Category: राजनीति

आर्थिकी राजनीति

केंद्र सरकार द्वारा बजट के माध्यम से भारत में रोजगार के नए अवसर निर्मित करने एवं आर्थिक विकास को गति देने का प्रयास

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हाल ही में लोकसभा के लिए सम्पन्न हुए चुनाव में भारतीय नागरिकों ने लगातार तीसरी बार एनडीए की अगुवाई में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को सत्ता की चाबी आगामी पांच वर्षों के लिए इस उम्मीद के साथ पुनः सौंपी है कि आगे आने वाले पांच वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा देश में आर्थिक विकास को और अधिक गति देने के प्रयास जारी रखे जाएंगे। भारत की वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन ने 23 जुलाई 2024 को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट भारतीय संसद में पेश किया है। इस बजट के माध्यम से भारत की आर्थिक विकास दर को उच्च स्तर पर ले जाने का प्रयास किया गया है।  केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 9 प्राथमिकताएं तय की है। कृषि क्षेत्र में उत्पादकता को बढ़ाना, युवाओं के लिए रोजगार के अधिकतम अवसर निर्मित करना एवं उनके कौशल को विकसित करना, गरीब नागरिकों को भी विकास में हिस्सेदारी देना एवं उन्हें सामाजिक न्याय देना, विनिर्माण इकाईयों को बढ़ावा देना, शहरी क्षेत्रों को विकसित करना, ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करना, आधारभूत ढांचा विकसित करना, नवाचार, शोध एवं विकास करना तथा नई पीढ़ी के सुधार कार्यक्रमों को लागू करना।   केंद्र सरकार एवं कुछ राज्य सरकारों द्वारा पूंजीगत खर्चों में लगातार की जा रही वृद्धि के चलते भारत की आर्थिक विकास दर को पंख लगते दिखाई दे रहे हैं। वर्ष 2022-23 के बजट में केंद्र सरकार द्वारा 7.5 लाख करोड़ रुपए के पूंजीगत खर्चों का प्रावधान किया गया था, वित्तीय वर्ष 2023-24 में इसमें 33 प्रतिशत की भारी भरकम वृद्धि करते हुए इसे बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपए का कर दिया गया था। अब वित्तीय वर्ष 2024-45 के लिए इसे और आगे बढ़कर 11.11 लाख करोड़ रुपए का कर दिया गया है, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 3.4 प्रतिशत है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में न केवल स्थिरता दिखाई देने लगी है बल्कि यह लगातार तेज गति से आगे बढ़ रही है। आज पूरे विश्व में केवल भारतीय अर्थव्यवस्था ही एक चमकते सितारे के रूप में दिखाई दे रही है। बजट का गहराई से अध्ययन करने पर ध्यान में आता है कि केंद्र सरकार ने अब भारत में रोजगार के अधिकतम अवसर निर्मित करने की ठान ली है। भारत के युवाओं एवं महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने एवं कौशल विकसित करने की दृष्टि से 2 लाख करोड़ रुपए की 5 योजनाओं के एक पैकेज की घोषणा की है। शिक्षा, रोजगार एवं कौशल विकास के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपए की राशि इस बजट में आबंटित भी कर दी गई है। प्रधानमंत्री पैकेज के अंतर्गत EPFO के प्रथम बार सदस्य बनने पर औपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों के EPFO खातों में एक माह का वेतन जमा किया जाएगा। इन कर्मचारियों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना के अंतर्गत एक माह का वेतन (15000 रुपए की अधिकतम राशि तक) तीन किश्तों में उनके खातों में जमा किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत एक माह में एक लाख रुपए तक का वेतन पाने वाली कर्मचारी ही पात्र होंगे। इससे 2.1 करोड़ युवाओं को लाभ होने की सम्भावना बजट में व्यक्त की गई है।  