व्यंग्य साहित्य नयेपन की डिमांड और अलग तरह की राजनीती May 13, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment आम आदमी के नाम पर बनी पार्टी ने मतदाता के एंटरटेनमेंट का पूरा ख्याल रखा है । आम आदमी पार्टी ("आप") ने लोकतंत्र की नीरसता को ना केवल दूर करने का काम किया है बल्कि दूरदर्शी राजनैतिक मूल्यों की स्थापना करने में भी महती भूमिका निभाई है। आप पर कोई भ्रष्टाचार का आरोप लगाए उससे पहले ही आप सबको भ्रष्टाचारी घोषित कर स्वयं को ईमानदारी का एकमात्र मसीहा घोषित कर दो। इससे ना तो आप की ईमानदारी साबित होती है और ना ही दूसरे की बेईमानी लेकिन टाइमपास अच्छा हो जाता है और मुँह बाए खड़ी सैंकड़ो समस्याओ के बावजूद सबका मूड फ्रेश रहता है। Read more » Featured नयेपन की डिमांड
व्यंग्य साहित्य दूर के रसगुल्ले , पास के गुलगुले …!! May 12, 2017 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा इसे जनसाधारण की बदनसीबी कहें या निराशावाद कि खबरों की आंधी में उड़ने वाले सूचनाओं के जो तिनके दूर से उन्हें रसगुल्ले जैसे प्रतीत होते हैं, वहीं नजदीक आने पर गुलगुले सा बेस्वाद हो जाते हैं। मैगों मैन के पास खुश होने के हजार बहाने हो सकते हैं, लेकिन मुश्किल यह कि […] Read more » दूर के रसगुल्ले
व्यंग्य चूहा साहित्य में नया अध्याय May 7, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment आजकल शायद ही कोई बच्चा हो, जो टी.वी. पर चालाक चूहे और खूंखार बिल्ले वाली ‘टॉम और जैरी’ की कार्टून कथा न देखता हो। वैसे समय काटने के लिए कई बूढ़े भी इसे देखते हैं। ये कार्टून कथा तो विदेशी है; पर इससे हजारों साल पूर्व पंचतंत्र और अन्य भारतीय कथा साहित्य में चूहों की […] Read more » Featured चूहा साहित्य
व्यंग्य साहित्य साडी रसोई १०/- और सादी रसोई ५/- में ……. May 7, 2017 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment पंजाब दे कैप्टन उर्फ़ महाराजा साहेब अर्थात सदर ऐ रियासत ने पंजाब के गरीबों को भरपेट भोजन देने का वायदा किया था और वह भी महज़ ५ रुप्प्या में ….. जब सदर ने रियासत की जेब टटोली तो राजकुमार की जेब की मानिंद ‘फटी ‘ हुई निकली …… एक जद्दी एडवाइज़र को बुलाया …. हल […] Read more » Featured साडी रसोई १०/ सादी रसोई ५/
व्यंग्य साहित्य अब चुहे बने शराबी : वाह रे बिहार पुलिस May 6, 2017 by सज्जाद हैदर | Leave a Comment इन चूहों ने रात के घोर अंधेरे का फायदा उठाया, योजना बनाई तथा बड़ी चतुराई पूर्वक सभी बिन्दुओं पर गंभीरता पूर्वक विचार किया तथा योजना बद्ध तरीके से इस बड़े कार्य को सफलता पूर्वक अंजाम दिया। क्योंकि यह मामला पुलिस विभाग से संबंधित था, अत: इस संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए बड़ी चतुराई के साथ रात के घोर अंधेरे का फायदा उठाते हुए थानों के पिछले द्वार से प्रवेश किया क्योंकि थाने के मुख्य द्वार पर एक पुलिस वाला पहरा दे रहा था, जो संगीन के साथ पूरी मजबूती से खड़ा हुआ था, इसी कारण चूहों ने पिछले द्वार से प्रवेश की योजना बनाई, जिसके सहारे शराब के भंडार गृह तक योजना बद्ध तरीके से पहुंच गए। Read more » Featured चुहे बने शराबी बिहार पुलिस
व्यंग्य साहित्य तुच्छता से स्वच्छ्ता की और May 6, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment स्वच्छ भारत अभियान के सर्वे में सबसे स्वच्छ शहरो में इंदौर पहले और भोपाल दूसरे नंबर पर आया है, ये दोनों शहर बीजेपी शासित राज्य मध्यप्रदेश में आते है, वैसे 2014 में सरकार बनने के बाद बीजेपी नेताओ ने अपने बयानों से जैसी गंदगी फैलाई है उसे देखते हुए ये काफी अप्रत्याशित लगता है। यह […] Read more » स्वच्छ भारत अभियान
व्यंग्य साहित्य ऋषि मुनियों के देश में , अब अऋषि रहे ना कोय May 5, 2017 by जगमोहन ठाकन | Leave a Comment जग मोहन ठाकन बाबा रामदेव जी महाराज को आप चाहे योग गुरु कहें या संयोग गुरु ; उनके “ गुरु” होने में कोई संदेह नहीं रह गया है .बल्कि महागुरू का ताज भी उनके मस्तक पर छोटा प्रतीत होता है . हाँ , इतना भी निश्चित मानिये कि वो समय की नजाकत और नब्ज […] Read more » Featured बाबा रामदेव
