राजनीति ममता माओवादी! August 14, 2010 / December 22, 2011 by अमलेन्दु उपाध्याय | 3 Comments on ममता माओवादी! -अमलेन्दु उपाध्याय इस दहर में सब कुछ है पर इन्साफ नहीं है। इन्साफ हो किस तरह कि दिल साफ नहीं है। राजनीति के विषय में अक्सर कई कहावतें सुनने को मिलती हैं। जैसे राजनीति में दो और दो चार नहीं होते या राजनीति में कुछ सही गलत नहीं होता या फिर राजनीति और अवसरवादिता एक […] Read more » Maoist ममता बनर्जी माओवाद
राजनीति भाजपा का मुस्लिम नज़रिया August 13, 2010 / December 22, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | 10 Comments on भाजपा का मुस्लिम नज़रिया -फ़िरदौस ख़ान मुसलमानों के लिए अछूत मानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रवाद के नाम पर मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की कवायद में जुटी है। अपने मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तर्ज़ पर भाजपा भी यही राग अलापती है कि हिन्दुत्व का मतलब हिन्दू धर्म से न होकर इस धरती से और […] Read more » Muslim भाजपा मुसलमान
राजनीति बुरे को अच्छा बनाने की कारपोरेट कला August 13, 2010 / December 22, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 3 Comments on बुरे को अच्छा बनाने की कारपोरेट कला -जगदीश्वर चतुर्वेदी हमें बार-बार यही बताया जा रहा है कि हम पूंजीवाद का समर्थन करें। हमें सहनशील बनने की सीखें प्रदान की जा रही हैं। हमें कहा जा रहा है कि हम तटस्थ रहें, विवादों, संघर्षों, मांगों के लिए होने वाले सामूहिक संघर्षों से दूर रहें, सामूहिक संघर्ष बुरे होते हैं। आम आदमी को तकलीफ […] Read more » Capitalism कॉरपोरेट पूंजीवाद
राजनीति अराजकता की गिरफ्त में जम्मू एवं काश्मीर August 12, 2010 / December 22, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on अराजकता की गिरफ्त में जम्मू एवं काश्मीर -लाल कृष्ण आडवाणी, पूर्व उपप्रधानमंत्री इन दिनों काश्मीर काफी सुर्खियों में है। पिछले सप्ताह जम्मू-काश्मीर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक नई दिल्ली आकर प्रधानमंत्री से मिले और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें उन्होंने राज्य में सुरक्षा बलों की उपस्थिति को किसी भी प्रकार से कम करने के प्रति सावधान किया है। उन्होंने यह भी […] Read more » Jammu Kashmir जम्मू-काश्मीर
राजनीति मुस्लिम तृष्टिकरण आखिर कब तक? August 12, 2010 / December 22, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 5 Comments on मुस्लिम तृष्टिकरण आखिर कब तक? -यशवीर राघव लोकतंत्र के चार स्तंभों में से एक ऐसा स्तंभ है जिसे सत्य का अन्वेषण करने वाला, किसी भी कीमत पर बिकने न वाला, निष्पक्ष एवं निरपेक्ष होना चाहिए। वह स्तंभ है मीडिया! हमारे देश में लोकतंत्र के सभी स्तंभों की दशा दयनीय ही है। चौथा स्तंभ भी उसका अपवाद नही है। इसी दयनीय […] Read more » Muslim मुस्लिम तुष्टीकरण
राजनीति राष्ट्र के विकास में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भूमिका August 12, 2010 / December 22, 2011 by वी. के. सिंह | 1 Comment on राष्ट्र के विकास में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भूमिका -वी. के. सिंह राष्ट्र समान्यत: राज्य या देश से समझा जाता है। राष्ट्र का एक शाश्वत अथवा जीवंत अर्थ है ‘एक राज्य में बसने वाले समस्त जनसमूह।’ सास्कृतिक राष्ट्रवाद इसी शाश्वत अर्थ को दर्शाता है। राष्ट्रवाद राष्ट्र हितों के प्रति समर्पित विचार है, जो एकता, महत्ता और कल्याण का समर्थक है, समस्त भारतीय समुदाय को […] Read more » cultural सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
