खान-पान खेत-खलिहान शाकाहार है स्वस्थ और संतुलित दुनिया का आधार September 30, 2026 / September 30, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment शाकाहार है स्वस्थ और संतुलित दुनिया का आधार Read more » शाकाहार
खेत-खलिहान लेख खेती बचानी है तो किसान की ज़रूरतों को समझना होगा September 22, 2026 / September 22, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment इस प्रकार का असर सबसे पहले छोटे किसान पर पड़ता है। बड़े किसान के पास संसाधन, भंडारण या परिवहन की बेहतर सुविधा हो सकती है, लेकिन सीमांत किसान के पास विकल्प सीमित होते हैं। Read more » खेती
खान-पान खेत-खलिहान मंडियों में रुलता किसान देख ले May 18, 2026 / May 18, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment इन दिनों धान मंडियों में फसल की आवक अपने चरम पर है। रबी की फसल—जिसे पंजाबी में 'हाड़ी' कहा जाता है—के अप्रैल से शुरू होकर जून तक चलने वाले इस दौर में खरीद-फरोख्त Read more » मंडियों में रुलता किसान
खान-पान खेत-खलिहान क्षेत्रवार कृषि नीति, नकली बीज और कीटनाशकों पर सख्त कानून से एग्री सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी April 27, 2026 / April 27, 2026 by पुनीत उपाध्याय | Leave a Comment छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में छोटे किसान हैं इसलिए कम जमीन से अधिक आय देने वाले मॉडल अपनाने होंगे। उन्होंने अंतरवर्तीय फसल प्रणाली, अनाज के साथ फल.सब्जी उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और वृक्ष आधारित खेती जैसे एकीकृत कृषि मॉडल को छोटे किसानों के लिए उपयोगी बताया। Read more » क्षेत्रवार कृषि नीति नकली बीज और कीटनाशकों पर सख्त कानून
खान-पान खेत-खलिहान आस्था के नाम पर फैलते छल से बचकर ही सुरक्षित रहेगी किसान की मेहनत April 16, 2026 / April 16, 2026 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment वे घर की दहलीज पर खड़ी होकर आने-जाने वालों का स्वागत करती हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देती हैं। उनके लिए यह केवल एक सामाजिक कर्तव्य नहीं, बल्कि आस्था का हिस्सा होता है। लेकिन यही आस्था कई बार उनकी कमजोरी बन जाती है, जब कुछ लोग इसका लाभ उठाने लगते हैं। Read more » Tradition of charity and service in villages to kalnem किसान गाँवों में दान और सेवा की परंपरा
खान-पान खेत-खलिहान असमय बारिश ने बर्बाद की फसलें April 16, 2026 / April 16, 2026 by रमेश ठाकुर | Leave a Comment नुकसान पर सरकारें बेशक सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के तहत राहत देने का प्रयास करती हों लेकिन लगातार बेमौसम बारिश के कारण किसानों का कर्ज और मुसीबतें बढ़ रही हैं। हुकूमतें बेशक इस बारिश को ‘कुदरती आपदा’ करार दें पर, कड़वी सच्चाई वही है जो मौसम वैज्ञानिक बता रहे हैं। Read more » असमय बारिश ने बर्बाद की फसलें
खान-पान खेत-खलिहान लेख खेती का संकट और पारंपरिक देसी बीज January 23, 2026 / January 23, 2026 by अमरपाल सिंह वर्मा | Leave a Comment अमरपाल सिंह वर्मा निरंतर लागत बढ़ती चले जाने से हमारे देश में खेती संकट के दौर से गुजर रही है। एक ओर खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल, बिजली आदि का खर्च बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर किसान की आय सिमटती जा रही है। जलवायु संकट के दौर में अनिश्चित मौसम और कीटनाशकों के बढ़ते प्रकोप […] Read more » Farming crisis and traditional indigenous seeds
