खेत-खलिहान आजाद भारत में किसान आज भी गुलाम October 19, 2010 / December 20, 2011 by रामदास सोनी | 3 Comments on आजाद भारत में किसान आज भी गुलाम सरकारी नीतियों के कारण कृषि पर गहराया संकट – रामदास सोनी कहने को तो भारत 15 अगस्त 1947 को विदेशी दासता की बेड़ियों से मुक्त हो गया था किंतु वास्तव में नीतियों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ जिससे कहा जा सकता है कि मात्र सत्ता का हस्तांतरण हुआ था यानि मात्र तंत्र हमारा था किंतु […] Read more » Farmer किसान
खेत-खलिहान ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाओं के माध्यम से शहरी-ग्रामीण अंतर को दूर करने का प्रयास October 17, 2010 / December 21, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाओं के माध्यम से शहरी-ग्रामीण अंतर को दूर करने का प्रयास -अतुल कुमार तिवारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि वास्तविक भारत गांवों में बसता है। सभी प्रयासों के बावजूद आजादी के छह दशक बाद भी देश के आश्चर्यजनक पहलुओं में एक है- सुविधाओं के दृष्टि से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत बड़ा अंतर। शहरी भारत और ग्रामीण भारत के बीच के इस अंतर […] Read more » village ग्रामीण क्षेत्र
खेत-खलिहान जैविक का व्यापार-एन.जी.ओ. और सरकार October 8, 2010 / December 21, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 7 Comments on जैविक का व्यापार-एन.जी.ओ. और सरकार -योगेश दीवान कितना आष्चर्यजनक है कि अचानक मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री पानी बाबा की तर्ज पर ”जैविक बाबा” हो जाते हैं और मुख्यमंत्री जैविक प्रदेश घोषित करने के लिये धन्यवाद के पात्र। ये वहीं मुख्मंत्री और कृषि मंत्री हैं जो कुछ दिन पहले तक और अभी भी प्रदेश की खेतिहर जमीन को बड़ी ही सामंती […] Read more » Government जैविक
खेत-खलिहान विविधतापूर्ण खेती से कम हो सकती है मंहगाई September 29, 2010 / December 22, 2011 by सतीश सिंह | 1 Comment on विविधतापूर्ण खेती से कम हो सकती है मंहगाई -सतीश सिंह सुशासन बाबू के नाम से विख्यात बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा के हिलसा प्रखंड के गांवों में आजकल पारंपरिक पद्धति की जगह अधतन एवं विविधतापूर्ण तरीके से खेती करने का चलन जोर पकड़ता चला जा रहा है। आय में वृध्दि के लिए इस प्रखंड के किसान पारंपरिक फसलों धान […] Read more » Inflation मंहगाई
खेत-खलिहान जैविक कृषि और ग्रामीण स्वावलंबन August 23, 2010 / December 22, 2011 by डॉ. मनोज चतुर्वेदी | 1 Comment on जैविक कृषि और ग्रामीण स्वावलंबन – डॉ. मनोज चतुर्वेदी भारत गांवों का देश है जहां कि 70 प्रतिशत जनसंख्या आज भी गांवों में रहती है। यह ठीक है कि भूमंडलीकरण तथा उदारीकरण अर्थव्यवस्था में ग्रामीण जनता का शहरों की तरफ बहुत तेजी से पलायन हो रहा है तथा हो चुका है। इसका मतलब यह नहीं है कि देश की छह […] Read more » Organic Farming जैविक कृषि
खेत-खलिहान जीन संवर्धित खाद्य पदार्थों पर क्यों मचा है बवाल August 11, 2010 / December 22, 2011 by सतीश सिंह | 1 Comment on जीन संवर्धित खाद्य पदार्थों पर क्यों मचा है बवाल -सतीश सिंह जीन संवर्धित खाद्य पदार्थ (जी एम फूड) से जुड़ा हुआ बिल ‘भारतीय जैव प्रौद्यौगिकी नियामक प्राधिकरण विधेयक-2009’ (बीआरएआई) को मानसून सत्र में पेश करने का मन सरकार बना रही है। बवाल इस बिल के पास के होने के बाद भारत में जी एम फूड के उपभोग से होने वाले खतरों को दृष्टिगत करके […] Read more » Food items जीन संवर्धित खाद्य पदार्थ
