राजनीति

एक बार फ़िर इतिहास को कटघरे में

जिन्ना लेकर उत्पन्न ताजा विवादों ने एक बार फ़िर इतिहास को कटघरे में ला खड़ा किया है । बात आडवानी की हो या जसवंत की मसले के पीछे प्रमाणिक इतिहास की जानकारी का अभाव है । अब तक के ज्ञात इतिहास की प्रमाणिकता को चुनौती देने का साहस हम भारतीयों में न के बराबर है

अशोक चक्रधर को लेकर हंगामा क्यों बरपा है ?

हिन्दी अकादमी में विवाद गहराने लगा है। वजह बनी है एक ऐसा शक्स, जिस पर आरोप लगायें जा रहे है कि वह गंभीर नहीं है बल्कि हास्यवादी है। जो अपने चिंता और चिंतन को माथे के सिकन की लकीरों में तबदील होने नहीं देता बल्कि अपनी चुटिली अंदाजों से पल में हवा कर देता है। जी हाँ हम बात कर रहे है डाॅ. अशोक चक्रधर जी की।

एक कॉमरेड व्यथा गाथा …

कल मंडीहॉउस में कॉमरेड संतोष से मिला । मुलाकात कब वाद-प्रतिवाद के ऊपर बहस में बदल गई तनिक भी पता न चला । वामपंथ की प्रासंगिकता से शुरू हुए इस बहस के अंत तक पहुँचते -पहुँचते इसकी असलियत पर ही प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया।