राजनीति भाजपा: वैचारिक विश्व में एक चमकता नक्षत्र April 7, 2024 / April 7, 2024 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment प्रवीण गुगनानी संदर्भ: 6 अप्रेल भाजपा स्थापना दिवस विमर्श या नैरेटिव के नाम पर भारत में एक अघोषित युद्द चला हुआ है। इन दिनों भारत में चल रहा यह विमर्श शुद्ध राजनैतिक है। राजनीति और कुछ नहीं समाज का एक संक्षिप्त प्रतिबिंब ही है। विमर्श में यह प्रतिबिंब विषय व समयानुसार कुछ छोटा या बड़ा […] Read more » 6 अप्रेल भाजपा स्थापना दिवस BJP: A shining star in the ideological world
राजनीति लोकतंत्र को कमजोर करती है अवसरवादी राजनीति April 5, 2024 / April 5, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- कांग्रेस में लगातार वफादार नेताओं का पलायन जारी है, नये नामों में कांग्रेस के प्रवक्ता गौरव वल्लभ, महाराष्ट्र के जिम्मेदार एवं पूर्व मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम, बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा, निशाना साधने वाले मुक्केबाज विजेंदर, आचार्य प्रमोद कृष्णम हैं, जिन्होंने कांग्रेस को बाय-बाय कर दी है। इन सभी ने […] Read more » अवसरवादी राजनीति लोकतंत्र को कमजोर करती है अवसरवादी राजनीति
राजनीति इंडिया की लोकतंत्र बचाओ महारैली के बेसूरे स्वर April 4, 2024 / April 4, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन इंडिया की लोकतंत्र बचाओं महारैली में जुटे 28 दलों के नेता आगामी लोकसभा चुनाव की दृष्टि से कोई प्रभावी संदेश देने में नाकाम रहे हैं। भले ही चुनाव के ठीक पहले विपक्षी दलों ने इसके जरिए अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने में कामयाबी हासिल की हो। लेकिन […] Read more » Silent voices of Save India's Democracy Maharally
राजनीति बिहार की राजनीति का ‘चिराग’ संभावना का वाहक April 4, 2024 / April 4, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- खुद को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हनुमान बताने वाले युवा नेता चिराग पासवान इन दिनों बिहार की राजनीति में लाइमलाइट में हैं। राजनीतिक कौशल एवं प्रभावी रणनीति के तहत तेजी से अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूती देते हुए बिहार की राजनीति का ‘चिराग’ संभावना का वाहक बन रहा है। चिराग पासवान सक्षम जनप्रतिनिधि […] Read more » Chirag Paswan चिराग पासवान
आर्थिकी राजनीति भारतीय अर्थव्यवस्था लम्बी छलांग लगाने को तैयार April 4, 2024 / April 4, 2024 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment वित्तीय वर्ष 2023-24 की तृतीय तिमाही (अक्टोबर-दिसम्बर 2023) में भारत में आर्थिक विकास की दर 8.4 प्रतिशत रही है। कुछ विदेशी अर्थशास्त्री भारत की आर्थिक विकास दर को कमतर आंकते हुए दिखाई दे रहे हैं जबकि यह लगातार तिमाही दर तिमाही आगे बढ़ती ही जा रही है। अब तो विश्व की कई आर्थिक एवं वित्तीय संस्थानों ने भी वर्ष 2024 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के सम्बंध में अपने अनुमानों को बेहतर किया है, परंतु अभी भी इन संस्थानों के यह अनुमान वास्तविक आर्थिक विकास दर की तुलना में बहुत कम हैं। दरअसल, विदेशी आर्थिक एवं वित्तीय संस्थानों द्वारा विशेष रूप से भारत की आर्थिक विकास दर को आंके जाने के सम्बंध में उपयोग किए जा रहे मॉडल अब बोथरे साबित हो रहे हैं। हाल ही के समय में भारत के नागरिकों में “स्व” का भाव विकसित होने के चलते देश में धार्मिक पर्यटन बहुत