मीडिया सिनेमा हिंसा के परतों के बीच “तितली” November 3, 2015 by जावेद अनीस | Leave a Comment जावेद अनीस जौहर,चोपड़ा और बड़जात्या की फिल्मों में अमूमन सुखी और संपन्न परिवारों के बारे में बताया जाता है,जहाँ नैतिकता व संस्कारों का ध्यान हद दर्जे तक रखा जाता है.वहां कोई टकराहट नहीं होती है और ये हर तरह से एक आदर्श परिवार होते हैं जहाँ सभी लोग खुश रहते हैं. यह सब दर्शकों को […] Read more » “तितली”
जन-जागरण टॉप स्टोरी मीडिया साहित्य तब कहां गया था तुम्हारा धर्म? November 3, 2015 / November 3, 2015 by देविदास देशपांडे | Leave a Comment किसी जंगल में शिकार का दौर चलता है, तब आम तर पर कुछ लोग जानवर के पीछे आवाज लगाते चलते है। ये लोग जानवर को एक दिशा में धकेलते है ताकि असली शिकारी उसकी शिकार कर सकें। फिलहाल देश में पुरस्कार वापसी का जो दौर चला है, वह इसी प्रथा की याद दिलाता है। अपने […] Read more » Featured samman vapsi तब कहां गया था तुम्हारा धर्म? पुरस्कार वापसी
मीडिया सार्थक पहल बड़ी कामयाबी है छोटा राजन की गिरफ़्तारी October 28, 2015 / October 28, 2015 by मदन तिवारी | Leave a Comment सोमवार दोपहर होते ही देश के साथ साथ विश्व के तमाम मीडिया टीवी चैनल्स, न्यूज़ वेबसाइट्स में डॉन राजेंद्र सदाशिव निखलजे उर्फ़ छोटा राजन की गिरफ़्तारी की ख़बरें प्रकाशित होने लगी। छोटा राजन की गिरफ़्तारी की खबर के साथ साथ उसकी तस्वीर भी प्रकाशित हुई जिससे देश की जनता और सरकार ने चैन की सांस […] Read more » Featured छोटा राजन छोटा राजन की गिरफ़्तारी
मीडिया जज्बातों से खेलना बन्द कीजिए ….. October 26, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment अरविन्द मंडलोई जो बात मैं लिखने जा रहा हूँ उसको सिर्फ इस संदर्भ में समझिये कि समाज का जो मनोविज्ञान है वो क्या है ? हर आदमी एक खास मुकाम हासिल कर जिन्दा रहना चाहता है । हर आदमी अपने काम को कर्त्तव्य नहीं समाज पर एहसान मानता है । केन्द्रीय कार्यालयों में सेवारत चपरासी […] Read more » Featured जज्बातों से खेलना बन्द कीजिए .....
मीडिया आत्ममंथन करे मीडिया October 16, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment डॉ.अमित प्रताप सिंह पत्रकारों से मार-पीट या जान से मार देने जैसी घटनाओं की के समाचार आजकल आम होते जा रहे हैं, ऐसी घटनाओं के बाद सामान्यतः लोकतंत्र के झंडाबरदार अंततः जुबानी जमाखर्च करके अपने – अपने काम में लग जाते हैं और बेचारा मीडिया अपने फूटे सर और शरीर पर बंधी पट्टियों के साथ […] Read more » आत्ममंथन करे मीडिया
मीडिया प्रवक्ता के 8वें स्थापना दिवस पर आभार ज्ञापन October 16, 2015 / October 16, 2015 by संजीव कुमार सिन्हा | Leave a Comment आज 16 अक्टूबर है। इसी दिन आज से सात साल पूर्व 2008 में एक प्रकल्प की शुरुआत हुई थी। www.pravakta.com। तब से यह निरंतरता के साथ सक्रिय है। प्रवक्ता डॉट कॉम के 8वें स्थापना दिवस पर संपादक के नाते मैं आप सब लेखकों और पाठकों, जो प्रवक्ता के आधारस्तंभ हैं, के प्रति हार्दिक आभार प्रकट करता […] Read more » प्रवक्ता डॉट कॉम
