व्यंग्य व्यंग्य-जनता बदलाव चाहती है February 13, 2012 / February 13, 2012 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव अब अपने भारत के दिन फिर बहुरेंगे। पहले सुनहरे कल में बेचारा घुसते-घुसते रह गया था। फिर शाइनिंग इंडिया होते-होते भी बाल-बाल बच गया। मगर अबकी बार कोई चूक नहीं हो सकती है। क्योंकि मंहगाई और घोटालों के साथ-साथ मतदान का ग्राफ भी लप-लपाता हुआ आगे बढ़ा है। मतदाताओं के सर मुंडाते […] Read more » satire by pandit Suresh Neerav जनता बदलाव चाहती है
व्यंग्य साहित्य हास्य-व्यंग्य – ऋतुओं का सुपर स्टारःवसंत February 10, 2012 / February 10, 2012 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव कलैंडर के हेलीकॉप्टर से उतरकर ऋतुओं का सुपर स्टार ऋतुराज वसंत धरती पर उतर आय़ा है। शोखियों की क्रीम और रोमांस के पाउडर से लिपी-पुतीं सजी-संवरीं कलियां वसंत को देख-देखकर- वाओ..हाऊ क्यूट-जैसे जुमलों को मादक सिसकियों में ढालकर बिंदास वसंत को रिझाने में लग गई हैं। एअरपोर्ट पर नेता के स्वागत में आए चमचों की तरह […] Read more » basant ऋतुओं का सुपर स्टार वसंत
व्यंग्य टीम अन्ना का संगठन शास्त्र February 7, 2012 / February 9, 2012 by विजय कुमार | 8 Comments on टीम अन्ना का संगठन शास्त्र विजय कुमार अन्ना इन दिनों बीमार हैं। यद्यपि उनका उत्साह कम नहीं हुआ; पर क्या करें, शरीर साथ नहीं दे रहा। उनके साथियों को भी समझ नहीं आ रहा कि इस सरदी के मौसम में अब आगे क्या रास्ता पकड़ें कि आंदोलन में फिर से गरमी आ सके। अन्ना अपने गांव रालेगढ़ सिद्धि के शांत […] Read more » Team Anna अन्ना हजारे
व्यंग्य साहित्य व्यंग्य ; हे अतिथि, कब आओगे?? February 1, 2012 / February 1, 2012 by अशोक गौतम | Leave a Comment अशोक गौतम हे परमादरणीय अतिथि! अब तो आ जाओ न! माना सर्दियों में घर से बाहर निकलना मुश्किल होता है, पर अब तो वसंत गया। विपक्ष ने चुनाव आयोग से कह जिन हाथियों को ढकवा दिया था वे भी वसंत के आने पर कामदेव के बाणों से आहत होकर चिंघाड़ने लग गए हैं। सच कहूं […] Read more » guest vyangya कब आओगे व्यंग्य हे अतिथि
व्यंग्य बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी? January 30, 2012 / January 30, 2012 by एल. आर गान्धी | 1 Comment on बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी? एल. आर गाँधी भारत में प्रत्येक ‘बकरे’ को पांच साल बाद ‘अपना कसाई ‘ बदलने का अधिकार है. पांच राज्यों के बकरे अपने ‘कसाईयों ‘ की कारगुजारी को तौल रहे हैं … कौन झटक देगा या हलाल करेगा ? सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के ‘ बकरों’ को बहिन जी से गिला है की पिछले […] Read more » Common People Mulayam Singh Political parties sp voters बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी
व्यंग्य गणेश जी गाँधीवादी हैं ……………… January 30, 2012 / January 30, 2012 by अनुराग अनंत | 2 Comments on गणेश जी गाँधीवादी हैं ……………… चुनावी कम्प्यूटर में चुनाव आयोग का कड़ाई वायरस क्या आया सारा आपरेटिंग सिस्टम ही करप्ट हो गया कोई विंडो खुली नज़र नहीं आ रही की जिससे अन्दर बाहर किया जा सके | बेचारी चुनावी इंजीनियरिंग की वाट ! लगी पड़ी है | शराब,गांजा,भांग,रूपए,पैसे,का सॉफ्टवेयर,और लाठी-डंडे-बन्दूकी बाहुबल का हार्डवेयर ठीक वैसे ही बेकार पड़ा है […] Read more » Ganesh ji is gandhian गणेश जी गाँधीवादी हैं
