महंगाई पर एक और चर्चा

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मृत्युंजय दीक्षित विगत कुछ दिनों से देश में बढ़ रही महंगाइ्र्र पर चर्चा फिर शुरू हो गयी है। यह चर्चा संसद से लेकर सड़क तक हर तरह के प्लेटफार्म पर हो रही है। जब घरों में परिवारों के सदस्य मिल बैठकर कोई बहस प्रारम्भ करते हैं तो फिर चर्चा का विषय महंगाई बम पर ही… Read more »

सरकारी जरूरत को मजबूरी में सहता आम आदमी

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विनायक शर्मा क्या यूपीए-२ की सरकार के अंत की शुरुवात हो चुकी है ? कभी कांग्रेस की सदस्य रही फायरब्रांड नेता के नाम से प्रसिद्द और वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्षा व बंगाल की मुख्यमंत्री ममताबनर्जी ने फूँक-फूँक कर कदम उठाते हुए यूपीए की सरकार से नाता तोड़ने का निर्णय लेकर केंद्र की सरकार… Read more »

चाबुक पर चाबुक…

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कुलदीप सिंह राघव केंद्र सरकार जनता पर अपना खूब चाबुक चला रही है। बेचारी जनता जब तक पहले चाबुक के जख्म को भर पाती है तब तक दूसरा चाबुक उसी जख्म को हरा कर देता है। पिछले महीनों में लगातार बढी मंहगाई से तो यही लग रहा है कि सरकार जान- बूझकर जनता को बार-बार… Read more »

मंहगार्इ को लेकर भारत बंद के संदर्भ में

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प्रमोद भार्गव विदेशी निवेश को आमंत्रित करती मंहगार्इ मंहगार्इ के परिप्रेक्ष्य में भारत बंद कमोवेश पूरे देश में सफल रहा। राजग व बामदलों समेत अनेक व्यावारी संगठनों ने भी स्वेच्छा से बंद का समर्थन किया। करीब पांच हजार वाणिज्य संगठनों ने पेटोल की बड़ी हुर्इ कीमतें वापिस लेने के लिए धरणा एवं प्रदर्षनों में भागीदारी… Read more »

मंहगाई को आगे बढ़ाता बजट

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प्रमोद भार्गव रेल बजट के तत्काल बाद पेश किए आमबजट ने भी उतरोत्तर महंगाई बढ़ाने का ही काम किया है। जनता के रोजमर्रा के सरोकारों से जुड़े सामान उपभोक्ता की जेबें ढीली करेंगे। इन दोनों बजटों ने जनता के ऊपर 80 से 90 हजार करोड़ का बोझ बढ़ाया है। क्योंकि खानपान से लेकर घेरलु इलेक्ट्रोनिक… Read more »

विदेशी निवेश को आमंत्रित करती महंगाई

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प्रमोद भार्गव शराबियों के खुमार को उतारे के लिए जिस तरह से नशे की एक और खुराक की जरुरत पड़ती है, कुछ ऐसे ही बद्तर हाल में हमारे आर्थिक सुधार पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा मंहगाई बढ़ाते रहने का खेल ऐसे हालात बना देने का पर्याय रहा है, जिसके परिवेश में बहुराष्टीय… Read more »

महंगाई, भ्रष्टाचार और सरकार

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राजकुमार साहू केन्द्र में सत्ता पर बैठी कांग्रेसनीत यूपीए सरकार चाहे जितनी अपनी पीठ थपथपा ले, लेकिन महंगाई व भ्रष्टाचार के कारण सरकार जनता की अदालत में पूरी तरह कटघरे में खड़ी है। ठीक है, अभी लोकसभा चुनाव को ढाई से तीन साल शेष है, किन्तु सरकार को जनता विरोधी कार्य करने से बाज आना… Read more »

देशी बीमारी का विदेशी इलाज

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पंडित सुरेश नीरव आजकल हमारे देश में भारत बंद की फैशन बडे ज़ोरों पर है। ज़रा-सा मौका मिला नहीं कि तड़ से करवा दिया भारत बंद। गोया भारत कोई देश न हो फेवीकोल का डिब्बा हो। जब इस्तेमाल करना हो तब ही खोलो और फिर कर दो बंद। फेवीकोल का डिब्बा बंद होने के बाद… Read more »

सतर्क रहे भारत ताकि…

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दूर झरोखे से भारत  नरेश भारतीय अन्य देशों की तरह भारत में भी निस्संदेह राजनीति के अतिरिक्त भी अनेक ऐसे मुद्दे होते हैं जो आम जनसमाज की चिंता का कारण बनते हैं और उनके समाधान की खोज में प्रबुद्ध समाज अपनी पहल के साथ स्वस्थ बहस को बल प्रदान करता है. लेकिन कई बार ऐसा… Read more »

कांग्रेस का सफर-गरीब से भिखारी तक

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अब्दुल रशीद आजादी के बाद से गरीबों के नाम पर राजनीति करने वाले कांग्रेस के युवराज ने एक कदम आगे चल कर भिखारियों की राजनीति कि शुरुआत की है। गलती से या जान बूझकर लेकिन कांग्रेस के लम्बे कार्यकाल की हकीक़त खुद युवराज ने बयां कर दिया के कांग्रेस शासन काल में आम गरीब जनता… Read more »