विधि-कानून राईट टू रिजेक्ट व जनजबाबदेही से बनेगा लोकतंत्र मजबूत September 27, 2013 / September 27, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment अभिषेक रंजन सुप्रीम कोर्ट ने आज नकारात्मक मतदान अर्थात “राईट टू रिजेक्ट” की बहुत पुरानी मांग आज मान ली. कोर्ट ने अपने एक फैसले में चुनाव आयोग को ईवीएम मशीनों में “कोई नही” बटन लगाने के निर्देश दिए है. वोटर को अपने निर्वाचन क्षेत्र में खड़े उम्मीदवारों में से सभी को अस्वीकार करने का हक़ […] Read more » राईट टू रिजेक्ट
जन-जागरण विधि-कानून न्यायपालिका के पंख कुतरने की कोशिश September 25, 2013 by श्यामल सुमन | 1 Comment on न्यायपालिका के पंख कुतरने की कोशिश “यह आरोप मेरी बढ़ती लोकप्रियता के कारण विरोधियों ने साजिश के तहत लगाया है” – “मुझे भारत की न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है” – आदि आदि —पिछले २-३ दशकों से आरोपी रहनुमाओं के ऐसे खोखले बयान सुन सुनकर हम सभी आजिज हो गए हैं। जब जब न्यायालय द्वारा देशहित में कोई महत्वपूर्ण फैसला दिया है जो तथाकथित “रहनुमाओं” के […] Read more » न्यायपालिका के पंख कुतरने की कोशिश
राजनीति विधि-कानून जम्मू कश्मीर में सेना शिविर हटाने की नई रणनीति September 25, 2013 / September 25, 2013 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | Leave a Comment डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद अपनी ढलान पर है । श्रीनगर के लाल चौक में किसी कश्मीरी से बात करें तो वह यही कहता है कि अब यहाँ से गन कल्चर जा रहा है और उसके कारण पर्यटक आने शुरु हो गये हैं । मोटे तौर पर राज्य के आतंकवादियों […] Read more » जम्मू कश्मीर में सेना शिविर
विधि-कानून समाज मुजफ़्फ़रनगर, लव ज़िहाद, और लचर संवैधानिक तंत्र September 25, 2013 by विनोद बंसल | Leave a Comment – विनोद बंसल मुजफ्फरनगर दंगे के बाद अब उच्चतम न्यायालय न सिर्फ़ दंगों की जांच करेगा बल्कि राहत एवं पुनर्वास कार्यो की निगरानी भी करेगा। मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक तनाव की हिंसक झड़पों के बाद उसके भीषण दंगे में तब्दील हो जाने के पीछे शासन और प्रशासन की सुस्ती या षडयत्रों के संकेत साफ दिख रहे […] Read more » लचर संवैधानिक तंत्र
राजनीति विधि-कानून चुनाव सुधार की बढ़ती जरूरत September 23, 2013 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव राजनीति का बहुआयामी अपराधीकरण शायद हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी बिडंबना है। हर चुनाव के बाद संसद और विधानसाभाओं में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ी हुर्इ दिखार्इ देती है। राजनीतिक दलों के पदों और समितीयों में भी इनकी शकित बढ़ी है और प्रभाव का विस्तार हुआ है। तय है,यह स्थिति लोकतंत्रिक व्यवस्था पर […] Read more » चुनाव सुधार की बढ़ती जरूरत
विधि-कानून भारत में भ्रष्टाचार क्या शिष्टाचार हो चुका है August 13, 2013 / August 14, 2013 by डा.राज सक्सेना | 1 Comment on भारत में भ्रष्टाचार क्या शिष्टाचार हो चुका है डा.राज सक्सेना देश में आए दिन सत्तारूढ़ दल के खुलने वाले आर्थिक घोटालों के प्रति सत्तारूढ़ दल का बेशर्मी से उसे नकार कर अपनी ही किसी एजेंसी को जाँच सौंप कर जाँच रिपोर्ट आने तक खुद को स्वयं ईमानदार घोषित कर दूसरों को बेईमान कह कर गरियाना अब जनता को कुछ अजीब […] Read more » भारत में भ्रष्टाचार क्या शिष्टाचार हो चुका है
