राजनीति

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का अर्थ

शाब्दिक तौर पर राष्ट्रवाद एक आधुनिक ‘पद’ है। ऐसा माना जाता है कि आधुनिक राष्ट्र-राज्य की अवधारणा फ्रांस की क्रांति (1789) के बाद विकसित हुई। सामाजिक विकास या राजनैतिक सिध्दांत के तौर पर राष्ट्रवाद की संकल्पना…

अब सीबीआई ने बोफोर्स के दलाल क्वात्रोच्चि को क्‍लीन चिट दी

केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने बहुचर्चित बोफोर्स तोप सौदा दलाली कांड के मुख्य अभियुक्त इतालवी नागरिक ओतावियो क्वात्रोच्चि का नाम आरोपी सूची से हटा दिया है। सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा कि..

क्या रामविलास पासवान 23 वर्ष में ही विधायक हो गए?

लोकसभा के वेबसाइट के अनुसार लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान 23 वर्ष में ही बिहार विधानसभा के सदस्य हो गए, जबकि कानून के अनुसार न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए।

मतदाता और राजनेताओं के मध्य लोकतन्त्र

राजनीति का पहला सबक या कहें कि लोकतन्त्र की पहली परिभाषा यह कि ‘‘जनता का शासन, जनता के लिए, जनता के द्वारा” का कोई सैद्धान्तिक प्रभाव नहीं रह गया है। हो सकता है कि..

सकारात्मक राजनीति के लिए राजनीति में आना होगा

वर्तमान लोकसभा चुनावों में तमाम प्रयासों के बाद भी मतदान का प्रतिशत प्रथम एवं द्वितीय चरण में बढ़ता नहीं दिखा। मतदाताओं की इस नकारात्मक या कहें कि उदासीन स्थिति के कारण…

मप्र में मीसा बंदियों के साथ भेदभाव

मध्यप्रदेश में मीसा बंदियों के साथ भेदभाव का मामला सामने आया है। यहां आपातकाल के दौरान मीसा के तहत बंदी बनाए गए लोगों को उनकी पार्टीगत निष्ठा को देखते हुए पेंशन दिया जा रहा है

मप्र में सुषमा स्वराज समेत 198 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला कल

पंद्रहवी लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के दौरान मध्य प्रदेश में गुरुवार को केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज सहित 198 उम्मीदवारों…

घाघ नेताओं के जमघट में बेबस आयोग – सरिता अरगरे

चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच ” तू डाल – डाल मैं पात- पात” का खेल दिन ब दिन तेज़ होता जा रहा है । राजनीतिक दलों की गतिविधियों पर चुनाव आयोग कड़ी निगाह रख रहा है…

नौकरशाहों सियासत में बढ़ता दखल – सरिता अरगरे

नौकरशाही का सफ़र तय करते हुए राजनीति की डगर पर बढ़ने वालों की फ़ेहरिस्त में डॉक्टर भागीरथ प्रसाद का नाम भी जुड़ गया है । इंदौर के देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय के कुलपति रहे डॉ…

राजनीतिक पार्टियां के चंदे का फंडा – अफरोज आलम ‘साहिल’

हमारे देश में जितनी भी राजनीतिक पार्टियां हैं, उन्हें अपना जनसेवा और राजनीति का कारोबार चलाने के लिए पैसा चाहिए। और पैसा भी खूब चाहिए। जलसा, सम्मेलन, चुनाव और प्रचार में उड़ते…