राजनीति मोदी में दम नहीं लेकिन विपक्ष बेदम क्यों July 31, 2025 / July 31, 2025 by राजेश कुमार पासी | Leave a Comment राजेश कुमार पासी इस लेख का शीर्षक एक सवाल है और यह सवाल इसलिए पूछना पड़ रहा है क्योंकि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के एक बड़े समारोह में बोलते हुए कहा है कि मैं मोदी जी से कई बार मिला हूं, उनमें कोई दम नहीं है । उनकी बात को न काटते हुए […] Read more » Modi has no strength but why is the opposition breathless विपक्ष बेदम क्यों
आर्थिकी राजनीति वर्तमान वैश्विक नेतृत्व में विश्व कल्याण के भाव का अभाव है July 31, 2025 / July 31, 2025 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment आज विश्व के कुछ देशों में सत्ता उस विचारधारा के दलों के पास आ गई है जो शक्ति के मद में चूर हैं एवं अपने लिए प्रशंसा प्राप्त करना चाहते हैं। उनके विचारों में विश्व कल्याण की भावना का पूर्णत: अभाव है। इन देशों के नेतृत्व की कार्यप्रणाली से कुछ देशों के बीच आपस में […] Read more » The current global leadership lacks a sense of world welfare
आर्थिकी राजनीति टैरिफ आर्थिक युद्ध नहीं, आत्मनिर्भर शांति का रास्ता बने July 31, 2025 / July 31, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग जब किसी वैश्विक ताक़त के शिखर पर बैठा नेता ‘व्यापार’ को भी ‘सौदेबाज़ी’ और ‘दबाव नीति’ का औज़ार बना ले, तब यह न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर देता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों के आधारभूत सिद्धांतों को भी चुनौती देता है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 […] Read more » not economic war Tariffs should become the path to self-reliant peace
राजनीति गिरती छतें, टूटते सपने: क्या गरीबों की जान की कोई क़ीमत नहीं? July 31, 2025 / July 31, 2025 by अशोक कुमार झा | Leave a Comment लेखक: अशोक कुमार झा क्या आपने कभी सुना है कि किसी कलेक्टर का घर गिर गया हो? किसी मंत्री के आवास की छत भरभरा कर ढह गई हो? या किसी नौकरशाह की कोठी किसी बारिश में ढह गई हो? नहीं ना? क्योंकि ऐसा होता ही नहीं है। उनके मकानों की समय-समय पर मरम्मत होती है, […] Read more » Falling roofs Jhalawar's horrific accident झालावाड़ का भयावह हादसा
राजनीति समाज साक्षात्कार उधम सिंह: लंदन की अदालत में भारत की गरिमा का नाम July 30, 2025 / July 30, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment उधम सिंह केवल एक क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि एक विचार थे—संयम, संकल्प और सत्य का प्रतीक। जलियांवाला बाग़ के नरसंहार का प्रत्यक्षदर्शी यह वीर 21 वर्षों तक चुपचाप अपने मिशन की तैयारी करता रहा और लंदन जाकर ओ’डायर को गोली मारकर भारत का प्रतिशोध पूरा किया। उनकी चुप्पी न्याय की गर्जना थी, जो आज भी […] Read more » Udham Singh: The name of India's dignity in London court उधम सिंह
राजनीति बिहार को लेकर ‘सुप्रीम’ निर्णय July 30, 2025 / July 30, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment बिहार विधानसभा का चुनाव के दृष्टिगत सभी के भीतर इस बात को लेकर कौतूहल है कि वहां सरकार का नेतृत्व कर रहे नीतीश कुमार अगली बार फिर सत्ता में लौटेंगे या नहीं ?दूसरे, यहां मोदी का जादू चलता है या नहीं? तीसरे, लालू की लालटेन यहां जलेगी या फिर राहुल गांधी कुछ विशेष कर पाएंगे […] Read more » 'Supreme' decision regarding Bihar
राजनीति आत्मनिर्भरता के लिए कौशल दक्षता का आलाप July 30, 2025 / July 30, 2025 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गवदेश में वस्तु निर्माण के पुख्ता स्तंभ बनाने के लिए कौशल दक्षता में कमी की बात कही जाती है। यहां तक कि इंजीनियर और पीएचडी डिग्रीधारी को भी अयोग्य ठहरा दिया जाता है। हाल ही में आईफोन बनाने वाली अमेरिकी कंपनी एप्पल ने चेन्नई में फोन निर्माण के लिए एक संयंत्र स्थापित किया है, […] Read more » आत्मनिर्भरता के लिए कौशल दक्षता