राजनीति ये है दिल्ली मेरी जान August 10, 2010 / December 22, 2011 by लिमटी खरे | 4 Comments on ये है दिल्ली मेरी जान -लिमटी खरे अब पुलिस पर कसी लगाम सबसे बडी अदालत ने पुलिस जो चाहे सो कर सकती है। पुलिस की अगाडा, घोडे का पिछाडा और मौत का नगाडा इन तीनों चीजों से बचने की सलाह हर वक्त ही दी जाती है। आजादी के बाद भारत में पुलिस को इतना अधिकार सम्पन्न बना दिया गया है […] Read more » Delhi
राजनीति निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव के लिए आवश्यक है ईवीएम का विश्वसनीय होना August 7, 2010 / December 22, 2011 by अशोक बजाज | 15 Comments on निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव के लिए आवश्यक है ईवीएम का विश्वसनीय होना चुनाव आयोग की हीरक जयंती जयंती पर विशेष -अशोक बजाज भारत में निर्वाचन आयोग अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूर्ण होने पर हीरक जयंती मना रहा है। इस तारतम्य में राज्य की राजधानियों में फोटो प्रदर्शनी लगाई जा रही है। प्रदर्शनी में चुनाव आयोग की गतिविधियों को दर्शाने वाले विहंगम एवं दुर्लभ चित्र लगे हैं, […] Read more » Election Comission ईवीएम चुनाव आयोग
राजनीति गुजरात एक “शत्रु” राज्य है, क्योंकि… August 6, 2010 / December 22, 2011 by सुरेश चिपलूनकर | 11 Comments on गुजरात एक “शत्रु” राज्य है, क्योंकि… नरेन्द्र भाई मोदी… यदि आपको यह लगता है कि केन्द्र की निगाह में गुजरात एक "शत्रु राज्य" है, तो सही ही होगा, क्योंकि मुम्बई-भिवण्डी-मालेगाँव के दंगों के बावजूद सुधाकरराव नाईक या शरद पवार को कभी "हत्यारा" नहीं कहा गया… एक पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा दिल्ली में चुन-चुनकर मारे गये हजारों सिखों को कभी भी "नरसंहार" नहीं कहा गया… हमारे टैक्स के पैसों पर पलने वाले कश्मीर और वहाँ से हिन्दुओं के पलायन को कभी "Genocide" (जातीय सफ़ाया) नहीं कहा जाता… वारेन एण्डरसन को भागने में मदद करने वाले भी "मासूम" कहलाते हैं… यह सूची अनन्त है। Read more » Amit Shah Gujrat Encounter Case Sohrabuddin गुजरात
राजनीति सिनेमा माओवादियों की ओवर ग्राउंड आर्मी व ओडिया फिल्म अभिनेता सिद्धांत महापात्र August 4, 2010 / December 22, 2011 by समन्वय नंद | 9 Comments on माओवादियों की ओवर ग्राउंड आर्मी व ओडिया फिल्म अभिनेता सिद्धांत महापात्र -समन्वय नंद ओडिया फिल्म के सुपर स्टार तथा बीजू जनता दल से लोकसभा सांसद सिद्धांत महापात्र इन दिनों विवादों में फंसे हैं। ओडिया सिनेमा में एक हाई बजट के फिल्म का निर्माण किया जा रहा है जिसमें माओवादियों का महिमामंडम किया गया है। इस फिल्म में सांसद सिद्धांत ने नक्सलियों के एरिया कमांडर की भूमिका […] Read more » Maoist नक्सलवाद माओवाद
राजनीति इंद्रेश कुमार : संघ का उदारवादी चेहरा! August 3, 2010 / December 22, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | 13 Comments on इंद्रेश कुमार : संघ का उदारवादी चेहरा! -फ़िरदौस ख़ान मुसलमानों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पैठ बढ़ाने की कवायद में जुटे आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हाल ही में हेडलाइंस टुडे के स्टिंग ऑपरेशन में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने […] Read more » RSS इन्द्रेश कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
राजनीति डिजिटल मनमोहन के डिजिटल शत्रु August 3, 2010 / December 22, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on डिजिटल मनमोहन के डिजिटल शत्रु -जगदीश्वर चतुर्वेदी मनमोहन सिंह जब से प्रधानमंत्री बने हैं। वे मीडिया और विशेषज्ञों की आलोचना में नहीं आते। उन्हें प्रधानमंत्री बने 6 साल से ज्यादा समय हो गया है। मीडिया में ममता बनर्जी, शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल, डी.राजा, कांग्रेस के क्षेत्रीय नेताओं, कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों आदि की आलोचना दिखेगी लेकिन मनमोहन सिंह की आलोचना नहीं […] Read more » Manmohan Singh मनमोहन सिंह