तेज गति से बढ़ा है। उदाहरण के लिए अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर में श्रीराम लला के विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात प्रत्येक दिन औसतन 2 लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। यह तो केवल अयोध्या की कहानी है इसके साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर, उज्जैन में महाकाल लोक, जम्मू स्थित वैष्णो देवी मंदिर, उत्तराखंड में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री एवं यमनोत्री जैसे कई मंदिरों में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ रही है। भारत में धार्मिक पर्यटन में आई जबरदस्त तेजी के बदौलत रोजगार के लाखों नए अवसर निर्मित हो रहे हैं, जो देश के आर्थिक विकास को गति देने में सहायक हो रहे हैं। परंतु, यह तथ्य विदेशी आर्थिक एवं वित्तीय संस्थानों को दिखाई नहीं दे रहा है, जो कि केवल भारत की ही विशेषता है। उक्त तथ्यों के अतिरिक्त अन्य कई कारक भी भारत की आर्थिक विकास दर को अब 9 से 10 प्रतिशत की सीमा में ले जाने को तैयार दिखाई दे रहे हैं। आज भारतीय अर्थव्यवस्था की तुलना में भारत से आगे चल रही विश्व के अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर में ठहराव आ गया है। जैसे अमेरिका एवं यूरोप की अर्थव्यवस्थाएं आगे आने वाले समय में प्रतिवर्ष केवल 2 अथवा 3 प्रतिशत की दर से ही आगे बढ़ पाएंगी। इसी प्रकार चीन की अर्थव्यवस्था भी अब ढलान पर दिखाई दे रही है। जापान एवं जर्मनी की अर्थव्यवस्थाओं में तो आर्थिक मंदी देखी जा रही है। इस प्रकार विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत के अमृत काल में केवल भारतीय अर्थव्यवस्था ही तेज गति आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। वैसे भी भारत में अमृत काल तो अभी शुरू ही हुआ है एवं यह अगले 23 वर्षों अर्थात वर्ष 2047 तक यह खंडकाल जारी रहेगा। कुछ अर्थशास्त्री तो भारत के अमृत काल के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था के इसी तरह तेज गति से आगे बढ़ते रहने की संभावनाएं व्यक्त कर रहे हैं क्योंकि भारत में वर्ष 1991-92 में प्रारम्भ किए आर्थिक एवं वित्तीय क्षेत्र के सुधार कार्यक्रम को अब 32 वर्ष पूर्ण हो गए हैं, हालांकि वर्ष 1991-92 के बाद भी भारत में आर्थिक एवं वित्तीय क्षेत्रों में सुधार कार्यक्रम लगातार जारी रहे हैं। अत: स्थिर हो चुके इन सुधार कार्यक्रमों के फल खाने का समय अब आ गया है। भारत द्वारा वर्ष 1947 में राजनैतिक स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात, पिछले 77 वर्षों के दौरान भारत में लोकतंत्र लगातार मजबूत हुआ है एवं आज पूरे विश्व में भारत इस दृष्टि से प्रथम पायदान पर खड़ा है। भारत में लोकतंत्र के लगातार मजबूत होते जाने से विदेशी निवेशकों का भारत में विश्वास बढ़ा है जिसके चलते भारत में उद्योग जगत को पूंजी की कमी नहीं के बराबर रही है। पर्याप्त पूंजी की उपलब्धता के चलते भारत में आर्थिक विकास को गति ही मिली है। भारत में लगातार तेज हो रही आर्थिक विकास की दर के कारण भारत में बिलिनियर (100 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की सम्पत्ति वाले नागरिक) की संख्या में सुधार हुआ है। पिछले वर्ष भारत में 94 नए बिलिनियर बने हैं। जबकि चीन में 115 बिलिनियर कम हुए हैं। विश्व में बिलिनियर की संख्या के मामले में भारत चीन एवं अमेरिका के बाद तीसरे स्थान पर आ गया है। भारत में आज 271 बिलिनियर हैं जबकि चीन में 814 एवं अमेरिका में 800 बिलिनियर