लेख समाज विदेशी विश्वविद्यालय: शिक्षा का वैश्वीकरण या नई असमानता की शुरुआत February 6, 2026 / February 6, 2026 by राजेश जैन | Leave a Comment राजेश जैन हाल ही में खबर आई थी कि नौ ब्रिटिश विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं। भारत के उच्च शिक्षा परिदृश्य में यह टर्निंग पॉइंट 2023–24 से आया था। तभी से दुनिया के नामी विश्वविद्यालयों ने हमारे देश की ज़मीन पर अपने स्वतंत्र कैंपस खोलना शुरू किया। यह […] Read more » शिक्षा का वैश्वीकरण
समाज आस्था व विश्वास को यदि हथियार बना देंगे तो धर्म का क्या होगा? February 6, 2026 / February 6, 2026 by गौतम चौधरी | Leave a Comment गौतम चौधरी अभी हाल ही में बांग्लादेश में एक नए प्रकार के कथित लोकतंत्र समर्थित आन्दोलन में ऐसा बहुत कुछ हुआ जो समझ से पड़े है। उसमें से एक घटना कथित तौर पर ईशनिंदा का भी सामने आया है। मसलन ईशनिंदा के आरोप में एक हिंदू मज़दूर की भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी। […] Read more » आस्था व विश्वास
समाज नर्सरी से कॉलेज तक, एडमिशन की युद्धभूमि February 3, 2026 / February 3, 2026 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment दाख़िले की इस दौड़ में सबसे पहले निशाने पर आता है मासूम बच्चा। वह उम्र, जब खेलना, कल्पना करना और सवाल पूछना चाहिए, उसी उम्र में उसे फ़ॉर्म, इंटरव्यू, टेस्ट और रैंक के बोझ Read more » एडमिशन की युद्धभूमि दाख़िले की दौड़ में बच्चों पर बढ़ता दबाव
समाज कच्चे घरों के बीच पक्की उम्मीदों का सपना February 3, 2026 / February 3, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment कच्चे घरों के बीच पक्की उम्मीदों का सपना Read more »
समाज नारी देह, नारी अधिकारः माहवारी पर सुप्रीम कोर्ट की दृष्टि February 2, 2026 / February 2, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment माहवारी पर सुप्रीम कोर्ट Read more »
शख्सियत समाज सुहासिनी गांगुली : स्वातंत्र्य समर का अचर्चित क्रांतिकारी स्वर February 2, 2026 / February 2, 2026 by प्रमोद कुमार | Leave a Comment आततायी, जुल्मी एवं दमनकारी अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष करने वाले मां भारती के पुत्र-पुत्रियों की एक लम्बी श्रंखला है। अनेकानेक क्रांतिकारी युवक-युवतियों ने पराधीनता की बेड़ियों से Read more » सुहासिनी गांगुली
समाज रिश्ते, शर्तें और डर से घिरी एक पीढ़ी February 2, 2026 / February 2, 2026 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment आज के समय में यदि कोई सबसे जोखिम भरा सामाजिक कार्य है, तो वह है—किसी को रिश्ते की बात कहना। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि हमारे बदलते सामाजिक मानस की सच्चाई है। Read more »
समाज ज्ञान, स्क्रीन और संवेदना का संकट February 2, 2026 / February 2, 2026 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment — डॉ. सत्यवान सौरभ “ज्ञान बढ़ा पर भाव क्या, अब भी मन लाचार”—यह पंक्ति केवल एक दोहा नहीं, बल्कि इक्कीसवीं सदी के मनुष्य की सामूहिक आत्मस्वीकृति है। हमने जितना ज्ञान अर्जित किया है, उतना शायद मानव इतिहास के किसी भी कालखंड में नहीं किया गया। सूचनाएँ उँगलियों पर नाच रही हैं, दुनिया एक छोटे से […] Read more » स्क्रीन और संवेदना का संकट
शख्सियत समाज गुरु रविदास जयंती: सामाजिक समता और मानवीय गरिमा के महान उद्घोषक February 2, 2026 / February 2, 2026 by बाबूलाल नागा | Leave a Comment गुरु रविदास जयंती हिंदू चंद्र पंचांग के माघ महीने की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। यह आमतौर पर हर साल जनवरी या फरवरी में पड़ती है। 2026 में गुरु रविदास जयंती रविवार, 1 फरवरी Read more » गुरु रविदास जयंती
समाज अवैध कब्जे और बेघर होता भारतः एक अंतहीन राष्ट्रीय संकट January 30, 2026 / January 30, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग-सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण की समस्या भारत में न तो नई है और न ही किसी एक क्षेत्र तक सीमित। यह एक ऐसी जटिल और बहुआयामी चुनौती है, जो शहरीकरण, पलायन, राजनीतिक स्वार्थ, प्रशासनिक लापरवाही और सामाजिक मजबूरियों के सम्मिलित परिणाम के रूप में सामने आती है। देश के लगभग हर राज्य, हर […] Read more » बेघर होता भारत
समाज सनातन संस्कृति : विश्व कल्याण का शाश्वत मार्ग January 30, 2026 / January 30, 2026 by डॉ. हरिश चन्द्रा | Leave a Comment हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव सनातन संस्कृति जी की आज हर कोई चर्चा कर रहा है. व्यक्ति, परिवार ,समाज जीवन ,राष्ट्र जीवन और विश्व मानवता के लिए इससे शुभ कल्याणकारी और कुछ हो नहीं सकता जब हम सनातनी हो जाए । वास्तविकता तो यह है कि विनाश के मुहाने पर खड़ी वैश्विक समस्याओं का समाधान और विश्व मानवता […] Read more » : विश्व कल्याण का शाश्वत मार्ग sanatan sanskriti सनातन संस्कृति
शख्सियत समाज माखनलाल चतुर्वेदी : राष्ट्रीय पत्रकारिता का तेजोमय प्रखर स्वर January 30, 2026 / January 30, 2026 by प्रमोद कुमार | Leave a Comment प्रमोद दीक्षित मलय प्राथमिक शिक्षा के दौरान एक कविता पढ़ने को मिली थी जिसका प्रेरक भाव मन-मस्तिष्क में आज भी अंकित है। न केवल वह कविता आज तक कंठस्थ है बल्कि वह महनीय रचनाकार का व्यक्तित्व और जीवन भी आंखों के सम्मुख चलचित्र की भांति वर्तमान है। वह कविता थी – ‘चाह नहीं मैं सुरबाला […] Read more » माखनलाल चतुर्वेदी