मीडिया

यह कैसा ‘राष्ट्रधर्म’ है?

माचार पत्र एवं दृश्य मीडिया इसमें एक कारगर हथियार है। विगत इतिहास में सरकारी पैसों से वामपंथियों ने इसकी दम पर जहर घोला है घोल रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में मूल्य आधारित पत्रकारिता राष्ट्रीय विचारों की पत्रकारिता के टिमटिमाते ही सही दीए कौन कौन से हैं यह सरकार को सरकारी चश्मा हटाकर देखना होगा, समझना होगा। ध्ांधे के लिए पत्रकारिता एवं विचार के लिए पत्रकारिता इसमें सरकार को भेद करना होगा।

वेब पत्रकारिता का चमकता भविष्य

आज वेब-संस्करण चलाने बाली समाचार-पत्र और पत्रिकाओं की संख्या कम है. भविष्य में हर पत्र-पत्रिका ऑन-लाईन होगी. साथ ही साथ स्वतंत्र न्यूज पोर्टल की संख्या में भी वृद्धि होगी. पत्रिका ‘न्यूज वीक’ ने अपने प्रिंट संस्करण को बंद कर ऑनलाईन संस्करण जारी रखने का फैसला किया है. ‘जनसत्ता’के बारे में यह आसार लगाया जा रहा है कि समाचार-पत्र घाटे से बचने के लिए प्रिंट संस्करण बंद कर ऑन-लाईन से अपनी सेवा जारी रखेगा. बात स्पष्ट है कि जिस पत्र का लक्षित समूह उच्च वर्ग है और जिनके पास इंटरनेट आसानी से उपलब्ध है, वह धीरे-धीरे प्रिंट संस्करण बंद कर पूर्ण रूप से ऑन-लाईन हो जायेगा.

इतिहास से खिलवाड़ का किसी को हक नहीं

महारानी पद्मावती पर केन्द्रित दो प्रख्यात महाकाव्य ‘पद्मावत’ और ‘जौहर’ हिन्दी-साहित्य में उपलब्ध हैं। सूफी संत परम्परा के कवि जायसी ने 947 हिजरी अर्थात सन् 1540 ईसवी के लगभग ‘पद्मावत’ महाकाव्य की रचना पूर्ण की। इसमें चित्तौड़ पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण और पद्मावती के जौहर का सविस्तार वर्णन है किन्तु कहीं भी पद्मावती की प्रस्तुति खिलजी की प्रेमिका के रुप में नहीं है।

सामाजिक सरोकार और स्टारडम

कई राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका गांधी को भी अपनी माँ सोनिया गांधी से उनकी संपत्ति में पचास प्रतिशत हिस्सा मांग लेना चाहिए क्योंकि जिस तरीके से पूरी कांग्रेस और श्री राहुल गांधी परफॉर्म कर रहे है उससे बहुत संभव है की श्रीमती सोनिया गांधी की आधी से ज़्यादा संपत्ति राहुल जी को लॉन्च करने में व्यय हो जाये।