जब से अमर सिंह ने अमिताभ बच्च्न को भैया कहने के बाद हुए अपने हादसे का दर्द बयान किया […] Read more » Satire
व्यंग्य तब क्यों नहीं ,(व्यंग्य) August 19, 2019 / August 19, 2019 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment “ये जमीं तब भी निगल लेने को आमादा थीपाँव जब जलती हुई शाखों से उतारे हमने इन मकानों को खबर है ना मकीनों को खबर उन दिनों की जो गुफाओं में गुजारे हमने “ये सुनाते हुए उस कश्मीरी विस्थापित के आँसूं निकल पड़े जो अपने घर वापसी के लिये दिल्ली से जम्मू की ट्रेन में बैठ रहा […] Read more » Satire why not then
व्यंग्य “अब आगे क्या “ August 12, 2019 / August 12, 2019 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment दिलीप कुमार तड़ाक,तड़ाक,तड़ाक ,ये थप्पड़ नहीं एक आवाज है जो कहीं कहीं सुनायी पड़ रहा है। जैैसे हवा भी होती है पर दिखती नहीं है।पिछले हफ्ते देश में पहले तो तीन तलाक पर ये तड़ाक का साया पड़ा और अब जम्मू कश्मीर में ,370,35-A, और स्पेशल स्टेटस को हटा लिया गया।ये हटी तो भी तीन का […] Read more » next Satire what ahead
व्यंग्य आओ हरियाली, हरियाली खेलें August 12, 2019 / August 12, 2019 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल हमारे देश में हरियाली का अकाल पड़ गया है। विकास की बुलट रेल शहर बसा रही है जिसकी वजह से गांव और जंगल उजड़ रहे हैं। नतीजा पर्यावरण के साथ जल संकट भी खड़ा हो गया है। हरियाली नहीं बची तो जीवन नहीं बचेगा। पेड़ मर गए तो जीवन मर जाएगा। जिसकी वजह […] Read more » Satire
व्यंग्य हम हिन्दीवाले (व्यंग्य ) August 7, 2019 / August 7, 2019 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment दिलीप कुमार अपने कुनबे में हमने ही ये नई विधा इजाद की है ।एकदम आमिर खान की मानिंद “परफेक्शनिस्ट”,नहीं,नहीं भाई कम्युनिस्ट मत समझिये।भई कम्युनिस्ट से जब जनता का वोट और सहयोग कम होता जा रहा है तब हम जैसा जनता के सरोकारों से जुड़ा साहित्यकार कैसे उनसे आसक्ति रख सकता है ।एक उस्ताद शायर फरमा […] Read more » hum hindiwale
व्यंग्य आजकल सच्चा मित्र कौन है August 6, 2019 / August 6, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment नित्य नियम से मदिरा पान कराये, आजकल तो सच्चा मित्र वही है | दुःख दर्द में जो दारु पिलाये, सच्चा मित्र तो आज वही है | पिला कर जो नाली से निकाले , उस जैसा कोई मित्र नहीं है | मधुशाला का नित्य निमन्त्रण, जो देता है अच्छा मित्र वही है | व्यथित ह्रदय हो […] Read more » friendship true friend
व्यंग्य डाल डाल की दाल July 29, 2019 / July 29, 2019 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment दिलीप कुमार “दाल रोटी खाओ प्रभु के गुण गाओ ” बहुत बहुत वर्षों से ये वाक्य दोहरा कर सो जाने वाले भारतीयों का ये कहना अब नयी और मध्य वय की पीढ़ी को रास नहीं आ रहा है।दाल की वैसे डाल नहीं होती लेकिन ना जाने क्यों फीकी और भाग्य से प्राप्त […] Read more » and remember god eat pulse and bread pulse