मीडिया

सरकार द्वारा 500 और 1000 की करेंसी के विमुद्रीकरण के उद्देश्यों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतू कुछ और सुझाव / प्रतिवेदन

प्रतिष्ठा में, श्री नरेंद्र मोदी जी माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार नई दिल्ली – 110001 बिषय

‘भारत की ज्ञान परंपरा’ पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संविमर्श 5 दिसम्बर से

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय,भोपाल की ओर से ‘भारत की ज्ञान परंपरा’ विषय पर 5-6 दिसम्बर को दो दिवसीय राष्ट्रीय संविमर्श का आयोजन किया जा रहा है।

प्रवक्ता डॉट कॉम : मीडिया एवं राष्ट्रीय सुरक्षा पर 19 नवंबर 2016 को सेमीनार

प्रवक्ता डॉट कॉम के सफलतम आठ साल पूरे होने पर नई दिल्ली के स्पीकर हॉल, कांस्टिट्यूशन क्लब में 19 नवंबर को एक संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। मीडिया एवं राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर होने वाली इस संगोष्ठी की अध्यक्षता आईआईएमसी के महानिदेशक श्री के.जी.सुरेश करेंगे ।

मर्यादा उल्लंघन का दंड

मीडिया को ऐसा सब-कुछ परोसने की छूट नहीं मिलनी चाहिए, जो राष्ट्रविरोधी हो ? वैसे भी टेलीविजन दृष्य व श्रव्य माध्यम है और इसका तत्काल व्यापक असर पड़ता है। हालांकि ऐसा नहीं है कि टीवी पत्रकारिता को नियंत्रण में रखने या सजा देने के नियम हैं ही नहीं। केबल टीवी नेटवर्क (नियम) अधिनियम के तहत काबू करने के कानून हैं।

खत्म हुई मुश्किल

चूंकि जिन फिल्मों के प्रदर्शन को लेकर विवाद चल रहा है, उन फिल्मों में काम करने वाले कलाकार वैध तरीके से वीजा लेकर काम कर रहे हैं। इसलिए फिल्मों में न तो उन्हें काम देना गलत है और न ही उनका काम करना गलत है। इसलिए इन कलाकारों की फिल्मों पर रोक वैधानिक नहीं कहीं जा सकती थी ? वैसे हमारे यहां अभिव्यक्ति की आजादी को संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है।

पाक कलाकारों पर पाबंदी का औचित्य

हालांकि पाक या किसी भी देश के संस्कृतिकर्मियों को आतंकवादियों से न तो तुलना की जा सकती है और न ही उन्हें उस दृष्टि से देखा जा सकता है। वैसे भी भारत ने हमेशा पाक कलाकारों का मान रखा है। पाक गायक कलाकार अदनान सामी को तो भारतीय नागरिकता तक दी है। इसी तरह बांग्लादेश मूल की लेखिका तस्लीमा नसरीन को भारतीय मुस्लिमों के विरोध के बावजूद भारत षरण व संरक्षण दिए हुए हैं।

कथित कलाकारों का कच्चापन….!!

फर्क सिर्फ इतना है कि शहरों में नेता चंदे के लिए कारोबारियों के पीछे भागते हैं । वहीं बड़े कारोबारियों के पीछे बड़े राजनेता उनके प्रदेश में निवेश के लिए कि भैया कुछ निवेश हमारे राज्य में भी करो। बड़ी बेरोजगारी है यहां। छोटे हों या बड़े कारोबारी हर खेमे को साधने में गजब का संतुलन दिखाते हैं। देश में जब कभी कलाकारों की राष्ट्रीयता को लेकर विवाद छिड़ता है मुझे अतीत की ऐसी घटनाएं बरबस ही याद आ जाती है।

मुझे भी गालियाँ पड़ती हैं, पर मै आपकी तरह सार्वजनिक रुदन नहीं करता, रवीश कुमार!

मेरी ही तरह और भी तमाम लेखक मित्रों को ये सब सुनना पड़ता होगा, लेकिन उन्हें भी कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन ऐसी ही प्रतिक्रियाओं से रवीश का जीना मुश्किल हो गया है, तो इसका क्या मतलब समझा जाय ? या तो ये कि उनकी निर्भीकता की सब बातें हवाई हैं अथवा ये कि वे डरने का बहुत अच्छा अभिनय कर रहे हैं। बिलकुल वैसा ही ‘अच्छा अभिनय’ जैसा रवीश की रिपोर्ट में करते थे। सच क्या है, रवीश ही जानें। हाँ, सोए हुए को जगाया जा सकता है, सोने का अभिनय करने वाले को नहीं। पत्रकारिता के छात्रों से भी कहना चाहूँगा कि चयन का अधिकार आपको है, लेकिन अपना पत्रकारीय आदर्श चुनने से पहले महान निर्भीक पत्रकारों की विरासत और अपने वर्तमान चयन की तुलना कर लीजिएगा।

पत्रकारिता : मानक नहीं मान्यता बदलना होगी

आज के दौर में पत्रकारिता के मानक जो नये बन रहे है वो आने वाली पीढ़ी के साथ भी न्याय नहीं कर रहे है, वर्तमान की कलम ने भविष्य के अध्याय जो लिखने लगे है वो कालांतर में शर्म का विषय बन कर रह जाएँगे | अब तो कोई राजेंद्र माथुर , माखन लाल चतुर्वेदी नहीं बनना चाहता, कोई संघर्ष कर के अस्तिस्व नहीं बचना चाहता ……
हालात इतने बदतर होते जा रहे है की सोच कर भी सिहरन उठ जाती है ,किस दौर में आ गई पत्रकारिता , कैसे कैसे हालत बन गये , आख़िर क्या ज़रूरत थी मानको के साथ खिलवाड़ करने की , कौन सा अध्याय लिख आई ये पीढ़ी पत्रकारिता की अवधारणा में ?

सिरील अलमिदा : इसे कहते हैं, पाक पत्रकारिता !

अलमिदा पर राष्ट्र-द्रोह के आरोप लगाए गए। उन्हें गोपनीयता भंग करने के अपराध में गिरफ्तार करने की मांग की गई और अब उनके विदेश जाने पर रोक लगा दी गई है। सरकार इतनी बौखला गई है कि प्रधानमंत्री और सेनापति को मिलना पड़ा, इस मामले पर विचार करने के लिए। लेकिन ‘डॉन’ के संपादक अड़े हुए हैं

एक पाती आदरणीय रविश जी के नाम डॉ नीलम महेंद्र की कलम से

अफसोस है कि आप इस देश की मिट्टी से पैदा होने वाले आम आदमी को पहचान नहीं पाए । यह आदमी न तो अमीर होता है न गरीब होता है जब अपनी पर आ जाए तो केवल भारतीय होता है । इनका डीएनए गुरु गोविंद सिंह जी जैसे वीरों का डीएनए है जो इस देश पर एक नहीं अपने चारों पुत्र हंसते हंसते कुर्बान कर देते हैं।इस देश की महिलाओं के डीएनए में रानी लक्ष्मी बाई रानी पद्मिनी का डिएनए है कि देश के लिए स्वयं अपनी जान न्यौछावर कर देती हैं ।