राजनीति जनजातीय बंधुओं को हिंदू से काटने की कांग्रेसी छटपटाहट September 10, 2025 / September 10, 2025 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या यही है! कांग्रेस पर सदैव ही कोई न कोई वेताल सवार रहता है!! कभी कम्युनिस्ट, कभी टेररिस्ट, कभी नक्सलाइट, कभी अर्बन नक्सलाइट !!! कांग्रेस पर सवार ये वेताल कभी-कभी दिखते भी हैं किंतु अधिकांशतः ये अदृश्य ही रहते हैं। ये वेताल बहुधा ही कांग्रेस के प्रवक्ताओं की भाषा में झलकते […] Read more » कांग्रेसी छटपटाहट
राजनीति शख्सियत संकर्षण ठाकुर की पत्रकारिता महज़ पेशा नहीं बल्कि लोकतंत्र की आत्मा September 10, 2025 / September 10, 2025 by कुमार कृष्णन | Leave a Comment कुमार कृष्णन सुप्रसिद्ध पत्रकार संकर्षण ठाकुर से मेरी पहली मुलाकात 1989 में भागलपुर दंगे के दौरान हुई,जब वे द टेलीग्राफ की ओर से रिपोर्टिग भागलपुर आए थे। उन दिनों चार पांच दिन भागलपुर में थे। उनकी रिर्पोटिंग काफी असरदार थी. रिपोर्टिग का नतीजा था कि राज्य सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए उस समय […] Read more » संकर्षण ठाकुर
राजनीति विश्ववार्ता आखिरकार जाना पड़ा भ्रष्ट एवं काहिल सरकार को September 10, 2025 / September 10, 2025 by डॉ घनश्याम बादल | Leave a Comment नेपाल: एक बार फिर लोक की सर्वोच्चता सिद्ध डॉ घनश्याम बादल आखिरकार वही हुआ जिसकी आशंका थी। जेन जी के कार्यकर्ताओं के आगे लाठी, गोली,प्रतिबंध और सरकार की ताकत सब ध्वस्त हो गई और अंतत सरकार को जाना पड़ा । नेपाल सरकार का पतन तो तब ही शुरू हो गया था जब तीन मंत्रियों ने […] Read more » unrest in nepal नेपाल सरकार का पतन
राजनीति धार्मिक ‘कट्टरता’ के नाम पर राष्ट्रीय चिन्ह का ‘अपमान’ चिंताजनक September 10, 2025 / September 10, 2025 by संतोष कुमार तिवारी | Leave a Comment संतोष कुमार तिवारी देश में जिस तरह आज धर्म और जाति को लेकर लोगों में कट्टर बनने का प्रचलन बढ़ता जा रहा हैं, यह बेशक़ देश और आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत ही चिंताजनक हैं, क्योंकि इस तरह के लोगों को न देश से कुछ लेना हैं और न परिवार से. उनको केवल अपनी […] Read more » धार्मिक 'कट्टरता' राष्ट्रीय चिन्ह का अपमान
राजनीति श्रीलंका से नेपाल: पड़ोसी संकट और भारत के लिए सबक September 10, 2025 / September 10, 2025 by जयसिंह रावत | Leave a Comment जयसिंह रावत हाल के वर्षों में, हमारे पड़ोस में कई देशों ने राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता का सामना किया है। श्रीलंका में आर्थिक संकट के कारण अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन हुए, जिसने सरकार को उखाड़ फेंका। इसी तरह, बांग्लादेश और नेपाल में भी जनता का असंतोष कई बार सड़कों पर दिखा। ये सभी घटनाएं, भले ही […] Read more » From Sri Lanka to Nepal: Neighbourhood crises and lessons for India श्रीलंका से नेपाल
राजनीति मोदी का ‘अर्थपूर्ण’ राजनैतिक बम September 9, 2025 / September 9, 2025 by डॉ घनश्याम बादल | Leave a Comment क्या हैं जीएसटी दरों में कमी के असली निहितार्थ । खास समय पर चलाया गया बहुमारक ब्रह्मास्त्र है जीएसटी की दरों में कमी का कदम। डॉ घनश्याम बादल ‘मोदी है तो मुमकिन है’ का नारा सत्तारूढ़ दल ऐसे ही नहीं देता बल्कि उसके पीछे मोदी के प्रभामंडल को रेखांकित करना तो होता ही है, साथ ही साथ इस बात का भी इशारा होता है कि उनके पास एक ऐसा नेता है जिसके लिए कुछ भी करना असंभव नहीं है । दूसरे […] Read more » जीएसटी दरों में कमी
राजनीति निवेश का नया दौर : भारत और चीन के बीच संभावनाओं की दिशा September 9, 2025 / September 9, 2025 by शम्भू शरण सत्यार्थी | Leave a Comment शम्भू शरण सत्यार्थी आज की दुनिया उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ कोई भी देश अपने दम पर लंबे समय तक आर्थिक विकास नहीं कर सकता। संसाधन कहीं और हैं, तकनीक कहीं और है और बाजार कहीं और। इस आपसी निर्भरता ने वैश्विक निवेश और साझेदारी को मजबूरी ही नहीं बल्कि आवश्यकता भी बना दिया […] Read more » A new era of investment: The direction of possibilities between India and China भारत और चीन के बीच संभावनाओं की दिशा