ऐसे भी कई निर्णय लिए जा रहे हैं जिनसे आने वाले समय में धरातल पर युवाओं को लाभ होता दिखाई देगा। एक करोड़ युवाओं को आगामी 5 वर्षों के दौरान इंटर्नशिप योजना के अंतर्गत काम दिया जाएगा। ताकि ये युवा वर्ग के नागरिक रोजगार प्राप्त करने हेतु सक्षम हो सकें। इन युवाओं को प्रति माह 6,000 रुपए तक का वाजीफा सम्बंधित कम्पनियों द्वारा अदा किया जाएगा। वजीफे की इस राशि को कम्पनियों के लिए लागू निगमित सामाजिक दायित्व योजना के अंतर्गत किया गया खर्च माना जाएगा। भारत की सबसे बड़ी 500 कम्पनियों को इस योजना के अंतर्गत युवाओं को इंटर्नशिप की सुविधा देनी होगी। साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा भी इन युवाओं को प्रतिमाह 5000 रुपए अदा किए जाएंगे। यह केंद्र सरकार का एक सूझबूझ भरा निर्णय कहा जा सकता हैं। साथ ही, विनिर्माण के क्षेत्र के रोजगार के नए अवसर निर्मित करने की पहल भी की जा रही है। नए कर्मचारियों के EPFO खाते में जमा होने वाली राशि को आगामी 4 वर्षों तक केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, इससे कर्मचारी एवं नियोक्ता दोनों को ही लाभ होगा। इस योजना का लाभ 30 लाख युवाओं को होने जा रहा है। एक अन्य योजना के अंतर्गत नियोक्ता को अपने नए कर्मचारियों के EPFO खातों में जमा की जाने वाली राशि की प्रतिपूर्ति आगामी 2 वर्षों तक केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी। इससे रोजगार के 50 लाख नए अवसर निर्मित होने की सम्भावना है।  केंद्र सरकार द्वारा हाल ही के समय में भारतीय सनातन संस्कृति के संस्कारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से धार्मिक पर्यटन को देश में बढ़ावा दिया जा रहा है। धार्मिक पर्यटन से देश में रोजगार के लाखों अवसर निर्मित हो रहे हैं एवं गरीब वर्ग की आय में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। श्री विष्णुपाद मंदिर कोरिडोर, गया, बिहार एवं श्री महाबोधि मंदिर कोरिडोर बोधगया, बिहार को विकसित किए जाने की घोषणा की गई है। इसे काशी विश्वनाथ मंदिर कोरिडोर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसी प्रकार देश में अन्य मंदिरों को भी विकसित किया जा रहा है ताकि देश में इन मंदिरों में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो तथा भारत को वैश्विक पटल पर एक बहुत बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में दिखाया जा सके।   भारत के ग्रामों में निवास कर रहे नागरिक रोजगार प्राप्त करने के उद्देश्य से शहरों की ओर पलायन करते हैं। अतः ग्रामों में ही रोजगार के अधिकतम अवसर निर्मित करने के उद्देश्य से ग्रामीण विकास की मद पर 2.66 लाख करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान इस बजट में किया गया है। साथ ही, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुद्रा लोन योजना के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली ऋण राशि की सीमा को 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दिया गया है। यह सुविधा तरुण श्रेणी के अंतर्गत प्राप्त ऋण के व्यवसाईयों को प्राप्त होगी एवं जिन्होंने पूर्व में लिए गए 10 लाख रुपए के ऋण की राशि को समय पर अदा कर दिया है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए भी ऋण की सीमा को बढ़ाकर 100 करोड़ रुपए तक कर दिया गया है।  प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत एक करोड़ आवासों का निर्माण किया जाएगा। इन एक करोड़ आवासों पर 10 लाख करोड़ रुपए की राशि का निवेश होगा, इसमें केंद्र सरकार की भागीदारी 2.2 लाख करोड़ रुपए की रहेगी। साथ ही, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत 3 करोड़ आवासों का निर्माण करने की घोषणा पूर्व में ही की जा चुकी है। देश के आर्थिक चक्र को गति देने के उद्देश्य से नई कर प्रणाली के अंतर्गत वेतनभोगी/पेंशनधारी कर्मचारियों के लिए सामान्य छूट की सीमा को 50,000 रुपए से बढ़ाकर 75,000 रुपए कर दिया गया है। साथ ही, आय कर की दरों में कुछ इस प्रकार का संशोधन किया गया है कि 15 लाख रुपए तक की कर योग्य आय वाले कर्मचारियों को प्रतिवर्ष 17,500 रुपए का लाभ होगा। इस निर्णय से मध्यम वर्गीय नागरिकों के हाथों  में कुछ अधिक राशि बचेगी और इस राशि इस इनकी क्रय शक्ति बढ़ेगी ताकि देश की अर्थव्यवस्था के चक्र में मजबूती आएगी।     वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में कुल आय का अनुमान रुपए 31.07 लाख करोड़ रुपए का लगाया गया है, इसमें ऋण की राशि शामिल नहीं है परंतु, करों के मद से प्राप्त होने वाली 25.83 लाख करोड़ रुपए की राशि शामिल है। जबकि, कुल खर्च का अनुमान 48.21 लाख करोड़ रुपए का लगाया गया है। प्रहलाद सबनानी

