व्यंग्य लोकतंत्र की जान है थू-थू ! April 21, 2025 / April 21, 2025 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव नर्मदापुरम दुनिया का सबसे विचित्र शहर है, इसकी विचित्रता के चर्चे होते है पर क्या विचित्र है उसके चित्र किसी के पास नहीं है, यानी दस्तावेजों में यहाँ के सारे विचित्र कार्य और योजनायों के स्वरूप बनते- बिगड़ते है जिसके लिए प्रदेश सरकार करोड़ों रूपये भेजती है। मसलन वर्ष-2012 में किसी ने सेठानी […] Read more » Spit-shit is the lifeblood of democracy!
व्यंग्य पुरुषों सत्ता पर नारी का एकछत्र साम्राज्य April 12, 2025 / April 16, 2025 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव वरिष्ठ पत्रकार दुनिया भर के धुरन्धर ज्ञानियों-ध्यानियों, धर्मज्ञ, तत्ववेत्ताओं के होते हुये इस समाज में मुझ जैसा महामूर्ख भी है जो नर और नारी के बीच उनकी छुपी हुई प्रतिभाओं-कलाओं से हटकर नर में छिपी नारी को देखता है। पुरुषों में नारी पुरुषोत्तमा है जो अणिमा,लघिमा सिद्धिया है, प्रकृति में संध्या, ऊषा, रजनी, पृथ्वी है, नदिया में गंगा,यमुना, सरस्वती, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी है, भाषाओं […] Read more »
व्यंग्य गूगल गुरु के कचरा ज्ञान से पैदा होते सम्पूर्णानन्द पत्रकार? April 7, 2025 / April 7, 2025 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव जहां सबेरा है, वही बसेरा है ओर बसनेवाले कई किस्म के है। आजकल यू-ट्यूबर- व्हाट्सअप, इस्ट्राग्राम कुटुंबएप, फ़ेसबूक आदि पर विशेष प्रकार की वाहियात अक़्लमंद ज्ञानी बेशर्मियों की कब्जेवाली मीडिया खरपतवार गाजरघाँस की तरह फ़ेल चुकी है, इससे बचने के सारे उपाय असफल है। जिसने कभी कागज कलम छुआ नहीं वही गूगल गुरु की प्रेरणा से […] Read more » गूगल गुरु के कचरा ज्ञान
व्यंग्य फ्री फण्ड जनसेवा पार्टी January 30, 2025 / January 30, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment कस्तूरी दिनेश जैसे ही मुझे पता चला कि सुप्रसिद्ध राजनीतिज्ञ और समाजसेवी दामोदर भाई ने ठीक चुनाव के समय अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर एक नई ‘फ्री फण्ड जनसेवा पार्टी’ का गठन किया है,वैसे ही पत्रकार होने के नाते मैं सबसे पहले उनका इंटरव्यू लेने उनके पार्टी ऑफिस पहुँच गया | अभी नई पार्टी […] Read more » फ्री फण्ड जनसेवा पार्टी
व्यंग्य दिल्ली-देवी से मुलाक़ात January 29, 2025 / January 29, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment कस्तूरी दिनेश कल शाम दिल्ली-देवी से मुलाक़ात हो गई |तुम हंस रहे हो …? अरे मजाक नहीं कर रहा हूँ भाई…!हमारे यहाँ वन-देवी,ग्राम देवी,कुल-देवी होती हैं कि नहीं…?गावों में चले जाओ,अक्सर वे घोड़े पर चढ़कर,बैल या शेर पर सवारी करके रात-बेरात लोगों को दिखाई पड़ती हैं कि नहीं ? तो दिल्ली-देवी से मुलाक़ात […] Read more » दिल्ली-देवी से मुलाक़ात
व्यंग्य आलू प्याज January 14, 2025 / January 14, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment गौरीशंकर दुबे आलू-प्याज शाश्वत है, जैसे सूर्य-चन्द्र । कालजयी सब्जी हैं । समय-समय पर दोनों अपना रंग दिखाते रहते हैं। कभी आलू बेकाबू हो जाता है तो कभी प्याज बरसाती नदी की तरह विकराल रूप धारण कर लीलने को तैयार रहता है। आलू-प्याज का यह खेल अक्सर चुनावी समय में दिखाई देता है। प्याज तो इस खेल में बढ़ – चढ़कर हिस्सा लेता है। प्याज एक ऐसी सब्जी है […] Read more » आलू प्याज