राजनीति अंतिम पंक्ति में मोदी, क्या इसे माना जाए कार्यकर्ता केंद्रित सियासत का नया सौपान! September 9, 2025 / September 9, 2025 by लिमटी खरे | Leave a Comment पीएम ने लास्ट लाईन में बैठकर संदेश दिया कि कार्यकर्ता ही पार्टी के लिए होता है नींव का पत्थर . . .(लिमटी खरे)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सांसदों की कार्यशाला में सबसे पीछे की पंक्ति में एक सामान्य कार्यकर्ता की तरह बैठना, महज एक तस्वीर नहीं, बल्कि एक गहरा राजनीतिक संदेश है। यह दृश्य इस बात […] Read more » अंतिम पंक्ति में मोदी क्या इसे माना जाए कार्यकर्ता केंद्रित सियासत का नया सौपान
आर्थिकी राजनीति नेक्स्टजेन जीएसटी सुधार केवल कर सुधार नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण को तेज रफ्तार देने का परिचायक September 9, 2025 / September 9, 2025 by कमलेश पांडेय | Leave a Comment कमलेश पांडेय मौजूदा नेक्स्टजेन जीएसटी सुधार केवल कर सुधार नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण को तेज रफ्तार देने का परिचायक है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थ भारत के सपनों को पंख लगाने वाला वह निर्णायक उपाय है जिसका सकारात्मक असर बहुत जल्द ही देश-दुनिया पर दिखाई पड़ेगा। बता दें कि 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक, जो […] Read more » NextGen GST reform
राजनीति निराशा से आशा की ओरः आत्महत्या के खिलाफ जंग September 9, 2025 / September 9, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस – 10 सितम्बर, 2025 – ललित गर्ग – दुनिया में आत्महत्या आज एक गहरी एवं विडम्बनापूर्ण वैश्विक चुनौती बन चुकी है। हर साल लाखों लोग अपनी ही जिंदगी से हार मान लेते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल लगभग 7.2 लाख लोग आत्महत्या करते हैं। यह सिर्फ व्यक्तिगत त्रासदी […] Read more » आत्महत्या के खिलाफ जंग विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस - 10 सितम्बर
राजनीति राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान धर्म और राजनीति से ऊपर होना चाहिए September 9, 2025 / September 9, 2025 by सुरेश गोयल धूप वाला | Leave a Comment अशोक चक्र और तिरंगा हमारी आत्मा के प्रतीक हैं, इन्हें राजनीति का मोहरा न बनाया जाए भारत की पहचान उसकी सांस्कृतिक विविधता, सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकता से होती है। हमारे राष्ट्रीय प्रतीक, जैसे अशोक चक्र, केवल किसी धर्म, पंथ या वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि पूरे राष्ट्र की साझा अस्मिता और गणतंत्र की गरिमा […] Read more »
आर्थिकी राजनीति जीएसटी 2.0 : आत्मनिर्भर भारत की तरफ एक और कदम September 8, 2025 / September 8, 2025 by प्रो. महेश चंद गुप्ता | Leave a Comment प्रो. महेश चंद गुप्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर किए वादे को पूरा करते हुए दिवाली से पहले सरकार ने जनता को जीएसटी सुधार के रूप में ऐसा तोहफा दिया है, जो न सिर्फ आम जन के जीवन को सरल बनाएगा बल्कि 2047 तक विकसित भारत के सपने को और मजबूती से धरातल पर उतारेगा। जीएसटी 2.0 केवल टैक्स सुधार नहीं बल्कि भारत की अगली आर्थिक यात्रा का मानचित्र है। जहां देशवासी खुश हैं, वहीं इस सुधार में गहरा अंतरराष्ट्रीय संदेश भी निहित है। यह सुधार अमेरिका द्वारा लगाए 50 प्रतिशत टैरिफ का उत्तर भारत ने अपनी आर्थिक मजबूती और आत्म निर्भरता के रूप में दिया है। जीएसटी सुधार से किसान, महिला, युवा, मिडिल क्लास, छोटे व्यापारी और उपभोक्ता सभी लाभान्वित होंगे। यह कदम केवल टैक्स प्रणाली को सरल बनाने का प्रयास मात्र नहीं है बल्कि भारत को एक तेज, सशक्त और आत्म