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राजनीति

सरकार ने की सरकारी कर्मचारियों के मौलिक अधिकार की रक्षा

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न्यायालयों में पहले ही अपने घुटने छिलवा चुका था लोकतंत्र विरोधी प्रतिबंध – लोकेन्द्र सिंह आरएसएस संबंधी प्रतिबंध हटाने के संदर्भ में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में कर्मचारियों के शामिल होने पर लगे प्रतिबंध को हटाकर नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा की है। अब कर्मचारी संघ की गतिविधियों में सामान्य नागरिकों की भाँति […]

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आर्थिकी राजनीति

भारत में तेजी से हो रहा है वित्तीय समावेशन

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भारतीय रिजर्व बैंक ने बैकिंग, निवेश, बीमा, डाक एवं पेन्शन क्षेत्र के हितधारकों को शामिल करते हुए वित्तीय समावेशन सूचकांक विकसित किया है। दरअसल, भारत में विभिन्न क्षेत्रों में हो रही अतुलनीय प्रगति को दर्शाने के लिए अब अपने सूचकांक विकसित करने की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है क्योंकि वैश्विक स्तर पर वित्तीय एवं आर्थिक क्षेत्र में कार्यरत विदेशी संस्थानों द्वारा विकसित किए गए सूचकांकों के आधार पर किए जाने वाले सर्वे में तो विभिन्न क्षेत्रों में भारत की प्रभावशाली प्रगति की सही तस्वीर पेश नहीं की जा रही है। इन सूचकांकों के आधार पर किए गए कई सर्वे में तो आश्चर्यजनक परिणाम दिखाई देते हैं। जैसे, एक सर्वे में भुखमरी के क्षेत्र में भारत की स्थिति को अफ्रीकी देशों, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, बंगलादेश से भी बदतर बताया गया था।    भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विकसित किए गए वित्तीय समावेशन सूचकांक के आधार पर मार्च 2024 के परिणाम हाल ही में जारी किए गए हैं। इन परिणामों के अनुसार, भारत में वित्तीय समावेशन मार्च 2017 में 43.4, मार्च 2021 में 53.9 एवं मार्च 2023 में 60.1 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2024 में 64.2 प्रतिशत हो गया है। यह सूचकांक भारत में वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में हुई अतुलनीय एवं स्थिर प्रगति को दर्शाता है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विकसित किया गया यह सूचकांक वित्तीय समावेशन के विभिन्न आयामों (नागरिकों की वित्तीय संस्थानों पर बढ़ती पहुंच, वित्तीय उत्पादों का बढ़ता उपयोग एवं वित्तीय सेवाओं की गुणवत्ता) पर देश में वित्तीय समावेशन के संदर्भ में जानकारी को 0 से 100 तक के मान में बताता है। यदि मान कम है तो देश में वित्तीय समावेशन भी कम है और इसके विपरीत यदि मान अधिक है तो देश में वित्तीय समावेशन भी अधिक है। भारत में यह मान मार्च 2024 में बढ़कर 64.2 प्रतिशत हो गया है। उक्त वर्णित तीन आयामों में कई पैरामीटर शामिल हैं, इनका मूल्यांकन 97 संकेतकों के आधार पर किया जाता है। इस कार्यप्रणाली के कारण ही भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विकसित किया गया यह सूचकांक वित्तीय समावेशन का एक व्यापक संकेतक बन गया है। वित्तीय समावेशन सूचकांक प्रत्येक वर्ष के जुलाई माह में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किया जाता है।   