खेत-खलिहान भारतीय कृषि: सुख-समृद्धि का मूलाधार March 9, 2010 / December 24, 2011 by डॉ. प्रवीण तोगड़िया | 2 Comments on भारतीय कृषि: सुख-समृद्धि का मूलाधार महंगे रसायनों के कर्जे, जमीन मृत, झूठे सपने दिखाने वाली सरकारों के कारण लिए हुए अन्य कर्जे, बिचौलिए इन सबमें हमारा किसान मारा गया। हमारी धरती माता मारी गयी, जिसके मूलाधार उसकी समृद्ध मृत्तिका और शुद्ध जलस्रोत थे। शाकवने रम्यं चन्दने रक्तचंदनै:। हरीतकी कणिकार धात्री वन विभूषितम॥ द्राक्शावाल्ली नागवल्ली कणावल्ली शतावृतम। मल्लिका यूथिका कुंदमदयन्ति सुगंधितम॥ […] Read more » Indian farmer भारतीय कृषि
खेत-खलिहान कार्बन क्रेडिट्स से अनभिज्ञ हम और हमारी सरकारी नीतियां January 28, 2010 / December 25, 2011 by पंकज चतुर्वेदी | 4 Comments on कार्बन क्रेडिट्स से अनभिज्ञ हम और हमारी सरकारी नीतियां एक राष्ट्र की प्रगति में उद्योग एवं निर्माण कार्यों का बहुत बड़ा हाथ होता है और यहां उद्योग धंधे जिन प्रक्रियाओं से आगे बढ़ते हैं वह परिणामत: कार्बन या अन्य गैसों का उत्सर्जन करते हैं, जो अंतत: पृथ्वी के तापमान को बड़ाती है। क्योटो (जापान) प्रोटोकॉल के अनुसार ज्यादातर विकसित एवं विकासशील देशों ने ग्रीन […] Read more » Carbon credit कार्बन क्रेडिट
खेत-खलिहान नवीन हरित क्रांति की संभावनाएं एवं आवश्यकता January 27, 2010 / December 25, 2011 by पंकज चतुर्वेदी | Leave a Comment भारत को एक कृषि प्रधान देश माना जाता है एवं काफी लंबे समय से यह कहा जाता है कि इस देश की 70 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। भारत की कृषि परंपरा का इतिहास काफी पुराना है। समृद्ध कृषक राष्ट्र होने के कारण एक समय भारत को सोने की चिड़िया […] Read more » Green Revolution हरित क्रांति
खेत-खलिहान खुशहाली की राह दिखाती हर्बल खेती January 8, 2010 / December 25, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | 2 Comments on खुशहाली की राह दिखाती हर्बल खेती दुनियाभर में हर्बल पदार्थों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक अमेरिका में 33 फीसदी लोग हर्बल पद्धति में विश्वास करते हैं। अमेरिका में आयुर्वेद विश्वविद्यालय खुल रहे हैं और जर्मनी, जापान, आस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, नीदरलैंड, रूस और इटली में भी आयुर्वेद पीठ स्थापित हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की […] Read more » Herbal Farming हर्बल खेती
खेत-खलिहान किसान का गौरवशाली अतीत था, आज किसान को मार्गदर्शन चाहिए December 10, 2009 / December 25, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on किसान का गौरवशाली अतीत था, आज किसान को मार्गदर्शन चाहिए आज किसान बहुत दुविधा में पड़ा है। वह चाहता है कि वह रासायनिक खाद से कैसे छुटकारा पाए ताकि उसकी धरती फिर से उपजाऊ हो। वह भुल सा गया है कि उनके पुरखे गोबर और गोमूत्र से खाद बनाकर इतने सम्पन्न थे कि उन्होंने आजादी की लड़ाइयों अर्थात 1857, 1905 और 1930 स्वतंत्रता आंदोलनों में […] Read more » Farmer किसान
खेत-खलिहान समाज महात्मा गांधी की दृष्टि में गौ रक्षा का महत्व October 10, 2009 / December 26, 2011 by समन्वय नंद | 19 Comments on महात्मा गांधी की दृष्टि में गौ रक्षा का महत्व गाय भारतीय संस्कृति का मूल आधार है। हमारे देश का संपूर्ण राष्टजीवन गाय पर आश्रित है। गौमाता सुखी होने से राष्ट सुखी होगा और गौ माता दुखी होने से राष्ट के प्रति विपत्तियां आयेंगी, ऐसा माना जा सकता है। गाय को आज व्यावहारिक उपयोगिता के पैमाने पर मापा जा रहा है किंतु यह ध्यान रखना […] Read more » Mahatma Gandhi महात्मा गांधी
