खेत-खलिहान जब कोई किसान आत्महत्या करता है January 22, 2011 / December 16, 2011 by संजय द्विवेदी | 6 Comments on जब कोई किसान आत्महत्या करता है अन्नदाता से को इस जाल से निकालने की जिम्मेदारी सत्ता और समाज दोनों की – संजय द्विवेदी यह सप्ताह दुखी कर देने वाली खबरों से भरा पड़ा है। मध्यप्रदेश में किसानों की आत्महत्याओं का सिलसिला चल रहा है। हर दिन एक न किसान की आत्महत्या की खबरों ने मन को कसैला कर दिया है। कर्ज […] Read more » Farmer Suicide आत्महत्या किसान
खेत-खलिहान किसान आत्महत्या: त्रासदी कहीं नियति न बन जाए January 21, 2011 / December 16, 2011 by के. एन. गोविंदाचार्य | 2 Comments on किसान आत्महत्या: त्रासदी कहीं नियति न बन जाए के. एन. गोविन्दाचार्य दिनांक 14 अक्टूबर, 2006 की दोपहर मैं ‘विदर्भ’ में कारेजा के निकट मनोरा तहसील के ‘इंजोरी’ गांव में गया। इस गांव के एक किसान ने आत्महत्या की थी। उसके परिवार से मिलना, सांत्वना देना मेरा मकसद था। शिवसेना के नेता श्री दिवाकर मेरे साथ थे। संत गजानन भी हमारे साथ चल रहे […] Read more » Farmers आत्महत्या किसान
खेत-खलिहान किसान बुद्ध का आह्नान! January 13, 2011 / December 16, 2011 by चैतन्य प्रकाश | 1 Comment on किसान बुद्ध का आह्नान! चैतन्य प्रकाश विराट सूना आकाश क्रीड़ांगन बन गया है। काले मेघों की चपल किल्लोल जारी है। जलभरे बादलों से पटा आकाश मनुष्यता के सौभाग्य का समर्थ प्रतीक बना है। सूरज और चांद भी छिप-छिप कर इस खेल का मजा ले रहे हैं। धरती मां का अखण्ड जलाभिषेक हो रहा है। धरत्रि उर्वरा है, पुनर्नवा है, […] Read more » Farmer किसान
खेत-खलिहान जिन्दा रहने के लिए किसान संगठित और रचनात्मक संघर्ष करे December 31, 2010 / December 18, 2011 by गौतम चौधरी | 3 Comments on जिन्दा रहने के लिए किसान संगठित और रचनात्मक संघर्ष करे गौतम चौधरी खेती कईली जीए-ला, बैल बिकागेल बीए-ला, यह लोकोक्ति मिथिला के ग्रामीण क्षेत्रों में खूब बोली जाती है। इसका अर्थ भी बताना चाहूंगा। किसान खेती करता है जीने के लिए लेकिन जब खेती करने के दौरान खेती का प्रधान औजार ही बिक जाये तो वैसी खेती करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। […] Read more » Farmer किसान
खेत-खलिहान मध्यप्रदेश में नहीं रुक रही किसान आत्महत्याएं December 30, 2010 / December 18, 2011 by रामबिहारी सिंह | Leave a Comment रामबिहारी सिंह मध्यप्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार भले किसानों को खुशहाल और खेती को लाभ का धंधा बनाने की अपनी पुरानी रट दोहराते नहीं थकती, किन्तु यहां स्थिति इसके विपरीत है। मध्यप्रदेश के किसानों की हालत अन्य राज्य के किसानों की अपेक्षा अत्यंत दयनीय है। हालात यह हैं कि गरीबी और कर्ज के बोझ से […] Read more » Madhya pradesh किसान आत्महत्या मध्यप्रदेश
खेत-खलिहान किसानों के लिए लाभकारी आईसीटी परियोजना December 17, 2010 / December 18, 2011 by ऋचा कुलश्रेष्ठ | 2 Comments on किसानों के लिए लाभकारी आईसीटी परियोजना ऋचा कुलश्रेष्ठ मुरादाबाद में छजलैट के बैरमपुर गाँव निवासी हरबंस ने जब आईसीटी परियोजना के प्रशिक्षण में हिस्सा लिया था तब यह नहीं सोचा था कि यह प्रशिक्षण उनके जीवन का रुख ही बदल देगा। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें विकास खंड प्रभारी जितेंद्र कुमार ने धान का श्री पद्धति के बारे में बताया। हरबंस ने […] Read more » Dhan धान श्री पद्धति
