प्रवक्ता न्यूज़ भोले शंकर भजन December 31, 2025 / December 31, 2025 by नन्द किशोर पौरुष | Leave a Comment तर्ज : कव्वाली दोहा: श्रावण मॉस में भोले का हो अध्भुत श्रृंगार, शिवलिंगों पर चढ़े है गंगा जल की धार। मु: तेरे दर पर हम आ कर भोले शंकर -२ तेरा गुणगान गाते रहेंगे,-२ जब तक तुम नहीं रीझोगे हम पर, -2 तेरा ध्यान लगते रहेंगे। -२ अ १: विपदा कब तक न हरोगे हमारी […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ हिंदुओं के नरसंहार की भूमि बनता बांग्लादेश December 31, 2025 / December 31, 2025 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment सेक्युलर दलों के मुंह पर लगा तालामृत्युंजय दीक्षितअगस्त 2024 में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हिंसक प्रदर्शनों के चलते अपना देश छोड़ना पड़ा जिसके बाद बांग्लादेश में हिन्दुओं पर आक्रमण, हत्या और आगजनी की भीषण घटनाएं हुईं क्योंकि हिन्दुओं को उनकी पार्टी का समर्थक माना जाता है। शेख हसीना के देश छोड़ने के […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ ईश्वर के अस्तित्व की मीमांसा: दर्शन और तकनीक की कसौटी पर December 27, 2025 / December 27, 2025 by पंकज जायसवाल | Leave a Comment अद्वैत कहता है जगत् माया है, जीव मिथ्या है और मोक्ष निष्काम है, जहाँ जगत, जीव और जीवन तीनों का अंततः ब्रह्म में विलय हो जाना है। अब प्रश्न उठता है कि यह ब्रह्म क्या है? तो उत्तर है कि ब्रह्म वही दिव्य ऊर्जा है, जो एक सुपर नेचुरल इंटेलिजेंस को धारण किए हुए है। Read more » ईश्वर के अस्तित्व की मीमांसा
प्रवक्ता न्यूज़ राष्ट्रीय गणित दिवस: प्रेरणा, नवाचार और सीख December 22, 2025 / December 22, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment भारत सरकार ने 2012 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा रामानुजन की 125वीं जयंती पर यह घोषणा की कि 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाएगा और उसी साल 2012 को पहले राष्ट्रीय गणित वर्ष के रूप में भी मनाया गया था। आज बच्चे गणित विषय में बहुत कम रूचि दिखाते हैं Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ किस्मत की चालें December 9, 2025 / December 9, 2025 by मुनीष भाटिया | Leave a Comment किस्मत की चालें Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ निष्क्रिय जीवनशैली लाती है कई बीमारियां December 9, 2025 / December 9, 2025 by अशोक गुप्त | Leave a Comment हम लोग प्रायः उतना सक्रिय जीवन नहीं जीते जितना हमें जीना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सिफारिश की है कि हमें सप्ताह में कम से कम डेढ़ सौ मिनट का तेज गति से करने वाला कार्य जैसे तेज चलना, बागवानी, तैरना, खेलना या व्यायाम करना चाहिए या 75 मिनट प्रति सप्ताह की अति सक्रिय एरोबोटिक फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए। Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ मनोरंजन स्थल या मौत का अड्डा? गोवा नाइट क्लब अग्निकांड ने खोले सुरक्षा के राज़ December 8, 2025 / December 8, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment क्लब की पहली मंजिल पर आग की लपटें उठने लगीं तथा उस वक्त वहां डांस फ्लोर पर 100 से अधिक पर्यटक थे। कुछ ही पल में क्लब में धुआं भर गया और भगदड़ मच गई। जान बचाने के लिए लोग भूतल पर पहुंचे, लेकिन बाहर निकलने के दरवाजे छोटे और रास्ते संकरे होने से कई लोग फंसे रह गए और आग ने पूरे क्लब को चपेट में ले लिया। Read more » गोवा नाइट क्लब अग्निकांड
