व्यंग्य कालेधन के समर्थन में June 8, 2011 / December 11, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव आजकल कालेधन की वापसी को लेकर लोगों में एक अजीब-सी खब्त सवार हो गई है। जिसे देखो वही कालेधन की वापसी को लेकर नथुने फुला रहा है। और-तो-और साधु,बाबा और योगी तक जो कभी धन को विकार और धिक्कार मानते थे आज कालेधन और सफेद धन के लपड़े में पड़कर अपनी इज्जत […] Read more » Black Money कालेधन के समर्थन में
विविधा व्यंग्य आई ज्ञान की आंधी June 7, 2011 / December 11, 2011 by आशुतोष | 1 Comment on आई ज्ञान की आंधी आशुतोष कबीरदास ने कहा है – संतों भाई, आई ज्ञान की आंधी। भ्रम की टाटी सबै उड़ाणी, माया रहे न बाकी। आंधी तो आंधी है। वह जब आती है तो सब कुछ उड़ा ले जाती है। ऊंचा-नीचा, अच्छा-बुरा, उजला-काला, रात-दिन, कुछ नहीं देखती। सामने तिनका हो या पूरा पेड़, वह उसे उड़ा ले जाने की […] Read more » Baba Ramdev कबीरदास ज्ञान बाबा रामदेव भ्रष्टाचार संत
व्यंग्य बेटा सो जा वरना बाबा पकड़ ले जाएगा June 7, 2011 / December 11, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment पंडित सुरेश नीरव बाबा कालेधन के सख्त खिलाफ हैं। वो विदेश से कालाधन वापस मंगाकर ही छोड़ेंगे। बाबा का गुस्सा बड़ा अहिंसक है। बाबा बड़े गुस्से में हैं। लीजिए गुस्से में बाबा सरकार को धमकाने सीधे दिल्ली ही पहुंच गए। अबला सरकार भी बाबा के गुस्से के आगे थर-थर कांपने लगी। उसने अपने दूत बाबा […] Read more » बाबा पकड़ ले जाएगा बेटा सोजा
व्यंग्य पिटाई सरकारी योग में तप कहलाती है! June 6, 2011 / December 11, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment हास्य-व्यंग्य-संदर्भःबाबा रामदेव पंडित सुरेश नीरव इश्क की दुनिया में महबूबा सरकार कहलाती है। जो अपने आशिक पर बड़े ही जुल्म ढाती है। मेरा तो मानना है कि सरकार कैसी भी हो,कहीं की भी हो सियासत की हो या मुहब्बत की हो जुल्म ही ढाती है। और यदाकदा,सुविधानुसार अपने चाहनेवाले को तबीयत से पिटवाती भी है। […] Read more » Baba Ramdev बाबा रामदेव
व्यंग्य भ्रष्टाचार महाक्ति कलियुगे!! June 5, 2011 / December 11, 2011 by अशोक गौतम | 1 Comment on भ्रष्टाचार महाक्ति कलियुगे!! बाजे गाजे की आवाज सुन हड़बड़ाया जाग कर बाहर निकला तो पैरों तले से जमीन खिसक गई। वे सुबह सुबह अपने फसली बटेरों के जुलूस के साथ झोटे सी गरदन को चंदे के गुड्डी कागजों की मालाओं से लक दक किए गंजे सिर पर लाल साफा बांधे, मुहल्ले के मास्टर जी की पहले तो ट्रांसफर […] Read more » Corruption कलियुगे भ्रष्टाचार महाक्ति
व्यंग्य भ्रष्टाचार ने बड़ौ दुख दीनौ June 5, 2011 / December 11, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment ऱाष्ट्रकुल खेलों में भरपेट भ्रष्टाचार का खेल खेलने के बाद भ्रष्टाचार मिटाओ का खेल आजकर देश में काफी लोकप्रिय हो रहा है। जिसे मौका मिलता है नही भ्रष्टाचार मिटाने पर आमादा हो जाता है। मीडिया भी क्रिकेट के बाद भ्रष्टाचार मिटाओ की लुभावनी झांकी को दिखाते हुए छलक-छलक जा रहा है। और लोगबाग भी बड़े […] Read more » Corruption भ्रष्टाचार
