मीडिया विविधा लोकतंत्र में पत्रकारिता September 21, 2015 / September 21, 2015 by शैलेन्द्र चौहान | 1 Comment on लोकतंत्र में पत्रकारिता शैलेन्द्र चौहान स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान पत्रकारिता को एक मिशन बनाकर सहभागी के रूप में अपनाया गया था। स्वतन्त्रता के पश्चात भी पत्रकारिता को व्यावसायिकता से जोड़कर नहीं देखा गया, किन्तु वैश्वीकरण, औद्योगीकरण के इस दौर में पत्रकारिता को व्यवसाय बनाकर प्रस्तुत किया गया। इस कारण से देश के बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों में करोड़ों-अरबों की धनराशि लगाकर इसमें अपना सशक्त हस्तक्षेप करना शुरू […] Read more » Featured journalism in democracy पत्रकारिता लोकतंत्र लोकतंत्र में पत्रकारिता
मीडिया विविधा कुछ सवाल जिनके जवाब जरूरी हैं। September 18, 2015 by डॉ प्रवीण तिवारी | 1 Comment on कुछ सवाल जिनके जवाब जरूरी हैं। डॉ. प्रवीण तिवारी, एंकर IBN 7 मेरे ही शो के दौरान एक ऐसी निंदनीय घटना हुई जो घोर भर्त्सना के काबिल है। इस घटना की मैं और हमारा चैनल दोनों ही निंदा कर रहे हैं। निंदा करते हैं तो दिखा क्यूं रहे हैं? ऐसे लोगों को बुलाते ही क्यूं हैं? आप एंकर हैं आपने रोकने […] Read more » कुछ सवाल जिनके जवाब जरूरी हैं।
मीडिया विविधा हिन्दी प्रेस का पैनापन September 10, 2015 by बी एन गोयल | Leave a Comment बी एन गोयल अभी हाल ही में ओम थानवी जनसत्ता के संपादक के पद से सेवा मुक्त हुए हैं। पाठकों ने कुछ प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की हैं। उमेश चतुर्वेदी जी ने एक लेख में थानवी जी के माध्यम से जनसत्ता की अच्छी व्याख्या की है। पढ़ते हुए मुझे अपना समय याद आ गया जब 1961 […] Read more » Featured हिन्दी प्रेस का पैनापन
मीडिया राजनीति नितीश का टकराव अंदाज भाजपा को देगा बढ़त August 21, 2015 by प्रवीण गुगनानी | 2 Comments on नितीश का टकराव अंदाज भाजपा को देगा बढ़त कभी नमो के पांच करोड़ से रन आऊट हुए नितीश अब नमो के सवा सौ लाख करोड़ से स्टम्पड आउट होते स्पष्ट दिख रहे. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आसन्न बिहार चुनाव के पहले बिहार को सवा सौ लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज देकर एक प्रकार से नितीश पर साहसिक किन्तु डबल गूगली […] Read more » नितीश का टकराव भाजपा को देगा बढ़त
मीडिया ओम थानवी के बहाने जनसत्ता पर कुछ विचार August 21, 2015 by उमेश चतुर्वेदी | 2 Comments on ओम थानवी के बहाने जनसत्ता पर कुछ विचार 1986-87 की बात है…तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और तत्कालीन वित्त मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह में अदावत शुरू हो गई थी..उन्हीं दिनों बोफोर्स तोप सौदे को लेकर राजीव सरकार कठघरे में थी…इंडियन एक्सप्रेस अखबार से पहली बार पल्ला उन्हीं दिनों पड़ा..चित्रा सुब्रमण्यम की रिपोर्टें उन दिनों तहलका मचा रखी थीं..उन्हीं दिनों इंडियन एक्सप्रेस के अखबार जनसत्ता […] Read more » जनसत्ता
मीडिया सिनेमा छात्र , संस्थान और विचारधारा August 20, 2015 by नीतेश राय | 1 Comment on छात्र , संस्थान और विचारधारा जब तकनीकी रूप से देश के होनहारों को सुदृढ़ बनाने वाले संस्थानों का ही राजनीतिकरण हो जाय तो आप समझ सकते है , उस देश की विकाश यात्रा का क्या हश्र होंगा.यह भारतीय राजनीत की बहुत बड़ी विडम्बना है कि देश कों तकनीकी रूप से परिपूर्ण युवाओं के फ़ौज उपलब्ध कराने वाले संस्थान भी आज […] Read more »