हैं। मुंबई महानगर में तो अब 92 बिलिनियर निवास कर रहे हैं, जो चीन के बीजिंग महानगर के 91 बिलिनियर से अधिक है। इस प्रकार अब एशिया के किसी भी महानगर में सबसे अधिक बिलिनियर भारत के मुंबई महानगर में निवास कर रहे हैं। पूरे विश्व भारत के मुंबई महानगर से आगे अब केवल अमेरिका का न्यूयॉर्क महानगर (119 बिलिनियर) एवं ब्रिटेन का लंदन महानगर (97 बिलिनियर) ही है। वर्ष 2022-23 में चीन में बिलिनियर की संख्या घटी है। चीन में बिलिनियर की सम्पत्ति 15 प्रतिशत से कम हुई है। जबकि भारत में बिलिनियर की सम्पत्ति में वृद्धि दर्ज हुई है। यह भारत में तेज गति से हो रहे आर्थिक विकास दर के चलते सम्भव हो सका है। एक और कारक जो आगे आने वाले समय में भारत की आर्थिक विकास दर को लगातार उच्च स्तर पर बनाए रखने में सहायक हो सकता है वह है भारत में प्रति व्यक्ति वार्षिक औसत आय का लगभग 2500 अमेरिकी डॉलर का होना है जो चीन में 13,000 से 14,000 अमेरिकी डॉलर के एवं दक्षिणी कोरीया में 32,000 से 33,000 अमेरिकी डॉलर के बीच की तुलना में बहुत कम है। इस दृष्टि से भारत को अभी बहुत आगे तक जाना है और यह केवल आर्थिक विकास की औसत दर को 10 प्रतिशत प्रतिवर्ष के आसपास बनाए रखने से ही सम्भव होगा। इस प्रकार भारतीय नागरिकों में अपनी औसत आय को विकसित देशों की तुलना में बेहतर करने की अभी बहुत गुंजाईश है और यह भावना भारत की आर्थिक विकास दर को बढ़ाए रखने में सहायक होगी। दूसरे, भारत में तकनीकी क्षेत्र विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास की दर बहुत प्रभावकारी है, डिजिटल क्षेत्र में तो भारत आज पूरे विश्व को ही राह दिखाता नजर आ रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास के चलते भारत में विभिन्न क्षेत्रों में श्रमिकों, व्यवसाईयों, प्रबंधकों, कृषकों आदि की उत्पादकता में भी सुधार दृष्टिगोचर है जो निश्चित ही भारत में आर्थिक विकास की गति को तेज करने में सहायक होगा। आज अमेरिका एवं कनाडा में निवासरत एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्य कर रहे भारतीय मूल के नागरिक वापिस भारत आकर बसने के बारे में गम्भीरता से विचार कर रहे हैं क्योंकि अब अमेरिका एवं अन्य विकसित देशों की तुलना में भारत में लगातार तेज हो रही आर्थिक विकास की दर उन्हें आकर्षित कर रही है। उन्हें आज भारत में अधिक आय अर्जन के अतिरिक्त साधन उत्पन्न होते दिखाई दे रहे हैं। एक सर्वे के अनुसार, लगभग 38,000 भारतीय जो अमेरिका में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत हैं वे अब भारत वापिस आना चाहते हैं क्योंकि अमेरिका में कई कम्पनियां (गूगल, एमेजोन, माइक्रोसोफ्ट एवं मेटा सहित) अपने कर्मचारियों की छंटनी करती दिखाई दे रही हैं। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था तो स्पष्टत: आर्थिक मंदी की चपेट में आ चुकी है। जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था ने अक्टोबर-दिसम्बर 2023 की तिमाही में 8.4 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर हासिल की है। कई विदेशी वित्तीय संस्थानों ने वर्ष 2024 में भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान को आगे बढ़ा दिया है। अब तो भारत में, ग्रामीण इलाकों सहित, विभिन्न उत्पादों के खपत का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है। केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा विकास कार्यों के लिए अपने बजट में खर्च को लगातार बढ़ाया जा रहा है जिससे सामान्य नागरिकों के हाथों में अधिक पैसा पहुंच