खेल जगत व्यंग्य साहित्य व्यंग्य ; क्रिकेट के नायक और खलनायक – राजकुमार साहू January 30, 2012 / January 29, 2012 by राजकुमार साहू | Leave a Comment इतना तो है, जब हम अच्छा करते हैं तो नायक होते हैं। नायक का पात्र ही लोगों को रिझाने वाला होता है। जब नायक के दिन फिरे रहते हैं तो उन पर ऊंगली नहीं उठती और जो लोग ऊंगली उठाते हैं, उनकी ऊंगली, उनके चाहने वाले तोड़ देते हैं। नायक की दास्तान अभी की नहीं […] Read more » Cricket vyangya क्रिकेट के नायक और खलनायक व्यंग्य
कविता व्यंग्य साहित्य व्यंग्य कविता ; काम वालियां – प्रभुदयाल श्रीवास्तव January 30, 2012 / January 29, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment काम वालियां नहीं कामपर बर्तन वाली दो दिन से आई इसी बात पर पति देव पर पत्नि चिल्लाई काम वालियां कभी समय पर अब न आ पातीं न ही ना आने का कारण खुलकर बतलातीं बिना बाइयों के घर तो कूड़ाघर हो जाता बड़ी देर से कठिनाई से सूर्य निकल पाता छोटी बच्ची गिरी फिसल […] Read more » poem vyangya काम वालियां व्यंग्य कविता
चुनाव व्यंग्य वादा तेरा वादा (चुनावी व्यंग-एक सच्ची घटना पर आधारित) January 30, 2012 / January 29, 2012 by संदीप ठाकुर | Leave a Comment संदीप ठाकुर चुनावी मुद्दों के बाद अब लोक-लुभावन वादों से, पूरे प्रदेश में सियासी हलचल मची हुई है. किस पार्टी के मेनीफेस्टो कौन सा चुनावी आफर निकल कर आ जाय किसी कुछ पता नही. कोई साईकिल बाँट रहा है तो कोई टेबलेट व लैपटॉप देने की बात कर रहा है. कहीं शिक्षा मुफ्त की जा […] Read more » election vyangya चुनावी व्यंग वादा तेरा वादा
व्यंग्य व्यंग्य – घोषणा ही तो है… January 29, 2012 / January 29, 2012 by राजकुमार साहू | Leave a Comment राजकुमार साहू मैं बचपन से ही ‘घोषणा’ के बारे में सुनते आ रहा हूं, परंतु यह पूरे होते हैं, पता नहीं। इतना समझ में आता है कि ‘घोषणा’ इसलिए किए जाते हैं कि उसे पूरे करने का झंझट ही नहीं रहता। चुनावी घोषणा की बिसात ही अलग है। चुनाव के समय जो मन में आए, […] Read more »
व्यंग्य साहित्य अटेंशन – एक व्यंग्य कथा !!! January 28, 2012 / January 30, 2012 by विजय कुमार सप्पाती | 1 Comment on अटेंशन – एक व्यंग्य कथा !!! कुछ दिन पहले तक मेरी हालत बहुत खराब थी। मुझे कहीं से कोई भी अटेंशन नहीं मिल रही थी। हर कोई मुझे बस टेंशन देकर चला जाता था, जैसे मैं रास्ते का भिखारी हूँ और मुझे कोई भी भीख में टेंशन दे देता था। मैं बहुत दुखी था। कोई रास्ता नहीं दिखाई देता था। मुझे […] Read more » vyangya अटेंशन व्यंग्य कथा
व्यंग्य रामभरोसे नगर की रामलीला ………एक व्यंग ………… January 23, 2012 / January 23, 2012 by अनुराग अनंत | Leave a Comment रामभरोसे बड़े ही भरोसे के आदमी है इसलिए नहीं कि उनका नाम रामभरोसे है बल्कि इसलिए कि वो रामभरोसे नगर के निवासी है,राम भरोसे नगर की खास बात ये है कि वहां के सभी निवासियों का नाम रामभरोसे है और नेताओं का नाम राम है,रामभरोसे नगर के सभी निवासियों का नाम रामभरोसे इसलिए है क्योंकि […] Read more »