प्रवक्ता न्यूज़ गोवा हादसाः झुलसती संवेदनाएं और नाकाम होती व्यवस्था December 8, 2025 / December 8, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment एक बार फिर एक भीषण आग ने 25 मासूम जिंदगियों को छीन लिया। गोवा के नाइट क्लब में हुई यह त्रासदी केवल आगजनी नहीं, बल्कि हमारे सिस्टम की जड़ता, गैर-जिम्मेदारी और नैतिक पतन की ज्वलंत मिसाल है। गोवा का जो नाइट क्लब आग की चपेट में आया, वह नियमों की अनदेखी करके तो चलाया ही जा रहा था, Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ इस वर्ष नोबेल पुरस्कार प्राप्त सृजनात्मक विनाश के सिद्धांत की जड़ें हिंदू सनातन संस्कृति में हैं November 11, 2025 / November 11, 2025 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment हिंदू सनातन संस्कृति से सम्बंधित वेदों, पुराणों एवं धार्मिक ग्रंथों में यह वर्णन मिलता है कि मानव जीवन की प्राप्ति, 84 लाख योनियों के चक्र के पश्चात प्राप्त होती है। साथ ही, यह भी माना जाता है कि मानव जीवन की प्राप्ति पिछले जन्मों में किए गए कर्मों को भोगने, भविष्य का निर्माण करने एवं 84 लाख योनियों के चक्र से बाहर निकलकर मोक्ष की प्राप्ति करने के लक्ष्य को हासिल करने के अवसर के रूप में मिलती है। अब, यह इस मानव जीवन में किए गए कर्मों पर निर्भर करता है कि हमें मोक्ष की प्राप्ति होगी अथवा 84 लाख योनियों के चक्र में एक बार पुनः फंसे रहेंगे। यदि हम अपने कर्मों को लगातार धर्मानुसार करते हैं तो मोक्ष की प्राप्ति सम्भव है। इसी आधार पर ही यह कहा भी जाता है कि मोक्ष प्राप्ति के उद्देश्य से ही देवता भी मानव जीवन को प्राप्त करने की कामना करते हैं। मोक्ष प्राप्ति के उद्देश्य से मिले इस मानव जीवन को संवारने की दृष्टि से विद्वान संत महात्मा उपदेश देते हैं कि काम एवं अर्थ से सम्बंधित की जाने वाली गतिविधियों को धर्म आधारित होना चाहिए ताकि अंत में मोक्ष की प्राप्ति सम्भव हो सके। अतः काम एवं अर्थ को धर्म एवं मोक्ष के बीच स्थान दिया गया है। धर्म का आशय यहां प्रभु परमात्मा की भक्ति अथवा पंथ (रिलीजन) से कतई नहीं हैं बल्कि धर्म से आश्य यह है कि किसी भी प्रकार के कार्य को सम्पन्न करने में इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि किए जाने वाले कार्य से किसी भी जीव जंतु अथवा मानव की हानि नहीं हो इसके ठीक विपरीत हमारे द्वारा किए जाने वाले कार्यों से समाजजनों की भलाई हो। अर्थात, निर्धारित नियमों का अनुपलान करते हुए व्यक्तिगत एवं सामाजिक कार्यों को सम्पन्न करना ही हमारा धर्म है और यदि हम लगातार धर्म के अनुसार कार्य करते रहेंगे तो मोक्ष की प्राप्ति सम्भव हो सकेगी। इस प्रकार, हिंदू सनातन संस्कृति के अनुसार पुनर्जन्म में विश्वास किया जाता है। किसी भी प्राणी का अहित करना तो दूर, बल्कि इसके बारे में कभी सोचा भी नहीं जाता है। समस्त