खान-पान खेत-खलिहान भूमि की बिगड़ती सेहत और किसान December 22, 2025 / December 22, 2025 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment नतीजतन जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभाव भी गहरा गए हैं। वैष्विक स्तर पर भूमि क्षरण की समस्या के समाधान के लिए 450 अरब डॉलर का वार्षिक खर्च आएगा। यदि इसमें सुधार जल्दी नहीं किया गया तो विश्व में 3.2 अरब लोगों का जीवन संकटग्रस्त हो सकता है। भारत के लिए यह समस्या इसलिए विकराल है, Read more » भूमि की बिगड़ती सेहत और किसान
खान-पान खेत-खलिहान दाल उत्पादन में आत्मनिर्भरता के उपाय October 16, 2025 / October 16, 2025 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गवप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नानाजी देशमुख ने जयप्रकाश नारायण की जयंती पर दो प्रमुख कृषि योजनाओं की शुरुआत की है। धन-धान्य और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन नाम से की गई ये योजनाएं यदि खेत में खरी उतरती हैं तो किसान की माली हालत तो सुधरेगी ही देश दाल उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी हो […] Read more » दाल उत्पादन में आत्मनिर्भरता के उपाय
कला-संस्कृति खेत-खलिहान कृषि मेँ नवाचार – किसान और खेती हेतु नयी क्रांति का प्रसार September 23, 2025 / September 23, 2025 by चंद्र मोहन | Leave a Comment चंद्रमोहन परम्परागत तरीके से अलग से कुछ नया सोचना और उस पर अमल करना. लीक से हट कर नयी पद्धति को अपना कर आकर्षक परिणाम का मिल जाना नवाचार का पहला कदम है. किसी भी काम मेँ चाहे वह खेती – बाड़ी ही क्यों ना हो, नवाचार की अपनी एक खास भूमिका रहती है. इसी […] Read more » कृषि मेँ नवाचार
खान-पान खेत-खलिहान जी.एस.टी. दरों में अप्रत्याशित कटौती से कृषि बाजार होगा गुलजार September 13, 2025 / September 15, 2025 by अशोक बजाज | Leave a Comment प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दूर दृष्टि सोच के तहत जी.एस.टी. दरों में भारी भरकम कटौती की है । इस कटौती का सीधा लाभ कृषि एवं किसानों को मिलेगा । 22 सितम्बर 2025 से लागू होने वाली नई दरें कृषि व कृषकों के कल्याण के लिए मील का […] Read more » GST The agricultural market will be booming due to the unexpected reduction in rates कृषि बाजार होगा गुलजार
खान-पान खेत-खलिहान हाइड्रोपोनिक खेती: भविष्य की दिशा या सीमित समाधान? July 24, 2025 / July 24, 2025 by सचिन त्रिपाठी | Leave a Comment सचिन त्रिपाठी भारत कृषि प्रधान देश है परंतु कृषि आज भी एक असुरक्षित, अनिश्चित और घाटे का सौदा बनी हुई है। भूमि क्षरण, जल संकट, मौसम की मार, लागत में वृद्धि और बाजार की अस्थिरता ने किसानों को वैकल्पिक तकनीकों की ओर देखने के लिए मजबूर कर दिया है। ऐसे में ‘हाइड्रोपोनिक’ खेती अर्थात मिट्टी रहित, नियंत्रित वातावरण में पौधों की खेती को कृषि क्षेत्र के भविष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है लेकिन प्रश्न यह है कि क्या यह तकनीक भारत के किसानों के लिए व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान बन सकती है? हाइड्रोपोनिक खेती की शुरुआत नीदरलैंड, इजरायल और अमेरिका जैसे देशों में हुई जहां भूमि और जल की सीमित उपलब्धता ने वैज्ञानिकों को नियंत्रित खेती की दिशा में प्रयोग के लिए प्रेरित किया। आज इजरायल इस तकनीक में वैश्विक अगुवा है जहाँ रेगिस्तानी क्षेत्रों में अत्याधुनिक हाइड्रोपोनिक फार्म फसल उत्पादन कर रहे हैं। अमेरिका और कनाडा में यह तकनीक शहरी कृषि, सुपरमार्केट और ग्रीन रेस्टोरेंट्स के लिए ताज़ी सब्जियों की आपूर्ति का मुख्य आधार बन चुकी है। जापान और सिंगापुर जैसे देश जहां कृषि भूमि सीमित है, वहां हाइड्रोपोनिक्स वर्टिकल फार्मिंग के साथ जोड़ा गया है। भारत में इस तकनीक को अब धीरे-धीरे अपनाया जा रहा है, विशेष रूप से बड़े शहरों और कुछ विकसित राज्यों में। बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद, गुरुग्राम, अहमदाबाद जैसे शहरों में कई निजी स्टार्टअप शहरी हाइड्रोपोनिक फार्मिंग को बढ़ावा दे रहे हैं। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, हरियाणा और तेलंगाना की सरकारों ने इस तकनीक के लिए कुछ प्रोत्साहन योजनाएं भी चलाई हैं। हालांकि भारत में अब तक यह तकनीक प्रायोगिक और व्यावसायिक सीमित क्षेत्रों तक ही केंद्रित है। गांवों या छोटे किसानों में इसका प्रसार नगण्य है। भारत सरकार की ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर’ और ‘डिजिटल इंडिया’ पहल के तहत नवीन कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में कुछ प्रयास हो रहे हैं। कृषि मंत्रालय ने ‘प्रिसिजन फार्मिंग’ और ‘कंट्रोल्ड एनवायरनमेंट एग्रीकल्चर’ को प्राथमिकता क्षेत्र बताया है और विभिन्न राज्य सरकारें स्टार्टअप्स को सहायता दे रही हैं परंतु, जमीनी स्तर पर इसे अपनाने में अभी भी कई बाधाएं हैं ,खासकर पूंजी, प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे की सीमाओं के कारण। हाइड्रोपोनिक सिस्टम की स्थापना में प्रति एकड़ ₹25 लाख से अधिक का खर्च आता है। 86% भारतीय किसान सीमांत और छोटे हैं जिनकी वार्षिक कृषि आय ₹1 लाख से भी कम है। यह तकनीक उनके लिए सुलभ नहीं है। यह खेती ‘लो टेक’ नहीं है। पीएच बैलेंस, इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी, नमी नियंत्रण, पोषक घोल का ज्ञान ये सब आवश्यक हैं। ग्रामीण किसानों के पास इसके लिए प्रशिक्षण और संसाधन नहीं हैं। सतत और गुणवत्ता युक्त जल तथा बिजली की उपलब्धता इस तकनीक की रीढ़ है। भारत के अनेक गांवों में अभी भी ये आधारभूत सुविधाएं बाधित रहती हैं। हाइड्रोपोनिक उत्पादों की मांग फिलहाल शहरी उच्च वर्ग तक सीमित है। बाजार की सीमाएं और मूल्य अस्थिरता इसे जोखिम भरा बना देती हैं। भारत में एक समान नीति लागू नहीं की जा सकती। जल संकट से जूझते राज्यों (जैसे राजस्थान, तमिलनाडु) और शहरी क्षेत्रों के पास स्थित बेल्ट्स को प्राथमिकता दी जाए। एफपीओ, एसएचजी या कृषि स्टार्टअप्स के माध्यम से साझा हाइड्रोपोनिक यूनिट्स को प्रोत्साहित किया जाए ताकि लागत और जोखिम का बंटवारा हो। केवीके और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाए। अनुसंधान संस्थानों को भारतीय जलवायु के अनुकूल प्रणाली विकसित करने की दिशा में कार्य करना चाहिए। नाबार्ड और अन्य वित्तीय संस्थानों को हाई रिस्क कृषि निवेश के लिए विशेष स्कीम लानी चाहिए। बीमा सुरक्षा और मूल्य गारंटी योजना तकनीक को अपनाने में सहायक होगी। हाइड्रोपोनिक खेती कोई ‘मैजिक बुलेट’ नहीं है जो सभी समस्याओं का समाधान कर दे। परंतु यह तकनीक भारत के बदलते कृषि संदर्भ में एक महत्वपूर्ण उपकरण बन सकती है यदि इसे व्यवस्थित, नीति-सहायक और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार लागू किया जाए। यह तकनीक उन किसानों के लिए व्यवहारिक है जो शहरी मांगों से जुड़े हैं, पूंजी और तकनीकी पहुंच रखते हैं, या जो संगठित समूहों के तहत काम करते हैं। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, एक तकनीक सभी के लिए नहीं हो सकती, लेकिन सही क्षेत्र, सही समूह और सही नीति के तहत हाइड्रोपोनिक खेती भविष्य की दिशा तय कर सकती है। सचिन त्रिपाठी Read more » Hydroponic Farming हाइड्रोपोनिक खेती