राजनीति व्यंग्य कोसने में पारंगत बने January 7, 2025 / January 7, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment विवेक रंजन श्रीवास्तव लोकतंत्र है तो अब राजा जी को चुना जाता है शासन करने के लिए। लिहाजा जनता के हर भले का काम करना राजा जी का नैतिक कर्तव्य है। लोकतंत्र ने सारे जरा भी सक्रिय नागरिकों को और विपक्ष को पूरा अधिकार दिया है कि वह राजा जी से उनके हर फैसले पर […] Read more »
व्यंग्य गधे और हाथी की लड़ाई November 11, 2024 / November 11, 2024 by विवेक कुमार पाठक | Leave a Comment विवेक रंजन श्रीवास्तव अमेरिका में गधे और हाथी की रेस चल रही थी । डेमोक्रेट्स का चुनाव चिन्ह गधा और रिपब्लिकन का हाथी है। चुनावो के समय अपने देश मे भी अचानक रुपयो की गड्डियां बाजार से गायब होने की खबर आती है , मैं अपनी दिव्य दृष्टि से देख रहा होता हूं कि हरे […] Read more » डेमोक्रेट्स का चुनाव चिन्ह गधा और रिपब्लिकन का हाथी
व्यंग्य लखनऊ का संत October 18, 2024 / October 18, 2024 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment बरसों पहले लखनऊ के एक ख्यातिलब्ध साहित्यकार ने “विश्रामपुर का संत “ नामक एक विराट कथा लिखकर खूब प्रसिद्धि बटोरी थी । अब लखनऊ कुछ दूसरी वजहों से चर्चा में है । “लखनऊ है तो महज गुम्बदो मीनार नहीं, सिर्फ एक शहर नहीं कूच ओ बाजार नहीं, इसके आँचल में मोहब्बत के फूल खिलते हैं, […] Read more » लखनऊ का संत
व्यंग्य कट्टर ईमानदार को दूर से ही नमस्कार October 17, 2024 / October 17, 2024 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment अशोक गुप्त एक होता है ईमानदार और एक होता है कट्टर ईमानदार। जैसे एक होता है ब्राह्मण और एक महाब्राह्मण। अंतर तो आप जानते ही हैं. ईमानदार व्यक्ति को लेबल की आवश्यकता नहीं होती। उसे लोग उसके आचरण से जानते हैं. ईमानदार आदमी दुनिया में अक्सर पीछे रह जाता है क्योंकि दुनिया में आजकल बेईमानी […] Read more » कट्टर ईमानदार
मीडिया व्यंग्य झूठ बोले मीडिया काटे August 28, 2024 / August 28, 2024 by नवेन्दु उन्मेष | Leave a Comment नवेन्दु उन्मेष पहले झूठ बोलने पर कौआ काटता था। इसी लिए फिल्म में गीत भी लिखा गया किझूठ बोले कौआ काटे, काले कौए से डरियो। लेकिन अब शहर से कौए गायब हो चुकेहैं। कौआ अब विलुप्त प्राणी होता हुआ नजर आ रहा है। अब जो नया प्राणीपैदा हो गया है उसे कहते हैं मीडिया। पहले […] Read more » झूठ बोले मीडिया काटे
व्यंग्य समाज और क्या चाहिए August 19, 2024 / August 19, 2024 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment भले ही प्रेम, अफेयर, लिव -इन रिलेशनशिप,लांग डिस्टेंस रिलेशनशिप,प्लूटोनिक लव तथा साहचर्य के विभिन्न विकल्प मौजूद हों मगर आज भी भारतीय परिवेश में शादी बेहद जरूरी मानी जाती है । ऊर्दू के एक उस्ताद राइटर ने फरमाया था कि “इश्क का ताल्लुक दिल से होता है मगर शादी -विवाह का ताल्लुक तनखाहों से होता है “। पहले शादी- विवाह अपने […] Read more »