व्यंग्य साहित्य मोबाइल की माया, बना इंसानी हमसाया May 2, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment हर हाथ के पास काम हो या ना हो लेकिन हर हाथ के पास मोबाइल ज़रूर है। आदमी को अपने वर्क की इतनी चिंता नहीं होती है जितनी मोबाइल नेटवर्क की होती है। फेसबुक, वाट्सएप, इंस्टाग्राम जैसे एप्स से आम आदमी टाइम-पास कर बहुत कुछ फेल करना सीख गया है। गूगल प्ले-स्टोर में जाकर दिमाग पर ज़्यादा लोड लिए कुछ भी डाउनलोड करना आसान है। गूगल स्टोर उस गोदाम की तरह की तरह हो गया है जहाँ उचित दाम पर सब वस्तु आसानी से मिल जाती है। वह दिन दूर नहीं जब गूगल स्टोर इतना "यूजर-फ्रैंडली" हो जाएगा की राशन की सारी चीज़े भी पंसारी की तरह उपलब्ध करवाएगा। ज़्यादा व्यस्तता होने आपातकाल में गूगल स्टोर सुलभता से सुलभ शौचालय का रूप लेकर हल्का करने वाला एप भी ला सकता है। हल्का होना इंसान के बहुत ज़रूरी है क्योंकि जितना हल्कापन होगा सफलता की उड़ान उतनी ही ऊँची होगी। Read more » "उड़ान" Featured केंद्र सरकार द्वारा सस्ती हवाई यात्रा मोबाइल की माया हमसाया
व्यंग्य लालबत्ती का फ्यूज हो जाना April 24, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment लालबत्ती हटाकर सरकार न केवल उस महान वीआईपी परंपरा ,जिसे कई नेताओ और अधिकारियों ने अपनी कार और अहंकार से सजाकर इस मुकाम तक पहुँचाया है, को लांछित करने का प्रयास कर रही है बल्कि आम आदमी की छवि को धूमिल करने का प्रयास भी कर रही है। क्योंकि जब तक समाज में वीआईपी रहेंगे तब तक आम आदमी उनको देखकर अपने को छोटा महसूस करता रहेगा और सरकारे उसके उत्थान हेतु कदम उठाती रहेगी। अगर समाज से वीआईपी सभ्यता ख़त्म होकर सभी आम आदमी हो गए तो सरकारे आम आदमी के कल्याण के लिए कहाँ से प्रेरणा लेगी। असली समाजवाद लाने के लिए देश में विशिष्ट और विशिष्टता का रहना अत्यंत आवश्यक है। विशिष्टता का शिष्टता में बदल जाना लोकतांत्रिक और सामाजिक मूल्यों के लिए खतरा है। Read more » लालबत्ती
व्यंग्य साहित्य सफ़र के हमसफ़र April 23, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment माता-पिता और गुरुओ के बाद मुझे बस कंडक्टर ही सबसे प्रेरणास्पद व्यक्तित्व लगता है क्योंकि वो भी तमाम कठिनाईयो के बावजूद आपको हमेशा "आगे बढ़ने" की प्रेरणा देता है। मुझे हमेशा से ही कंडक्टर नाम का व्यक्तित्व असामान्य और अद्भुत लगता रहा है क्योंकि जब रजनीकांत जैसा "महामानव असल ज़िंदगी में "कंडक्टर" की भूमिका निभा चुका हो तो कंडक्टर एक सामान्य व्यक्ति भला कैसे हो सकता है! मेरी राय में कंडक्टर किसी पार्टी हाई-कमान से कम हैसियत नहीं रखता है क्योंकि पार्टी हाई-कमान के बाद कंडक्टर ही एक ऐसा ऐसा व्यक्ति है जो "टिकट"देने में सबसे ज़्यादा आनाकानी करता है। विज्ञान के लिए टच-स्क्रीन पद्धति भले ही नई हो लेकिन कंडक्टर तो सदियो से "टच-पद्धति" का उपयोग कर खचाखच भरी बस में भी किसी भी कोने सेे किसी भी कोने तक पहुँचते रहे है। कंडक्टर के पास समय और "छुट्टे" की हमेशा किल्लत रहती है। Read more » Featured सफ़र के हमसफ़र
व्यंग्य साहित्य #लाल_बत्ती_भाई_को_मेरा_ख़त April 21, 2017 by अश्वनी कुमार, पटना | Leave a Comment #लाल_बत्ती भाई, इतने दिनों तक नेताओं, अफसरों और अमीरों के सर पर चढ़े रहने के बावजूद भी तुम्हें देश याद नहीं करता था| जो देश की सवारी करता था तुम उसकी सवारी करते थे, इसलिए हम तुम्हें याद कर रहे हैं, देश याद कर रहा है| क्योंकि तुम 1 मई से किसी कबाड़ख़ाने में पड़े […] Read more » #लाल_बत्ती
व्यंग्य साहित्य नींद क्यों रात भर नहीं आती April 18, 2017 / April 18, 2017 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment ड़ोस में नई नई उसारी गई मस्जिदों से लाउड स्पीकरों से 'आज़ान ' अल्लाहो अकबर के कर्कश आगाज़ से जगा देती है ..... पी जी आई के सबसे बड़े ख्याति प्राप्त न्यूरो डाक्टर हैरान हैं ..... कि यह शख्स सोता क्यों नहीं ..... इस बार तो डाक्टर साहेब ने दुखी हो कर मेरा केस 'पागलों 'के एक्सपर्ट को रैफर कर दिया है .... मैं सोचता हूँ 'वह ' भी क्या करेगा ..... फिर से ग़ालिब की याद ! ...... मौत का एक दिन मय्यन है ...नींद क्यों रात भर नहीं आती। Read more » Featured