खेत-खलिहान गाँव खुशहाल हों तो देश की अर्थव्यवस्था सुधरे July 22, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 6 Comments on गाँव खुशहाल हों तो देश की अर्थव्यवस्था सुधरे – मुलखराज विरमानी स्वयंसेवी संस्थाएं और जागरूक जनता इस बात से चिंतित है कि हमारे गाँव, 63 वर्ष स्वतंत्रता के पश्चात् भी, गरीब और असहाय क्यों हैं? माना कि खेती की उपज की वस्तुओं की कीमतों में काफी उछाल आया है परंतु इस उछाल का लाभ बीच-विचोले व्यापारियों और फुटकर विक्रेताओं ने अधिक उठाया। किसानों […] Read more » village अर्थव्यवस्था गांव
खेत-खलिहान जैव विविधता पर संकट की छाया July 19, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on जैव विविधता पर संकट की छाया – नेहा जैन भारत में जंगलों, आर्द्रभूमियों और समुद्री क्षेत्रों में कई तरह की जैव विविधता पाई जाती है। भारत में स्तनधारी जंतुओं में 350, पक्षियों में 1224, सांपों में 408, उभयचर प्राणियों में 197, मछलियों में 2546 और फल-पौधों में 15 हजार प्रजातियां है। परंतु जलवायु परिवर्तन, जंगलों की समाप्ति व कई अन्य कारणों […] Read more » Bio-diversity जैव विविधता
खेत-खलिहान दाल-रोटी का टूटता जोड़ा और बढ़ता कुपोषण July 10, 2010 / December 23, 2011 by रमेश कुमार दुबे | 2 Comments on दाल-रोटी का टूटता जोड़ा और बढ़ता कुपोषण -रमेश कुमार दुबे दलहनों की पैदावार बढ़ाने के लिए लगभग दो दर्जन योजनाओं की असफलता के बाद केंद्र सरकार ने सीधे किसानों को ज्यादा कीमत देने की रणनीति अपनाई है। इसके तहत दलहनी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी बढ़ोत्तरी की गई है। जहां अरहर के समर्थन मूल्य में सात सौ रूपये की वृद्धि […] Read more » Daal कुपोषण दाल-रोटी
खेत-खलिहान बदहाली के बीच खुशहाली- गुजरात की कृषि क्रांति July 5, 2010 / December 23, 2011 by रमेश कुमार दुबे | 5 Comments on बदहाली के बीच खुशहाली- गुजरात की कृषि क्रांति -रमेश कुमार दुबे एक ऐसे दशक में जब देश भर में कृषि की विकास दर 2 से 2.5 फीसदी के बीच उलझी हुई हो उसी दौरान गुजरात में राष्ट्रीय औसत से तीन गुनी कृषि विकास दर चमत्कृत करती है। उम्मीद है कि आने वाले समय यह दर नौ फीसदी वार्षिक हो सकती है। अब तो […] Read more » Gujarat कृषि क्रांति गुजरात
खेत-खलिहान वर्षा सिंचित खेती की क्षमताओं का इस्तेमाल करना June 10, 2010 / December 23, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment -संत बहादुर भारत में खेती के कुल 1403.00 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में से सिर्फ 608.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र ही सिंचित है तथा शेष 794.40 लाख हेक्टेयर वर्षा सिंचित है। खाद्य उत्पादन का करीब 55 प्रतिशत सिंचित भूमि में होता है. जबकि वर्षा सिंचित भूमि का योगदान करीब 45 प्रतिशत ही है। वर्षा सिंचित खेती में […] Read more » Farming कृषि खेती
खेत-खलिहान पूर्वी भारत में हरित क्रांति के विस्तार पर ज़ोर June 6, 2010 / December 23, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | Leave a Comment -फ़िरदौस ख़ान नई दिल्ली. सरकार पूर्वी भारत में हरित क्रांति के विस्तार पर ख़ासा ज़ोर दे रही है. देश के पूर्वी क्षेत्र यानी बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल तक हरित क्रांति का फैलाव करने के लिए केंद्रीय बजट 2010 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त […] Read more » Green Revolution हरित क्रांति