जीवों में प्रभु परमात्मा का वास माना जाता है और सभी जीवों में एक ही आत्मा का निवास मानकर आपस में एकाकार माना जाता है। “वसुधैव कुटुम्बकम”, “सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय” “सर्वे भवंतु सुखिन:” की भावना का जन्म भी उक्त सिद्धांत के आधार पर ही हुआ है। प्रभु परमात्मा द्वारा निर्धारित की गई उम्र को प्राप्त करने के पश्चात इस जीव को अपना मानुष चोला त्यागकर, इस जीवन में किए गए कर्मों के आधार पर नयी योनि में जन्म लेना होता है और इसे ही सृजनात्मक विनाश की संज्ञा दी जा सकती है। हाल ही में, वर्ष 2025 के लिए अर्थशास्त्र विषय में नोबेल पुरस्कार की घोषणा की गई है। इस वर्ष यह पुरस्कार श्री जोएल मोक्यर, फिलिप एगियन और श्री पीटर हाविट को “सृजनात्मक विनाश (क्रीएटिव डेस्ट्रक्शन)” एवं “नवाचार संचालित आर्थिक संवृद्धि की व्याख्या” विषय पर शोद्ध करने के लिए संयुक्त रूप से दिया गया है। श्री फिलिप एगियन और पीटर हाविट ने सृजनात्मक विनाश के माध्यम से सतत संवृद्धि के सिद्धांत साझा किए हैं। आपने सृजनात्मक विनाश की व्याख्या करने के लिए एक गणितीय मॉडल तैयार किया है। सृजनात्मक विनाश के अनुसार, जब बाजार में नए और बेहतर उत्पाद आते हैं, तो पुराने उत्पाद बेचने वाली कम्पनियां अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता खो देती हैं या बाजार से बाहर हो जाती है। इसे सृजनात्मक कहा जाता है, क्योंकि यह नवाचार पर आधरित है। यद्यपि यह विनाशकारी भी हैं, क्योंकि पुराने उत्पाद अप्रचलित हो जाते हैं और अपना वाणिज्यिक मूल्य खो देते हैं। इस प्रकार बाजार में नई इकाईयों का पदार्पण होता है एवं पुरानी इकाईयों का विनाश हो जाता है। इसे ही सृजनात्मक विनाश की संज्ञा दी गई है। ऐसा आभास हो रहा है कि उक्त सिद्धांत की जड़ें हिंदू सनातन संस्कृति से ही निकलती हैं। जिस किसी जीव ने इस धरा पर जन्म लिया है उसे एक दिन तो अपने जीवन का परित्याग करना ही है। मानव जीवन की प्राप्ति भी कुछ उद्देश्यों को पूर्ण करने के लिए होती है, उन उद्देश्यों की प्राप्ति के पश्चात इस मानव जीवन को छोड़ना ही होता है। उसी प्रकार, सृजनात्मक विनाश के सिद्धांत में भी एक समय सीमा के पश्चात उत्पादों के विनिर्माण हेतु बाजार में जब नयी पीढ़ी की इकाईयों का पदार्पण होता है तो पुरानी पीढ़ी की विनिर्माण इकाईयों को बाजार से बाहर हो जाना होता है। हिंदू सनातन संस्कृति का अध्ययन करने पर ध्यान में आता है कि स्व-सृजक प्रक्रिया एवं रचनात्मक विनाश का सिद्धांत तो भारतीय संस्कृति में पूर्व से ही अंतर्निहित है। भगवान शिव जब तांडव नृत्य करते हैं तो बुरे विचारों का नाश होकर नए विचार जन्म लेते हैं जो प्रकृति का सृजन कर प्रकृति को नई ऊंचाई पर ले जाने में सहायक होते हैं। भगवान शिव भी तांडव नृत्य इस सिद्धांत के आधार पर करते हैं ताकि पृथ्वी पर आवश्यक विनाश हो सके एवं नयी प्रकृति का पुनर्निर्माण हो सके। “शिव तांडव के सृजनात्मक विनाश सम्बंधी सिद्धांत” को ही अर्थशास्त्र में लागू करते हुए कहा गया है कि प्रत्येक उत्पादन इकाई की अपनी एक उम्र तय होती है और इस खंडकाल में सामान्यतः नवाचार होने के चलते पुरानी इकाईयां बंद हो जाती हैं और यहां यह कहा गया है कि इन पुरानी इकाईयों को