रहा है तथा इससे नागरिकों के बीच विभिन्न उत्पादों के खपत का स्तर बढ़ता दिखाई दे रहा है। शहरी उपभोक्ता तो रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं के साथ साथ चार पहिया वाहन एवं मकान आदि खरीदने पर भी भारी मात्रा में पैसा खर्च कर रहे हैं। घरेलू खपत में बढ़ौतरी के साथ ही भारत से निर्यात में भी तेजी देखी जा रही है। फरवरी 2024 माह में निर्यात का स्तर पिछले 11 माह में सबसे अधिक रहा है। केंद्र सरकार का अनुमान है कि भारत वित्तीय वर्ष 2023-24 में निर्यात के क्षेत्र में अपने पिछले सारे रिकार्ड तोड़ देगा। मोर्गन स्टैनली के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर यह है कि भारत में निवेश : सकल घरेलू उत्पाद अनुपात में एक बार फिर सुधार दिखाई दे रहा है। यह अनुपात आज 34 प्रतिशत तक पहुंच गया है और उम्मीद की जा रही है वित्तीय वर्ष 2027 तक यह बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। जिससे भारत की आर्थिक विकास दर को और अधिक बल मिलेगा। हां, भारत में एक क्षेत्र अभी भी ऐसा है जिसके लिए चिंता होना स्वाभाविक है। वह क्षेत्र है आय की असमानता का। भारत की 10 प्रतिशत आबादी के पास देश की 77 प्रतिशत सम्पत्ति जमा हो गई है। एक रिसर्च पेपर में यह बताया गया है कि भारत में आर्थिक विकास के साथ साथ आर्थिक असमानता भी बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2022-23 के अंत तक भारत की एक प्रतिशत आबादी की देश की कुल आय एवं सम्पत्ति में 22.6 प्रतिशत एवं 40.1 प्रतिशत की भागीदारी रही है। आय की असमानता को देश में आर्थिक विकास को गति देकर ही दूर किया जा सकता है, जिसके लिए केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। प्रहलाद सबनानी Read more » भारतीय अर्थव्यवस्था लम्बी छलांग लगाने को तैयार
राजनीति अंसारी की मौत पर बेवजह प्रलाप क्यों? April 4, 2024 / April 4, 2024 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment सुरेश हिंदुस्तानी भारत के कुख्यात अपराधी मुख़्तार अंसारी की मौत के मामले को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रकार मौत के बहाने एक बार फिर से तुष्टिकरण की राजनीति की जा रही है। आतंकियों और अपराधियों को संप्रदाय से अलग देखने की क़वायद करने वाले कुछ राजनीतिक दल इस मौत […] Read more » Why the unnecessary uproar over Ansari's death? अंसारी की मौत
राजनीति महिला मतदाता निर्णायक भूमिका : मोदी और महिला सशक्तिकरण April 4, 2024 / April 4, 2024 by डॉ. सौरभ मालवीय | Leave a Comment -डॉ. सौरभ मालवीय 2024 लोकसभा चुनाव सिर पर है। इस बार भी चुनाव में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका में रहेंगी। इसलिए भारतीय जनता पार्टी विकास के मुद्दे के साथ- साथ महिला सशक्तिकरण को लेकर चुनाव प्रचार कर रही है। भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण आशा है कि उसे महिलाओं का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा। इसके […] Read more » : Modi and women empowerment Decisive role of women voters
राजनीति कांग्रेस में मची भगदड़ के बाद भी आखिर क्या कह रहा है मल्लिकार्जुन खड़गे का मौन! April 4, 2024 / April 4, 2024 by लिमटी खरे | Leave a Comment (लिमटी खरे) सर्दी, गर्मी, बरसात के अलावा एक मौसम और आता है साल में, वह है पतझड़ का। बसंत ऋतु के आगमन के कुछ दिनों बाद से ही पतझड़ का मौसम आरंभ होने लगता है। पतझड़ में हरे भरे वृक्षों से पत्ते झड़ते जाते हैं और कुछ दिनों तक हरा भरा पेड़ इस तरह प्रतीत होता है मानो […] Read more » कांग्रेस में मची भगदड़ मल्लिकार्जुन खड़गे का मौन