निर्भर अर्थव्यवस्था में बदलने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ है। यह सुधार जितना घरेलू स्तर पर आम लोगों को राहत देगा, उतना ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सशक्त छवि को भी मजबूत करेगा। बदलावों की जरूरत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रेखांकित किया है। मोदी ने कहा है कि अगर भारत को वैश्विक परिदृश्य में उचित स्थान दिलाना है तो समय-समय पर बदलाव बेहद जरूरी हैं। यह सुधार देश को सपोर्ट और ग्रोथ की डबल डोज देंगे। गरीब, मध्यम वर्ग, महिलाओं, छात्रों, किसानों और नौजवानों को इसका सीधा फायदा होगा। प्रधानमंत्री ने यह भी दोहराया है कि यह सुधार सिर्फ टैक्स में बदलाव नहीं है, बल्कि आत्म निर्भर भारत के लिए अगली पीढ़ी का सुधार है। सरकार ने आनन-फानन में यह फैसला नहीं किया है बल्कि उसने इस सुधार में सामाजिक संतुलन का विशेष ध्यान रखा है। तम्बाकू उत्पादों, सिगरेट, शराब, महंगी कारों, विमान आदि पर 40 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है पर इसका सीधा असर अमीर वर्ग पर पड़ेगा जबकि गरीब और मध्यम वर्ग को सस्ती आवश्यक वस्तुएं मिलेंगी। जीएसटी 2.0 का सबसे बड़ा असर यह होगा कि उपभोक्ताओं को सस्ता सामान मिलेगा और घरेलू खपत में इजाफा होगा। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब खपत बढ़ेगी तो उत्पादन और व्यापार का दायरा भी बढ़ेगा। कंपनियां अधिक कर्मचारियों को नियुक्त करने की स्थिति में होंगी जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इस प्रकार जीएसटी सुधार और प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना मिलकर अर्थव्यवस्था को गति देंगे। उपभोक्ता को सस्ता सामान मिलेगा और युवा पीढ़ी को रोजगार के अवसर मिलेंगे। यह संतुलन अल्पकालिक राहत और दीर्घकालिक विकास दोनों को साथ लेकर चलेगा। ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) स्वतंत्रता के बाद सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर सुधार था। इसने 17 केंद्रीय और राज्य करों को हटा कर ‘एक राष्ट्र एक कर’ लागू कर देश में सामान्य राष्ट्रीय बाजार का निर्माण किया। आठ वर्षों में जीएसटी लगातार विकसित हुआ है और अब डिजिटलीकरण तथा दर युक्तिकरण के जरिये यह भारतीय कर व्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। अर्थव्यवस्था के तेजी से बदलते स्वरूप को देखते हुए टैक्स प्रणाली को सरल और व्यवहारिक बनाना आवश्यक हो गया था। सरकार ने इसी जरूरत को समझते हुए जीएसटी 2.0 के रूप में एक ऐसा सुधार सामने रखा है जो व्यापक दृष्टिकोण से सोचा-समझा और जन हितैषी है। जीएसटी 2.0 में सबसे बड़ा परिवर्तन टैक्स स्लैब की संख्या घटाना है। पहले चार प्रमुख दरें थीं यानी 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत। अब इन्हें घटाकर सिर्फ दो कर दिया गया है। जरूरी सामानों पर 5 प्रतिशत और सामान्य वस्तुओं पर 18 प्रतिशत टैक्स लगेगा। इससे उपभोक्ताओं को सीधी राहत मिलेगी। किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विशेष ध्यान में रखते हुए ट्रैक्टर, खेती के औजार, हस्तशिल्प और मार्बल पर टैक्स 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इसका असर दूरगामी होगा क्योंकि कृषि की लागत कम होगी जिससे ग्रामीण बाजारों में रौनक बढ़ेगी। सरकार ने कुछ वस्तुओं को टैक्स के दायरे से बाहर ही रखा है। इसका उद्देश्य है कि आम आदमी की जिंदगी से जुड़ी बुनियादी जरूरत वाली चीजें और सस्ती हों और उनका बोझ आम आदमी की जेब पर न बढ़े। जीएसटी 2.0 का सबसे बड़ा फायदा उपभोक्ताओं को होगा। जब जरूरी सामान सस्ते होंगे तो आम परिवारों की मासिक बचत बढ़ेगी। किसान को कम लागत में उपकरण मिलेंगे तो उत्पादन बढ़ेगा। छोटे व्यापारी और दुकानदारों को टैक्स की जटिलता से मुक्ति मिलेगी जिससे उनका कारोबार सहज होगा। जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा को टैक्स फ्री करना बड़ा कदम है। कैंसर सहित 33 जीवन रक्षक दवाइयों पर टैक्स घटाना भी सराहनीय है। महिलाओं को घरेलू जरूरतों की चीजें कम कीमत पर उपलब्ध होंगी। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, क्योंकि बढ़ती खपत उद्योगों को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी। इस तरह यह सुधार केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि हर वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा। यह सुधार उस समय आया है जब अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगा रखा है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इन टैरिफों को अपने राष्ट्रीय हित में सही ठहराया है परंतु भारत ने इसका जवाब किसी राजनीतिक बयानबाजी से नहीं बल्कि ठोस आर्थिक सुधार से दिया है। जीएसटी 2.0 इस बात का प्रतीक है कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने की राह पर है। यह कदम वैश्विक समुदाय के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि भारत चुनौतियों से घबराने वाला नहीं बल्कि उन्हें अवसर में बदलने वाला देश है। अमेरिकी टैरिफ से होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई घरेलू खपत को मजबूत बनाकर की जा सकती है। यही रणनीति भारत को आर्थिक रूप से और सुदृढ़ बनाएगी। भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का सपना देख रहा है। उस दिशा में जीएसटी 2.0 एक अहम कड़ी है। यह सुधार केवल टैक्स दरों का नहीं बल्कि सोच का बदलाव है। यह ऐसी सोच है जो आम आदमी को केंद्र में रखती है और साथ ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए भारत को तैयार भी करती है। दुनिया की तेजी से बदलती आर्थिक परिस्थितियों में भारत को अपनी नीति और दृष्टि दोनों को अपडेट रखना होगा। जीएसटी 2.0 इस दिशा में एक ठोस शुरुआत है जिसका परिणाम आने वाले सालों में भारत को सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा। जीएसटी सुधारों से सरकार ने साफ कर दिया है कि अब लक्ष्य केवल नीति बनाना नहीं बल्कि उसे जमीन पर उतारकर परिणाम दिखाना है। यह सुधार किसानों से लेकर शहरी उपभोक्ताओं तक, छोटे दुकानदार से लेकर बड़े उद्योगों तक, हर किसी के लिए मायने रखता है। यह केवल टैक्स सुधार नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया अध्याय है। हालांकि इन सुधारों से सरकार को 47,700 करोड़ रुपये का सालाना राजस्व नुकसान होगा मगर बाजारों में बूम आने की संभावना से इसकी भरपाई के प्रति हर कोई आश्वस्त है। माना जा रहा है कि टैक्स दरें संतुलित होने से जहां टैक्स ज्यादा आएगा, वहीं टैक्स चोरी रुकेगी। एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि टैक्स कटौती की वजह से खरीदारी बढ़ेगी और इकॉनमी में 1.98 लाख करोड़ रुपये तक की खपत का इजाफा होगा। देश के प्रमुख उद्योगपतियों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह सुधार भारत की आर्थिक रफ्तार को और तेज करेगा। इससे भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मांग को बढ़ाने और घरेलू उत्पादन को मजबूत करने के लिए एकदम सही पॉलिसी है। भारत अब दिखाएगा कि डेड इकॉनमी कैसी दिखती है। ट्रंप ने भारत को डेड इकॉनमी बताया था। सरकार का भी यही दावा है कि सरल टैक्स प्रणाली से लोग ज्यादा टैक्स देंगे जिससे राजस्व बढ़ेगा। जब राजस्व बढ़ेगा तो सरकार के पास विकास परियोजनाओं पर खर्च करने के लिए अधिक संसाधन होंगे। स्वदेशी की मांग बढऩे का भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मोदी ने भी स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया है हालांकि, यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि जीएसटी सुधारों की घोषणा मात्र से ही सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। असली चुनौती इसके प्रभावी क्रियान्वयन की है। राज्य सरकारों की सहमति, प्रशासनिक तंत्र की दक्षता और टैक्स चोरी रोकने पर नियंत्रण से ही पता चलेगा कि यह सुधार कितना सफल होता है। अपेक्षित नतीजे आने में कम से कम छह महीने तो लगेंगे ही। Read more » जीएसटी 2.0