टॉप स्टोरी मीडिया आखिर क्यूं मिर्ची चबा रहें पाकिस्तान परस्त लोग याकूब की फांसी पर ? August 12, 2015 by हरिहर शर्मा | 1 Comment on आखिर क्यूं मिर्ची चबा रहें पाकिस्तान परस्त लोग याकूब की फांसी पर ? हाल ही में उधमपुर आतंकी हमले में जिंदा पकडे गये पाकिस्तानी आतंकी नावेद ने कई अहम खुलासे किये हैं | उनमें सबसे अहम खुलासा यह है कि पाकिस्तान में बैठकर याकूब का भाई टाइगर मेमन, दाऊद इब्राहीम, और हफीज सईद के साथ मिलकर प्लेन हाईजैक की साजिश रच रहा था | इन लोगों का मकसद […] Read more »
मीडिया राजनीति भारत का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सरकार की मर्जी पर ! August 11, 2015 by शैलेन्द्र चौहान | Leave a Comment शैलेन्द्र चौहान यह बेहद चिंताजनक स्थिति है कि आज भारतीय मीडिया, खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अपने लिए निर्धारित मानदंडों और आचरण संहिता को भूलकर किसी न किसी राजनीतिक दल का अनुयायी या उग्र राष्ट्रवादी संगठनों की तरह व्यवहार करने लगा है। एंकर चीख चीख कर अशोभन लहजे में अपनी परम देश निष्ठा का परिचय दे रहे […] Read more » इलेक्ट्रॉनिक मीडिया
मीडिया राजनीति देश को क्यों बांट रहा है मीडिया August 1, 2015 by संजय द्विवेदी | 3 Comments on देश को क्यों बांट रहा है मीडिया कलाम हों रोलमाडल या मेमन सोचना होगा -संजय द्विवेदी काफी समय हुआ पटना में एक आयोजन में माओवाद पर बोलने का प्रसंग था। मैंने अपना वक्तव्य पूरा किया तो प्रश्नों का समय आया। राज्य के बहुत वरिष्ठ नेता, उस समय विधान परिषद के सभापति रहे स्व.श्री ताराकांत झा भी उस सभा में थे, उन्होंने मुझे […] Read more » देश मीडिया
टॉप स्टोरी मीडिया शख्सियत बनावटीपन से ताजिंदगी दूर रहे यादवराव देशमुख July 14, 2015 / July 14, 2015 by उमेश चतुर्वेदी | 1 Comment on बनावटीपन से ताजिंदगी दूर रहे यादवराव देशमुख उमेश चतुर्वेदी पांचजन्य के संपादक रहे, सहजता की अनन्य मूर्ति, खालिस सहज इन्सान और अपने चहेतों के बीच काकू के तौर पर मशहूर यादवराव देशमुख चार जून को वहां के लिए कूच कर गए, जहां से कोई लौटकर नहीं आता…दीनदयाल शोध संस्थान के प्रमुख रहे 87 साल के यादव राव देशमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के […] Read more »
मीडिया राजनीति मोदी प्रशंसकों पर चेतन भगत का एसिड अटैक July 13, 2015 by प्रवीण गुगनानी | 5 Comments on मोदी प्रशंसकों पर चेतन भगत का एसिड अटैक एक स्थापित हिंदी समाचार पत्र में 9 जुलाई को प्रकाशित चेतन भगत का एक आलेख प्रकाशित हुआ है, “सोशल मीडिया पर भक्तों की नई प्रजाति”. एसिड रस (साहित्य में नया रस) में डूबे इस लेख को मैनें बलात पढ़ा! अंग्रेजी लेखकों के बौद्धिक दंभ का शिकार हम भारतीय कोई पहली बार नहीं हो रहें है, […] Read more » चेतन भगत चेतन भगत का एसिड अटैक
मीडिया यादों में अक्षय July 11, 2015 by अंकुर विजयवर्गीय | Leave a Comment दिसंबर की उस सर्द भरी रात में किसी ने पीछे से आकर पीठ पर एक जोरदार हाथ मारा। पीछे पलटकर देखा तो एक छह फुट का लंबा चौड़ा आदमी खड़ा था। वो तेज आवाज में बोला, कुछ खाया पीया करो, ऐसे कैसे पत्रकारिता करोगे। कहीं काम करते हुए मर गए, तो फिर हम बस तुम्हे […] Read more »