राजनीति बाघों के सबसे बड़े घर में सुरक्षा बनी चुनौती July 30, 2025 / July 30, 2025 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव मध्यप्रदेश में चल रहे मानव-बाघ संघर्श और अवैध शिकार एक बड़ी चुनौती बनकर पेश आई है। क्योंकि यह राज्य देश में ‘टाइगर स्टेट‘ कहा जाता है। बाघों की निरंतर बढ़ती संख्या इनके संरक्षण और सुरक्षा के लिए चुनौती बन रही है। अतएव वन विभाग को सुरक्षा के साथ संवेदनशीलता की भी जरूरत है। […] Read more » बाघ संरक्षण
राजनीति भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा ई-कचरा उत्पादक July 30, 2025 / July 30, 2025 by पुनीत उपाध्याय | Leave a Comment पुनीत उपाध्याय भारत में बढ़ता ई-कचरा या ई-वेस्ट गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक कचरा या ई-कचरा दरअसल बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का वेस्ट है। राज्यसभा में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों का हवाला देकर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया कि वित्तीय […] Read more » India is the fifth largest e-waste producer in the world ई-कचरा उत्पादक
राजनीति कंबोडिया-थाईलैंड के बीच तनाव से चीन को होगा फायदा July 30, 2025 / July 30, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment राजेश जैन दक्षिण-पूर्व एशिया एक बार फिर अशांत है। कंबोडिया और थाईलैंड खतरनाक सीमा संघर्ष में उलझ गए हैं। अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।इस बार भी विवाद की जड़ वही पुरानी है—प्रीह विहेयर मंदिर। हजारों साल पुराना यह मंदिर खमेर साम्राज्य की धरोहर है लेकिन इस […] Read more » China will benefit from tension between Cambodia and Thailand कंबोडिया-थाईलैंड के बीच तनाव
राजनीति बिहार का भविष्य अनिश्चिता के गर्त में July 29, 2025 / July 29, 2025 by डॉ.नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी | Leave a Comment डॉ.नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी बिहार में नेताओं के अपने परिवारवाद को विकसित करने की वजह से बिहार का भविष्य अंधकार में चला गया। केवल नेताओं के वंश विकसित हो सके लेकिन बिहार अंदर से खोखला होता गया। वैसे तो बिहार में आजादी के बाद से स्थिति में सुधार सामाजिक और आर्थिक तौर पर बाकी राज्यों की अपेक्षा कमतर ही रहा है। जब झारखंड बिहार का हिस्सा था, फिर भी बिहार में हटिया या बोकारो स्टील प्लांट या जमशेदपुर के अलावा कोई भी औद्योगिक क्षेत्र विकसित नही हो पाया। बिहार में सबकुछ होते हुए भी राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव में बिहार का विकास समुचित तरीके से नहीं हो पाया। बिहार की विडंबना ये रही कि बिहार जातीय भेदभाव में ही उलझ कर रह गया। कोई भी नेता बिहार में ऐसा नही हो पाया जो बिहारी अस्मिता की बात करता हो। जयप्रकाश नारायण या राजेन्द्र प्रसाद के अलावा सभी नेता जातीय समीकरण को ही आगे बढ़ाने में तुले रहे। बिहार का कोई भी नेता राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में नाकाम रहा । बिहार के किसी भी नेता वह माद्दा नहीं रहा कि वह राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व दे सकें। बिहार के सारे नेता पिछलग्गू नेता ही बने रहे। बिहार का दुर्भाग्य रहा कि कांग्रेस के बाद राजद की सत्ता रही जिसने पंद्रह सालों तक बिहार को केवल अराजकता की स्थिति में डाले रखा। उसके बाद जब उस अराजकता से मुक्ति मिली तो नीतीश कुमार की सरकार रही। नीतीश कुमार की सरकार ने शुरुआत के पाँच सालों तक बिहार में थोड़ा- बहुत विकास का काम जरूर किया लेकिन पिछले दस सालों में नीतीश कुमार की सरकार भी राजद के पदचिन्हों पर चलती हुई नजर आ रही है।