किसी भी देश में वित्तीय समावेशन के बढ़ने का आश्य यह है कि उस देश के नागरिकों की उस देश के बैकिंग संस्थानों तक पहुंच बढ़ रही है और यह उस देश की अर्थव्यवस्था के औपचारीकरण में मुख्य भूमिका निभाता है। वर्ष 2014 में भारत में प्रधानमंत्री जनधन योजना को लागू किया गया था और इस योजना के अंतर्गत विभिन्न बैकों में गरीब वर्ग के जमा खाते खोलकर उन्हें वित्तीय समावेशन का हिस्सा बना लिया गया था। आज प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत लगभग 52 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं एवं इन जमा खातों में लगभग 2.35 लाख करोड़ रुपए की राशि जमा है। केंद्र एवं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा देश के गरीब वर्ग को दी जाने वाली सहायता/प्रोत्साहन राशि को भी इन खातों में आज सीधे ही जमा कर दिया जाता है, इसे प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना के रूप में भी जाना जाता है, जिससे इस क्षेत्र में भ्रष्टाचार लगभग समाप्त हो गया है क्योंकि इससे अंततः लीकेज कम हुए है और यह सुनिश्चित हुआ है कि योजनाओं का लाभ अंतिम लाभार्थी तक सीधे ही पहुंचे। प्रधानमंत्री जनधन योजना को लागू करने का मुख्य उद्देश्य भारत के दूर दराज के इलाकों में निवासरत नागरिकों को बैंकिंग, बचत और जमा खाते, राशि हस्तांतरण, ऋण, बीमा और पेंशन जैसी वित्तीय सेवाओं को उपलब्ध कराना था। इन उद्देश्यों को प्राप्त करने में प्रधानमंत्री जनधन योजना पूर्ण रूप से सफल रही है और भारत में वित्तीय समावेशन को अगले स्तर पर ले जाने में भी सहायक रही है। साथ ही, प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत खोले गए जमा खातों को भारत की विशिष्ट पहचान प्रणाली (आधार कार्ड) से जोड़कर, केंद्र सरकार ने देश में वित्तीय लेन देन प्रणाली को सुव्यवस्थित कर लिया है एवं बैकिंग व्यवहारों में धोखाधड़ी की सम्भावना को कम करने में भी सफलता अर्जित की है। आज भारत की प्रधानमंत्री जनधन योजना को पूरे विश्व में सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन योजना के रूप में पहिचान मिली है।  देश में प्रधानमंत्री जनधन योजना को आज भी वित्तीय समावेशन के मुख्य उपकरण के रूप में माना जा रहा है और इस योजना के अंतर्गत देश के नागरिकों के खाते विभिन्न बैंकों में उसी उत्साह से लगातार खोले जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में भी भारत के विभिन्न बैकों में प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत लगभग 3.3 करोड़ नए जमा खाते खोले गए हैं इससे इस योजना के अंतर्गत खोले गए कुल खातों की संख्या बढ़कर 51.95 करोड़ हो गई है एवं इन जमा खातों में 234,997 करोड़ रुपए की राशि जमा हो गई है। अब देश का एक गरीब नागरिक भी भारत की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान करता हुआ दिखाई दे रहा है। वित्तीय समावेशन के दायरे में लाए गए नागरिक वित्तीय क्षेत्र में साक्षर होने के पश्चात अब तो भारत के पूंजी बाजार (शेयर बाजार) में भी अपना निवेश करने लगे हैं एवं उनकी विभिन्न ऋण योजनाओं एवं बीमा उत्पादों तक पहुंच भी बढ़ गई है। वित्तीय सेवाओं तक इस पहुंच ने देश के नागरिकों को आर्थिक रूप से बहुत सशक्त बना दिया है, इससे अंततः यह नागरिक शिक्षा, स्वास्थ्य एवं छोटे व्यवसायों में निवेश करने में सक्षम हुए हैं और इस प्रकार इन नागरिकों के जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार हुआ है।  भारत में वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में हुई उक्त वर्णित अतुलनीय प्रगति की जानकारी हम आम नागरिकों को तभी मिल पा रही है जब भारतीय रिजर्व बैंक ने भारत में ही एक सूचकांक विकसित किया है। यदि वित्तीय समावेशन का सूचकांक किसी विदेशी संस्थान द्वारा तैयार किया जाता तो सम्भव है कि भारत की इस महान उपलब्धि को जानने से हम वंचित रह जाते। अब समय आ गया है कि इसी प्रकार के सूचकांक अन्य क्षेत्रों में भी भारतीय वित्तीय एवं आर्थिक संस्थानों द्वारा ही तैयार किए जाने चाहिए, ताकि हम आम नागरिकों को विभिन्न क्षेत्रों में भारत की अतुलनीय प्रगति की वास्तविक जानकारी प्राप्त हो सके।     

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