मीडिया विविधा नष्ट हो रही है साहित्य अकादमी की प्रतिष्ठा October 14, 2015 by शैलेन्द्र चौहान | Leave a Comment शैलेंद्र चौहान एक के बाद एक लेखकों के पुरस्कार लौटाने के बाद से साहित्य अकादेमी विवादों में है। देश के कुछ मशहूर लेखकों ने गत दिनों साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिए। इन लेखकों का विरोध दादरी हिंसा और कन्नड़ लेखक एम.एम. कलबुर्गी की हत्या को लेकर है। कुल मिलाकर अब तक 21 लेखक साहित्य अकादमी […] Read more » Featured साहित्य अकादमी की प्रतिष्ठा
जन-जागरण मीडिया राजनीति लघु समाचार पत्रों का योगदान एवं चुनौतियां September 24, 2015 by बी.आर.कौंडल | Leave a Comment मनुष्य एक सामाजिक प्राणी होने के नाते एक-दूसरे से मिल-जुल कर रहना पसंद करता है तथा आस-पास क्या हो रहा है के जानने की जिज्ञासा रखता है। मनुष्य की इस इच्छा पूर्ति का काम करते हैं समाचार पत्र व मिडिया जिसे प्रजातन्त्र का चौथा स्तम्भ भी कहते हैं। प््राचीनकाल में समाचार जानने के साधन […] Read more » लघु समाचार पत्र लघु समाचार पत्रों का चुनौतियां लघु समाचार पत्रों का योगदान
मीडिया विविधा आइए बनाएं एकात्म मानवदर्शन पर आधारित मीडिया September 24, 2015 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment जन्मशती वर्ष प्रसंग ( जयंती 25 सितंबर ) संजय द्विवेदी पं. दीनदयाल उपाध्याय स्वयं बहुत बड़े पत्रकार और संचारक थे। अपनी विचारधारा को पुष्ट करने के लिए पत्रों का संपादन, प्रकाशन, स्तंभलेखन, पुस्तक लेखन उनकी रूचि का विषय था। उन्होंने लिखने के साथ-साथ बोलकर भी एक प्रभावी संचारक की भूमिका का निर्वहन किया है। उनकी […] Read more » Featured आइए बनाएं एकात्म मानवदर्शन पर आधारित मीडिया एकात्म मानवदर्शन एकात्म मानवदर्शन पर आधारित मीडिया मीडिया
मीडिया विविधा लोकतंत्र में पत्रकारिता September 21, 2015 / September 21, 2015 by शैलेन्द्र चौहान | 1 Comment on लोकतंत्र में पत्रकारिता शैलेन्द्र चौहान स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान पत्रकारिता को एक मिशन बनाकर सहभागी के रूप में अपनाया गया था। स्वतन्त्रता के पश्चात भी पत्रकारिता को व्यावसायिकता से जोड़कर नहीं देखा गया, किन्तु वैश्वीकरण, औद्योगीकरण के इस दौर में पत्रकारिता को व्यवसाय बनाकर प्रस्तुत किया गया। इस कारण से देश के बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों में करोड़ों-अरबों की धनराशि लगाकर इसमें अपना सशक्त हस्तक्षेप करना शुरू […] Read more » Featured journalism in democracy पत्रकारिता लोकतंत्र लोकतंत्र में पत्रकारिता
मीडिया विविधा कुछ सवाल जिनके जवाब जरूरी हैं। September 18, 2015 by डॉ प्रवीण तिवारी | 1 Comment on कुछ सवाल जिनके जवाब जरूरी हैं। डॉ. प्रवीण तिवारी, एंकर IBN 7 मेरे ही शो के दौरान एक ऐसी निंदनीय घटना हुई जो घोर भर्त्सना के काबिल है। इस घटना की मैं और हमारा चैनल दोनों ही निंदा कर रहे हैं। निंदा करते हैं तो दिखा क्यूं रहे हैं? ऐसे लोगों को बुलाते ही क्यूं हैं? आप एंकर हैं आपने रोकने […] Read more » कुछ सवाल जिनके जवाब जरूरी हैं।
मीडिया विविधा हिन्दी प्रेस का पैनापन September 10, 2015 by बी एन गोयल | Leave a Comment बी एन गोयल अभी हाल ही में ओम थानवी जनसत्ता के संपादक के पद से सेवा मुक्त हुए हैं। पाठकों ने कुछ प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की हैं। उमेश चतुर्वेदी जी ने एक लेख में थानवी जी के माध्यम से जनसत्ता की अच्छी व्याख्या की है। पढ़ते हुए मुझे अपना समय याद आ गया जब 1961 […] Read more » Featured हिन्दी प्रेस का पैनापन