आज बिहार की स्थिति बद से बदतर है। नीतीश कुमार की बिहार के प्रशासन पर पकड़ एकदम ढीली पड़ गई है। दरअसल नीतीश कुमार अचेतावस्था में सरकार की बागडोर संभाले हुए हैं। बीजेपी का बिहार में क्या रोल है ये उनको भी पता नहीं है। केवल नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाये रखना उनकी प्राथमिकता है। दरअसल बिहार में बीजेपी का कोई सशक्त नेता भी नहीं है जिसके चेहरे पर बीजेपी अपने दम पर चुनाव लड़ सके। बीजेपी अपने दम पर बिहार में चुनाव जीत जाए, ये असंभव है। बिहार अपने जातीय समीकरण से अभी तक उभर नहीं पाया है। बिहार में पहले अपनी जाति है, तब बिहार की अस्मिता की बात आती है। बिहार के गौरव की बात करने वाला एक भी बिहारी आपको नहीं मिलेगा।एक तो बिहार की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि हर साल बिहार बाढ़ से प्रभावित रहता है जिसके कारण बहुसंख्यक बिहारिओं को अन्य राज्यों में जाकर मजदूरी करनी पड़ती है। इसके अलावा बिहार में भूमिहीन किसानों की तादाद बहुत ज्यादा है। बिहार में भूदान हो या चकबंदी का कोई ज्यादा फायदा नहीं हो पाया। बिहार में जिसकी भी सरकार रही वह केंद्र से अपना हक मांगने में विफल रही। बिहार पर्यटन के मामले में भी फिसड्डी रहा है। बोधगया, वैशाली या पावापुरी के अलावा कुछ भी नहीं है और ये जैनियों और बौद्धों का धार्मिक स्थल है। यहाँ ना कोई धार्मिक मंदिर या कोई पौराणिक किला बगैरह कुछ भी नहीं है। बिहार में एक भी दर्शनीय स्थल नहीं है जहाँ कोई पर्यटक आ – जा सके। बिहार में अपराध के अलावा चर्चा का कोई विषय नहीं रहता है। पिछले तीस सालों में बिहार में अपराधियों की पौ बारह रही है। राजद के राज्य में अपहरण और अपराध एक उद्योग का रूप ले चुका था।अभी वर्तमान में अपराध की वैसी ही स्थिति निर्मित हो गई है। बिहार का अधिकारी जब ये बोलने लगे कि किसान फुर्सत में है इसलिए अपराध की घटना बढ़ रही है तो इससे शर्मनाक बयान और क्या हो सकता है। दरअसल बिहार को जबतक योगी जैसा मुख्यमंत्री नहीं मिलेगा, तबतक बिहार का कुछ भी भला नही हो सकता है।आज योगी ने उत्तरप्रदेश को सुधार दिया है।गुंडों की हेकड़ी निकल गई है। शुक्र मनाइए न्यायालय की कि केवल हाफ एनकाउंटर हो रहा वरना अबतक कितने अपराधी स्वर्ग सिधार चुके होते। प्रशासन कैसे किया जाता है ये योगी आदित्यनाथ ने दिखला दिया है। इसी ढर्रे पर बाकी मुख्यमंत्रियों को चलना होगा। जनसुराज पार्टी जिसके कर्ता धर्ता प्रशांत किशोर हैं वे भी कोई छाप छोड़ने में अभी तक असफल नजर आ रहे हैं। बिहार की राजनीति में उन्हें भी अभी बहुत पापड़ बेलने होंगें। दरअसल इसके पीछे की वजह जातीय समीकरण है।आज बिहार में अगड़ी जाति का कोई नेता अपने दम पर कोई प्रभाव नहीं डाल सकता। बिहार में अगड़ी जाति और पिछड़ी जातियों के बीच एक गहरी खाई निर्मित हो गई है जिसे पाटना बहुत मुश्किल है। उसके लिए जयप्रकाश नारायण जैसा कोई सर्वमान्य नेता चाहिए जो आज की परिस्थितियों में नामुमकिन है। बिहार में राजपूत भूमिहार को देखना नहीं चाहते तो यादव राजपूतों को नहीं। उसी तरह सभी जातियाँ एक दूसरे को फूटी आँख नहीं सुहाते हैं। बिहार में जातियों का गणित लगाना मुश्किल है। बिहार के चुनाव में जाति ही प्रमुख मुद्दा रहता आया है। बिहार के लोगों को ना तो देश से कोई मतलब है, ना को उनके राज्य से। अपनी जाति का नेता कितना भी खराब या अपराधी हो, वोट वे उसी को देंगें। बिहार में चुनाव कभी भी मुद्दे के आधार पर नहीं लड़ा गया है। आज बिहार की राजधानी पटना अपराधियों के लिए उपजाऊ स्थल हो गया है। […] Read more » Bihar's future is in the pit of uncertainty
राजनीति बंग में राष्ट्रपति शासन की संभावना July 29, 2025 / July 29, 2025 by शिवानंद मिश्रा | Leave a Comment शिवानन्द मिश्रा पश्चिम बंगाल में बाजी पलट गई है। चुनाव आयोग ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की संभावनाएँ। हाँ, यह सच है! चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि पूरे देश में मतदाता सूची सत्यापन किया जाएगा। बिहार के बाद, अगला राज्य पश्चिम बंगाल है जहाँ मुख्यमंत्री […] Read more » Possibility of President's rule in Bengal बंग में राष्ट्रपति शासन की संभावना