विधि-कानून न्याय की भाषा हिन्दी बनाम देश की दूसरी आजादी August 8, 2013 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment हिंदी हमारी राजभाषा है। पर वास्तव में राजभाषा अभी तक अंग्रेजी ही है। देश के सभी उच्च न्यायालयों व सर्वोच्च न्यायालय की भाषा तो पूर्णत: अंग्रेजी है। इन सभी न्यायालयों में वादों की सुनवाई और आदेशों का निष्पादन अंग्रेजी में ही होता है। अब इस प्रकार के न्यायालयों के अंग्रेजी मोह को समाप्त करने के […] Read more » न्याय की भाषा हिन्दी
विधि-कानून तन्त्र से मुकाबला August 6, 2013 by गंगानन्द झा | 6 Comments on तन्त्र से मुकाबला संस्मरण हमारा शहर एक कस्बानुमा जिला मुख्यालय था। इस जिले को बने अभी कुछ ही साल हुए थे। अभी विभिन्न सरकारी विभागों का अस्तित्व में आना चल ही रहा था। I मैं नगर के प्रतिष्ठित कॉलेज में व्याख्याता था। हमलोग प्रोफेसर साहब कहे जाते थे। एक सुबह मैं नहाने के लिए प्रस्तुत हो रहा था, […] Read more » तन्त्र से मुकाबला
विधि-कानून भारत में लगभग सभी सरकारी संगठन पुलिस थाने के समान ही हैं July 24, 2013 by एडवोकेट मनीराम शर्मा | Leave a Comment प्राय: अखबारों की सुर्ख़ियों में ख़बरें रहती हैं कि अमुक अपराध में पुलिस ने ऍफ़ आई आर नहीं लिखी और अपराधियों को बचाया है| पुलिस का कहना होता है कि लोग व्यक्तिगत रंजिशवश झूठी ऍफ़ आई आर लिखवाते हैं और इससे उनके इलाके में अपराध के आंकड़े अनावश्यक ही बढ़ जाते हैं जिससे उनकी रिपोर्ट […] Read more »
विधि-कानून पंथ निरपेक्षता है संविधान की मूल भावना July 24, 2013 by राकेश कुमार आर्य | 2 Comments on पंथ निरपेक्षता है संविधान की मूल भावना भारत के संविधान का उद्देश्य संकल्प 22 जनवरी 1947 को पारित किया गया था। इस संकल्प के माध्यम से भावी भारत का उद्देश्य स्पष्ट किया गया था। इस उद्देश्य संकल्प की धारा 5 में कहा गया है-‘भारत की जनता को सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक न्याय, प्रतिष्ठा और अवसर की तथा विधि के समक्ष समता, विचार, […] Read more » पंथ निरपेक्षता है संविधान की मूल भावना
विधि-कानून अदालतों से बंधती उम्मीदें July 23, 2013 by अरविंद जयतिलक | Leave a Comment अरविंद जयतिलक अकसर राजनीतिक दलों द्वारा सार्वजनिक मंच से मुनादी पीटा जाता है कि राजनीति का अपराधीकरण लोकतंत्र के लिए घातक है। वे इसके खिलाफ कड़े कानून बनाने और चुनाव में दागियों को टिकट न देने की हामी भरते हैं। लेकिन जब उम्मीदवार घोषित करने का मौका आता है तो दागी ही उनकी पहली पसंद […] Read more » अदालतों से बंधती उम्मीदें
विधि-कानून भ्रष्ट शासन व्यवस्था की बुनियाद July 22, 2013 by एडवोकेट मनीराम शर्मा | 1 Comment on भ्रष्ट शासन व्यवस्था की बुनियाद ब्रिटिश साम्राज्य के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए गवर्नर जनरल ने भारतियों पर विभिन्न कानून थोपे थे| यह स्वस्प्ष्ट है कि भारत में राज्य पदों पर बैठे लोग तत्कालीन ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतिनिधि थे और उनका मकसद कानून बनाकर जनता को न्याय सुनिश्चित करना नहीं बल्कि ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार करना, उसकी पकड […] Read more » भ्रष्ट शासन व्यवस्था की बुनियाद