व्यंग्य एक सेक्यूलर की मौत May 30, 2011 / December 12, 2011 by विजय कुमार | 7 Comments on एक सेक्यूलर की मौत विजय कुमार परमपिता परमेश्वर ने इस सृष्टि के निर्माण में बड़ा शारीरिक और मानसिक श्रम किया। उन्होंने धरती-आकाश, सूरज-चांद-सितारे, स्त्री-पुरुष, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, पर्वत-नदियां, जलचर-थलचर.. न जाने क्या-क्या बनाया। फिर भी वे एक प्रजाति बनानी भूल गये। वह है सेक्यूलर। सेक्यूलर की कोई परिभाषा आज तक निश्चित नहीं हुई। इसके लिए भारतीय भाषाओं में कोई अच्छा […] Read more » secularism धर्मनिरपेक्षता सेकुलरिज्म
व्यंग्य व्यंग्य/एक चुटकी रज कण मुझे भी प्लीज! May 23, 2011 / December 12, 2011 by अशोक गौतम | Leave a Comment अशोक गौतम अव्वल दर्जे के चरित्रहीन होने के चलते कल मेरे अजीज ने मुझे अपनी दिली तमन्ना बताते हुए कहा, ‘हे मित्र! मेरा जन्म पुन: हो और गलती से मुझे का सरकारी कर्मचारी का चोला मिले तो मैं इसी विभाग में इसी पद को प्राप्त होऊं ताकि रिश्वत लेने के लिए नए सिरे से मन […] Read more »
व्यंग्य हास्य-व्यंग्य / पेट्रोल की कीमत और राष्ट्रीय स्वाभिमान May 21, 2011 / December 12, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on हास्य-व्यंग्य / पेट्रोल की कीमत और राष्ट्रीय स्वाभिमान पंडित सुरेश नीरव सरकार ने एक बार फिर पेट्रोल की कीमत बढ़ाकर दुनिया के देशों के सामने अपने इंडिया की नाक ऊंची कर दी। जब भी कभी सरकार को लगता है कि देश की नाक नीची हो रही है वह पेट्रोल की कीमत बढ़ाकर उसे ऊंचा कर देती है। अपने देश की जनता भी सरकार […] Read more » Inflation पेट्रोल मूल्य वृद्धि महंगाई
राजनीति व्यंग्य प्रभात झाः ‘हार’ में नहीं जीत में है भरोसा May 8, 2011 / December 13, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 10 Comments on प्रभात झाः ‘हार’ में नहीं जीत में है भरोसा संजय द्विवेदी उन्हें पता है कि उनको मिली जिम्मेदारी साधारण नहीं है। वे एक ऐसे परिवार के मुखिया बनाए गए हैं जिसकी परंपरा में कुशाभाऊ ठाकरे जैसा असाधारण नायक है। मध्यप्रदेश भाजपा का संगठन साधारण नहीं है। उसकी संगठनात्मक परंपरा में ठाकरे और उनके बाद एक लंबी परंपरा है। प्यारेलाल खंडेलवाल, गोविंद सारंग, नारायण प्रसाद […] Read more » Prabhat Jha प्रभात झा
व्यंग्य आतंकवाद से युद्ध May 4, 2011 / December 13, 2011 by विजय कुमार | 1 Comment on आतंकवाद से युद्ध विजय कुमार सरकार लगातार हो रही आतंकी घटनाओं से बहुत दुखी थी। रेल हो या बस, मंदिर हो या मस्जिद, विद्यालय हो या बाजार, दिन हो या रात, आतंकवादी जब चाहें, जहां चाहें, विस्फोट कर उसकी नाक में दम कर रहे थे। विधानसभा चुनाव का खतरा सिर पर था। सरकार को लगा कि यदि इस […] Read more » terrorism आतंकवाद
व्यंग्य व्यंग्य – टेक्नालॉजी का फसाना May 3, 2011 / December 13, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment राजकुमार साहू सबसे पहले आपको बता दूं कि औरों की तरह मैं भी तकनीक की टेढ़ी नजर से दूर नहीं हूं। तकनीक के फायदे कई हैं तो नुकसान तथा फजीहत भी मुफ्त में मिलती हैं। वैसे मेरे पास न तो विरासत में मिली संपत्ति है और न ही मैंने इतनी अकूत संपत्ति जुटाई है, […] Read more »