राजनीति भारत को पुनः विश्वगुरु बनाना ही संघ का मुख्य लक्ष्य April 4, 2024 / April 4, 2024 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक नागपुर में दिनांक 15 से 17 मार्च 2024 को सम्पन्न हुई है। इस बैठक में पूरे देश से 1500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया और “श्रीराम मंदिर से राष्ट्रीय पुनरुत्थान की ओर” विषय पर एक प्रस्ताव भी पास किया गया। जैसा कि सर्वविदित ही है कि गौरवशाली हिन्दू सनातन संस्कृति विश्व में सबसे पुरानी संस्कृति मानी जाती है और इसी हिंदू सनातन संस्कृति का अनुपालन करते हुए भारत का इतिहास वैभवशाली रह पाया है तथा हिंदू सनातन संस्कृति का विस्तार इंडोनेशिया तक एवं सुदूर अमेरिका तक रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि संघ एवं इसके स्वयंसेवक करते क्या हैं? इसके उत्तर में अक्सर यह जवाब दिया जाता है कि संघ को यदि समझना है तो आपको संघ की शाखा में आना होगा। संघ, मां भारती को एक बार पुनः विश्व में गौरवशाली स्थान दिलाने के पवित्र लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गम्भीर प्रयास कर रहा है। इस पवित्र लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लाखों की संख्या में स्वयंसेवक आज संघ के साथ जुड़ चुके हैं। आज भारत के 45,600 स्थानों पर संघ की 73,117 शाखाएं, 27,717 साप्ताहिक मिलन एवं 10,567 संघ मंडली लगाई जा रही हैं। इन शाखाओं, साप्ताहिक मिलनों एवं संघ मंडलियों में स्वयंसेवकों में राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव (राष्ट्र प्रथम) जागृत किया जाता है ताकि वे समाज में जाकर समाज की सज्जन शक्ति को साथ लेकर भारत में समाज परिवर्तन का कार्य दक्षतापूर्वक कर सकें। संघ की शाखा सामान्यतः 60 मिनट की लगती है एवं इसमें शारीरिक व्यायाम, योग, प्राणायाम, खेल, बौद्धिक एवं प्रार्थना शामिल रहती है। बौद्धिक में सनातन संस्कृति एवं भारत के गौरवशाली इतिहास की जानकारी के साथ साथ भारतीय संतो, महात्माओं एवं महापुरुषों की जानकारी प्रदान की जाती है। समय के साथ साथ संघ ने अपनी कार्यप्रणाली में परिवर्तन भी किया है एवं कई नए आयाम एवं कार्य अपने साथ जोड़े हैं। जैसे समाज के किन किन क्षेत्रों में क्या क्या काम करना है यह संघ के स्वयंसेवकों को बहुत स्पष्ट रूप से सिखाया जाता है। संगठन श्रेणी के साथ ही संघ में जागरण श्रेणी भी कार्यरत है। संगठन श्रेणी में शाखाओं के विस्तार, इसे सुचारू रूप से चलाने सम्बंधी कार्य, स्वयसेवकों का प्रशिक्षण एवं गुणवत्ता विकास आदि कार्य शामिल रहते हैं जबकि जागरण श्रेणी में समाज में जाकर किन क्षेत्रों में जागरण करना है, का निर्धारण किया जाकर इस क्षेत्र में स्वयसेवकों द्वारा कार्य किया जाता है। जैसे वर्तमान में जागरण श्रेणी में शामिल कार्य हैं – सेवा, सम्पर्क एवं प्रचार सम्बंधी कार्य। इसके अलावा 6 गतिविधियां भी हैं जो स्वयसेवकों द्वारा समाज के सहयोग से चलाई जाती हैं। इनमे शामिल हैं – धर्म जागरण समन्वय, गौ सेवा, ग्राम विकास, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता एवं पर्यावरण संरक्षण। 