खेत-खलिहान खेती में दूसरी हरित क्रान्ति December 17, 2010 / December 18, 2011 by डॉ. मनोज मिश्र | 1 Comment on खेती में दूसरी हरित क्रान्ति डॉ. मनोज मिश्र इस समय आबादी वृध्दि, औद्योगिकीकरण व अन्य कारणों से घटती जमीन, आर्थिक विकास तथा अन्तर्राष्ट्रीय चुनौतियों के कारण भारत की कृषि जबर्दश्त दबाब से गुजर रही है। सन् 1965 के आसपास गेहूं से लदे जहाज प्रतिदिन अमेरिका से भारत आ रहे थे तथा ‘सिप टू माऊथ’ की स्थिति के कारण हमारी दशा […] Read more » Green Revolution खेती हरित क्रांति
खेत-खलिहान राजनीति ममता का किसानों से पार्टटाइम प्रेम December 16, 2010 / December 18, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | Leave a Comment जगदीश्वर चतुर्वेदी रेलमंत्री ममता बनर्जी का अशांत किसानप्रेम उन्हें अंधे गली में ले गया है। वे किसानहठ की शिकार हैं। किसानहठ राजनीतिक प्रतिगामिता को जन्म देता है। ममता का किसान से रोमैंटिक संबंध है। उसका किसान के हितों और भावबोध से कोई लेना-देना नहीं है। ममता के आंदोलन के कारण लालगढ़ और नंदीग्राम अशांति के […] Read more » mamta benerjee किसान ममता बनर्जी
खेत-खलिहान सार्थक पहल मिसाल : किसानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं कुशलपाल सिरोही November 26, 2010 / December 19, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | 2 Comments on मिसाल : किसानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं कुशलपाल सिरोही फ़िरदौस ख़ान कुछ लोग जिस क्षेत्र में काम करते हैं, उसमें नित-नए प्रयोग कर इतनी कामयाबी हासिल कर लेते हैं कि दूसरों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन जाते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत हैं, हरियाणा के कैथल ज़िले के चंदाना गांव के निवासी व कैथल के प्रगतिशील किसान क्लब के प्रधान कुशलपाल सिरोही, जिन्होंने […] Read more » Land खेत खलिहान
खेत-खलिहान हिन्दी लेखकों की ‘बाजारवाद’ को लेकर गलत समझ – गिरीश मिश्रा November 13, 2010 / December 20, 2011 by गिरीश मिश्रा | 3 Comments on हिन्दी लेखकों की ‘बाजारवाद’ को लेकर गलत समझ – गिरीश मिश्रा पिछले कुछ वर्षों में हिंदी साहित्यकार और पत्रकार बडी संख्या में बाजार और एक अस्त्विहीन अवधारणा ‘बाजारवाद’ के खिलाफ लठ लेकर पडे हैं। कहना न होगा कि इन जिहादियों को न तो अर्थशास्त्र का ज्ञान है और न ही इतिहास का। अर्थशास्त्र में ‘बाजारवाद’ नाम की कोई भी अवधारणा नहीं है। अगर विश्वास न हो […] Read more » Marketism बाजारवाद
खेत-खलिहान लुप्त होता किसान- गिरीश मिश्रा November 13, 2010 / December 20, 2011 by गिरीश मिश्रा | 1 Comment on लुप्त होता किसान- गिरीश मिश्रा यदि वर्तमान भारत, विशेषकर हिंदी पत्रकारिता और साहित्य, को देखें तो किसान को लेकर स्पष्टता का सर्वथा अभाव मिलेगा। अनेक तथाकथित वरिष्ठ पत्रकार और प्रख्यात साहित्यकार भी इस तथ्य से अनभिज्ञ हैं कि भारत में किसान नामक प्राणी का अस्त्वि समाप्त हो रहा है। जिसे हम आज किसान कहते हैं वह वस्तुत: खेतिहर है। दोनों […] Read more » Farmer किसान गिरीश-मिश्रा
खेत-खलिहान पर्यावरण पर्यावरण की हमारी प्राचीन समझ November 12, 2010 / November 12, 2010 by विश्वमोहन तिवारी | 7 Comments on पर्यावरण की हमारी प्राचीन समझ मेंढक तो टर्र-टर्र टर्राते हैं मैं तो बिल्कुल चकरा गया। मैं अंग्रजी की शिक्षापद्धति में पढ़ा-लिखा आधुनिक व्यक्ति हूं। उल्टी-सीधी बातें मैं नहीं मानता। मैं तर्क करता हूं। मैं जानता हूं कि बरसात में बदसूरत मेढक बेसुरी आवाज़ में टर्र-टर्र टर्राते हैं। मैं इन्हें देवता कैसे मान लूं? ऋग्वेद के सातवें मंडल में एक मंडूक […] Read more »