नष्ट होने देना चाहिए ताकि नवाचार के साथ नई उत्पादन इकाईयों को स्थापित कराया जा सके। यह सिद्धांत शिव तांडव की तरह विभिन्न क्षेत्रों में लगातार चलता रहता है। श्री जोएल मोक्यर ने तकनीकी प्रगति के माध्यम से सतत आर्थिक संवृद्धि के लिए आवश्यक पूर्व शर्तों की पहचान की है और उन्होंने उन तंत्रों का वर्णन किया है जो वैज्ञानिक सफलताओं और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों को एक दूसरे को बढ़ाने तथा एक स्व-सृजक प्रक्रिया बनाने में सक्षम बनाते हैं। उन्होंने सतत संवृद्धि के लिए आवश्यक कारकों की पहचान की हैं। इनमें शामिल हैं – उपयोगी ज्ञान का सतत प्रवाह – जिसमें (1) प्रस्तावात्मक ज्ञान (प्रोपोजीशनल नोलेज), जो दर्शाता है कि कोई व्यक्ति काम क्यों करता है,(2) निर्देशात्मक ज्ञान (प्रेसक्रिप्टिव नोलेज) जो वर्णित करता है कि किसी व्यक्ति द्वारा काम करने के लिए क्या आवश्यक है, शामिल है। इसी प्रकार वाणिज्यिक ज्ञान द्वारा विचारों को वाणिज्यिक उत्पादों में बदला जाता है और इस परिवर्तन के प्रति सामाजिक खुलापन होना चाहिए जो पुराने उत्पादों के स्थान पर नए उत्पादों को स्वीकार करने की इच्छा रखते हों। इसी प्रकार स्व-सृजक प्रक्रिया के अंतर्गत यह कहा जा सकता है कि हिंदू सनातन संस्कृति में मनुष्य का इस धरा पर जन्म 84 लाख योनियों से अपने आप को मुक्त करने के उद्देश्य से होता है अतः उसे ज्ञान रहता है कि उसे किस प्रकार के कर्म इस मानुष जीवन में करना हैं और क्यों करना है। इन निर्धारित कर्मों को करते हुए मनुष्य मोक्ष को प्राप्त करने हेतु सदैव ही प्रयासरत रहता है। इस ही स्व-सृजक प्रक्रिया कहा जा सकता है। प्रहलाद सबनानी Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ असुरक्षित सड़कों के प्रदेश में सड़क हादसों पर ’जीरो टॉलरेंस’ November 7, 2025 / November 7, 2025 by डॉ वीरेन्द्र भाटी मंगल | Leave a Comment डा वीरेन्द्र भाटी मंगल राजस्थान, जो अपनी भव्यता और अतिथि-सत्कार के लिए जाना जाता है, दुर्भाग्यवश इन दिनों सड़क हादसों के एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है। हाल के दिनों में हुई सिलसिलेवार भीषण दुर्घटनाओं ने न केवल कई परिवारों को उजाड़ दिया है बल्कि राज्य की यातायात सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ स्नेह, त्याग और विश्वास की उजली परंपरा भाई दूज October 22, 2025 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment भाई दूज (23 अक्तूबर) पर विशेष– योगेश कुमार गोयलआमतौर पर दीपावली के दो दिन बाद अर्थात् कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाए जाने वाले भाई दूज पर्व को ‘यम द्वितीया’ व ‘भ्रातृ द्वितीया’ के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि इस वर्ष दीवाली 20 अक्तूबर को मनाई गई और भाई दूज पर्व 23 अक्तूबर को […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ अहोई अष्टमी October 13, 2025 / October 13, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment व्रत नहीं यह, ममता की मौन साधना है, संतान के जीवन में उजास की प्रार्थना है। नयनों में दीपक, हृदय में विश्वास की लौ, माँ अहोई के चरणों में समर्पण की आराधना है। Read more »