22 जनवरी 2024 को अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर में श्रीराम लला के श्रीविग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व दिनांक 1 से 15 जनवरी 2024 तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के आह्वान पर संघ के स्वयंसेवकों एवं समाज के विविध संस्थानों तथा संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा चलाया गया गृह सम्पर्क अभियान अभूतपूर्व सफल रहा था। देश के समस्त प्रांतों के 578,778 गांवों एवं 4727 नगरों के कुल 19.38 करोड़ से अधिक परिवारों से स्वयंसेवकों सहित 44.98 लाख से अधिक व्यक्तियों ने सम्पर्क किया था। यह भारतीय समाज में संघ की गहरी पहुंच और समाज में उसकी स्वीकार्यता को दर्शाता है। संघ के 40 से अधिक अनुशांगिक संगठन भी भारत में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं, जो हिंदू सनातन संस्कृति एवं भारतीय परम्पराओं के आधार पर समाज में अपने कार्य को आगे बढ़ाते हैं। विश्व में वामपंथी विचारधारा के आधार पर चल रहे विभिन्न मजदूर संगठन अपने श्रमिक सदस्यों को संस्थान के केवल लाभ में हिस्सा लेने की प्रेरणा देते हैं और अपनी मजदूरी में वृद्धि के लिए अक्सर हड़ताल आदि का सहारा लेते हैं। उद्योग संस्थान में हड़ताल होने से न केवल उस विशेष उद्योग संस्थान का बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का भी नुक्सान होता है।जबकि, भारतीय मजदूर संघ, जो कि संघ का ही एक अनुशांगिक संगठन है, अपने श्रमिक सदस्यों को हड़ताल करने के लिए निरुत्साहित करता है और उसका नारा है कि ‘संस्थान के लिए करेंगे पूरा काम और काम के लेंगे पूरे दाम’। यह अंतर है वामपंथी विचारधारा और राष्ट्रीय विचारधारा के संगठनों में। इसी प्रकार संघ के अन्य अनुशांगिक संगठनों में शामिल हैं – (1) सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले संगठन – आरोग्य भारती, राष्ट्रीय सेवा भारती, भारत विकास परिषद, राष्ट्रीय चिकित्सा संस्थान, आरोग्य भारती, सक्षम (दिव्यांग नागरिकों के लिए), दीन दयाल शोध संस्थान। (2) सामाजिक संगठन – विश्व हिंदू परिषद, वनवासी कल्याण आश्रम, जनजाति सुरक्षा मंच, क्रीड़ा भारती, राष्ट्रीय सेविका समिति। (3) शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाले संगठन – विद्या भारती, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय शिक्षण मंडल, अखिल भारतीय शेक्षिक महासंघ, संस्कृत भारती, शिक्षा संस्कृत उत्थान न्यास। (4) आर्थिक क्षेत्र में कार्य करने वाले संगठन – भारतीय किसान संघ, लघु उद्योग भारती, भारतीय मजदूर संघ, स्वदेशी जागरण मंच, सहकार भारती, ग्राहक पंचायत। (5) वैचारिक समूह में कार्य करने वाले संगठन – प्रज्ञा प्रवाह, विज्ञान भारती, संस्कार भारती, इतिहास संकलन, साहित्य परिषद, अधिवक्ता परिषद। (6) सुरक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाले संगठन – सीमा जागरण मंच, हिंदू जागरण मंच, अखिल भारतीय रक्षा परिषद। उक्त समस्त संगठनों को पूर्ण स्वायत्तता प्रदत्त है एवं संघ की ओर से किसी भी प्रकार का बंधन इन संगठनों पर नहीं रहता है। हां, इन संगठनों की कार्य प्रणाली को भारतीय संस्कारों के अनुरूप ढालना आवश्यक रहता है। अपने आचरण, आचार विचार एवं कार्य पद्धति के आधार पर भारतीय मूल के नागरिक हिंदू सनातन संस्कृति के संवाहक के रूप में अन्य कई देशों में कार्यरत हैं एवं वहां निवास कर रहे हैं और इन देशों की अर्थव्यवस्था में अपने योगदान को दिनोदिन मजबूती प्रदान कर रहे हैं। इन देशों के विभिन्न क्षेत्रों यथा सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक आदि में भारतवंशियों के योगदान को इन देशों मूल नागरिकों ने पहचाना एवं स्वीकारा है। इसके चलते लाखों की संख्या में विदेशी मूल के नागरिक हिंदू सनातन संस्कृति की ओर आकर्षित हुए हैं एवं अब ऐसा माना जाने लगा है कि हिंदू