खेत-खलिहान विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा September 30, 2009 / December 26, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment गाय बनेगी विश्व एकता का साझा सूत्र माँ की दया ६२ वर्ष पहले हमारा देश विदेशी शासन से स्वतंत्र हुआ। विडंबना देखिए, यद्यपि हम स्वयं अपने स्वामी बन गये पर पश्चिमी चकाचोंध के अवांछनीय प्रभावों के दास भी हो गये। तब से अपनी यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर हम अपनी मौलिकता और स्वाभिमान खोते गये। […] Read more » Cow गो ग्राम यात्रा
खेत-खलिहान बेमौसम भी करें पानी की चिंता September 30, 2009 / December 26, 2011 by अमरेन्द्र किशोर | 2 Comments on बेमौसम भी करें पानी की चिंता बसंत आते ही पानी की चिंता हमें सताने लगती है। पानी की कमी की वजह से पलायन जैसी खबरें सुर्खियों में सजती हैं। जल संकट के नाम पर विचार गोष्ठियों का आयोजन होता है। इस संकट से निजात पाने के लिए सरकारी महकमों में हल्ला तूफान मचता है और बारिश आते ही हम जल संकट […] Read more » Unseasonable बेमौसम
खेत-खलिहान कितने भयावह हैं आहरों को मिटाने के नतीजे! September 29, 2009 / December 26, 2011 by अमरेन्द्र किशोर | 1 Comment on कितने भयावह हैं आहरों को मिटाने के नतीजे! झारखंड के लोक गीतों और लोक कथाओं में जहाँ जल स्त्रोंतों की स्तुति छलकती है वहीं सरकार द्वारा गठित विभिन्न आयोगों के रिपार्ट से इस बात की जानकारी मिलती है कि वहाँ कभी सिंचाई की बड़ी अच्छी व्यवस्था थी। उल्लेखनीय है कि 1860 ई0 में अंग्रजों ने भीषण अकाल के बाद ईस्ट इण्डिया इरीगेशन एण्ड […] Read more » Dangerous भयावह
आर्थिकी खेत-खलिहान विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा September 4, 2009 / December 26, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 4 Comments on विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा भारत गांवों का देश है। गांव देश की आत्मा और कृषि उसकी योति है। इनका प्राण-तत्व गाय है। प्रकृति की यह अनमोल दैन (गो वंश) विलुप्त होने की कगार पर है। देश में गाय की सैकड़ों प्रजातियां (नस्लें) थीं। मोटे तौर पर आज इनमें से मात्र तैंतीस प्रजातियां बची हैं। ये भी उपेक्षा का शिकार […] Read more » Cow गो ग्राम यात्रा
खेत-खलिहान रेत के धोरों में सब्ज़ियों की खेती August 28, 2009 / December 27, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | 2 Comments on रेत के धोरों में सब्ज़ियों की खेती आज जहां बंजर भूमि के क्षेत्र में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने पर्यावरण और कृषि विशेषज्ञों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, वहीं अरावली पर्वत की तलहटी में बसे गांवों के बालू के धोरों में उगती सब्ज़ियां मन में एक खुशनुमा अहसास जगाती हैं। हरियाणा के मेवात ज़िले के गांव नांदल, खेडी […] Read more » Vegetable सब्ज़ियों
आर्थिकी खेत-खलिहान समाज सार्थक पहल क्या इन ८ सवालों के जवाब हैं ……….. आज के आर्थिक विशेषज्ञों के पास : कनिष्क कश्यप June 10, 2009 / December 27, 2011 by कनिष्क कश्यप | 2 Comments on क्या इन ८ सवालों के जवाब हैं ……….. आज के आर्थिक विशेषज्ञों के पास : कनिष्क कश्यप क्या इन ८ सवालों के जवाब हैं, अगर हाँ ? तो हमें बताएं ! क्यों की पश्चिम के पिचासी संस्कृति का दिन-ब-दिन हावी होते जाना, हमारी अपनी कमजोरी और मानसिक दिवालियापन का सूचक तो नहीं ? बाज़ार शब्द अपनी शाब्दिक परिधि तक तो बड़ा हीं मोहक और प्रभावी लगता है, इससे बहार निकलते हीं यह मर्यादायों को […] Read more » Economic Expert आर्थिक विशेषज्ञ