सनातन संस्कृति पूरे विश्व में भविष्य का विश्व धर्म होने जा रही है। अतः आज विश्व के 53 देशों में “हिंदू स्वयंसेवक संघ” की स्थापना की जा चुकी है एवं इन देशों में 1480 शाखाएं एवं 112 मिलन चलाए जा रहे हैं। हाल ही में आस्ट्रेलिया एवं अमेरिका के कई नगरों में संघ शिक्षा वर्ग आयोजित किए गए थे तथा इसी प्रकार विश्व के अन्य देशों को मिलाकर कुल 17 हिंदू हेरिटेज कैम्प भी आयोजित किए गए थे। अमेरिका में सेवा दीवाली बहुत धूमधाम से मनाई जाती है, इस शुभ मौके पर स्थानीय गरीब वर्ग को उपहार प्रदान किए जाते हैं। पूरे विश्व में आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को विश्व का सबसे बड़ा संगठन माना जाता है जो पिछले 99 वर्षों से सतत रूप से हिंदू सनातन संस्कृति एवं भारतीय परम्पराओं तथा संस्कारों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए मां भारती की सेवा में अपने आप को समर्पित किए हुए है। आज समाज की सज्जन शक्ति संघ की विचारधारा के अनुरूप सोचने लगी है अतः विभिन्न श्रेणी विशेष के नागरिक यथा चिकित्सक, शिक्षक, प्रोफेसर, अभिभाषक, श्रमिक, सेवा निवृत्त अधिकारी एवं कर्मचारी, युवा उद्यमी आदि बड़ी संख्या में संघ के साथ जुड़ रहे हैं एवं समाज परिवर्तन में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। आज भारत में विभिन्न मत पंथ को मानने वाले नागरिकों के बीच यदि आपस में भाईचारा स्थापित होता है तो निश्चित ही मां भारती को उसके पुराने वैभव को प्राप्त करने से कोई रोक नहीं सकता है। यही संघ का मुख्य लक्ष्य भी है। Read more » श्रीराम मंदिर से राष्ट्रीय पुनरुत्थान की ओर
राजनीति ग़ाज़ा पट्टी में युद्ध विराम की जरूरत March 28, 2024 / March 28, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग-संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सोमवार को, ग़ाज़ा पट्टी में युद्ध और मानवीय पीड़ा पर विराम लगाने के लिए, तत्काल युद्धविराम लागू किए जाने और तमाम बन्धकों की तत्काल व बिना शर्त रिहाई की मांग करने वाला एक नया प्रस्ताव पारित कर दिया है। यह प्रस्ताव, 11 मार्च को शुरू हुए रमजान के महीने […] Read more » There is a need for a ceasefire in the Gaza Strip.
राजनीति क्या कारण है कांग्रेस की मंद होती रोशनी के March 28, 2024 / March 28, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- देश की सबसे पुरानी एवं मजबूत कांग्रेस पार्टी बिखर चुकी है, पार्टी के कद्दावर, निष्ठाशील एवं मजबूत जमीनी नेता पार्टी छोड़कर अपनी सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी पार्टी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो रहे हैं, वह भी तब जब लोकसभा चुनाव सन्निकट है। कांग्रेस नेताओं का यह दलबदल आश्चर्य की बात हैं, पार्टी छोड़ने […] Read more » What is the reason for the dim light of Congress?
राजनीति नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर राजनैतिक हंगामा March 27, 2024 / March 27, 2024 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | Leave a Comment – डा॰ कुलदीप चन्द अग्निहोत्री भारत की संसद ने 1947 में हुए भारत विभाजन के कष्टकारी नतीजों को ध्यान में रखते हुए 2019 में अपने नागरिकता अधिनियम को संशोधित करते हुए उसमें प्रावधान किया था कि भारत के उस हिस्से से जिसे । इंग्लैंड ने 1947 में अपनी संसद में एक अधिनियम पारित करके मजहब […] Read more » CAA Political uproar regarding Citizenship Amendment Act नागरिकता संशोधन अधिनियम