समाज मानवाधिकार के सेकुलर मापदंड April 15, 2012 / April 15, 2012 by एल. आर गान्धी | 1 Comment on मानवाधिकार के सेकुलर मापदंड एल. आर गाँधी आस्तीन में सांप पालने के राष्ट्रीय व्यसन से ग्रस्त हमारे च्चिद्दी मियां वैसाखी के शुभ पर्व पर भारत-पाक दोस्ती व् तिजारत को बढ़ावा देने के लिए अटारी सीमा पर संयुक्त जांच केंद्र के उद्घाटन की तैयारी में व्यस्त हैं, उधर पाक के इस्लामिक आतंक से पीड़ित ४० हिन्दू पडोसी मुल्क से पलायन […] Read more » Human Rights मानवाधिकार सेकुलर मापदंड
समाज कब नसीब होगी गरीब बच्चों को उच्च मानकों पर आधारित शिक्षा? April 13, 2012 / April 13, 2012 by राजेश कश्यप | Leave a Comment राजेश कश्यप सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार के ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009’ (आरटीई) के तहत सरकारी व निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिलों में 25 प्रतिशत आरक्षण पर अपनी मुहर लगाकर अत्यन्त सराहनीय एवं स्वागत योग् निर्णय सुनाया है। इससे निजी स्कूलों में भी 6 से 14 वर्ष के गरीब बच्चों को अमीरों के […] Read more » education to poor students गरीब बच्चों को शिक्षा
समाज राष्ट्रपिता बनाम ढोंगी बूढा ! April 13, 2012 / July 22, 2012 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment एल.आर.गाँधी पांचवी कक्षा की ऐश्वर्या पराशर के एक दक्ष प्रशन ने समूची सरकार को असमंजस में डाल दिया ! गाँधी जी को राष्ट्रपिता बता कर उनके नाम पर अपनी राजनैतिक रोटियाँ सेकने वाले सफेदपोश काले अंग्रेज़ और खुद को बापू के वारिस बता कर छह दशकों से भारत पर राज करने वाले ‘नकली गाँधी’ भी […] Read more » Mahatma Gandhi महात्मा गांधी राष्ट्रपिता
समाज ‘अध्यात्मवाद’ की आंधी और बेकाबू भ्रष्टाचार April 12, 2012 / July 22, 2012 by निर्मल रानी | 2 Comments on ‘अध्यात्मवाद’ की आंधी और बेकाबू भ्रष्टाचार निर्मल रानी वैज्ञानिकों ने वैसे तो विज्ञान, तकनीक तथा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इसी उद्देश्य को लेकर तमाम उपलब्धियां हासिल की हैं ताकि मानव जाति का विकास हो तथा उसका ज्ञानवर्धन हो सके। टेलीविज़न भी इन्हीं अविष्कारों में से एक है जिसका मकसद विश्वस्तर पर सूचना का आदान-प्रदान करना,ज्ञानवर्धक कार्यक्र म प्रसारित करना,लोगों को […] Read more » ‘अध्यात्मवाद’ Corruption भ्रष्टाचार
समाज संबंध और स्वार्थ April 12, 2012 / April 12, 2012 by शशांक शेखर | Leave a Comment शशांक शेखर मानवता में संबंधो के विशेष असर हुआ है। एक- दूसरे को आपस में जोड़ने में संबंध ने व्यापक पृष्ठभूमि तैयार की है। वहीं यह भी एक कटु सत्य है कि संबंधों के जुड़ाव में स्वार्थ की भूमिका कभी सामने तो कभी परदे के पीछे रहती है। सबसे मधुर संबंध मां का अपने बच्चों […] Read more » relations संबंध स्वार्थ
समाज गरीबी व भुखमरी के बीच विकास की एक्सप्रेस रेल April 11, 2012 / July 22, 2012 by अखिलेश आर्येन्दु | Leave a Comment अखिलेश आर्येन्दु संयुक्त राष्ट्रसंघ ने भारत में बढ़ती भुखमरी और गरीबी की पुष्टिकर केंद्र सरकार के उस दावे की पोल खोल दी है जिसमें विकास की रफ्तार बढ़ने की बात कही गर्इ है। संयुक्त राष्ट्रसंघ की रपट से केंद्र सरकार के दावे खोखले साबित होते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि केंद्र सरकार […] Read more » poverty starvation गरीबी भुखमरी
समाज सबसे घटिया तरीका है बच्चों को शारीरिक दंड से उन्हें सुधारना April 1, 2012 / July 22, 2012 by अखिलेश आर्येन्दु | Leave a Comment अखिलेश आर्येन्दु पिछले दिनों कर्इ प्रदेशो में बच्चों और शिक्षकों से ताल्लुक रखने वाली तमाम चौकाने वाली खबरों से मीडिया जगत में एक हलचल जैसी स्थिति देखने को मिली। कहीं शिक्षक या शिक्षिका ने बच्चों को इतना पीटा की बच्चें बिकलांग या उनकी मौत हो गर्इ। कुछ मामलों में बच्चों ने अपने शिक्षक या शिक्षिका […] Read more » corporal punishment शारीरिक दंड
समाज पुलिस को मानवतावादी बनाने की जरूरत March 31, 2012 / July 22, 2012 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on पुलिस को मानवतावादी बनाने की जरूरत प्रमोद भार्गव उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद व्यवस्था परिवर्तन के संकेत मिलने लगे हैं। इसी सिलसिले में प्रदेश के कुछ बड़े शहरों में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने की तैयारी की जाने लगी है लेकिन क्या पदों में नाम तब्दीली से बदलाव आ जाएगा ? दरअसल पुलिस में आमूलचूल परिवर्तन के लिए बुनियादी […] Read more » police and humanity पुलिस
चिंतन समाज संस्कारहीनता ही है सब समस्याओं की जड़ March 30, 2012 / April 11, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 5 Comments on संस्कारहीनता ही है सब समस्याओं की जड़ – डॉ. दीपक आचार्य समाज में आज सब कुछ दिखाई देता है लेकिन जो नहीं दीख पा रहे हैं वे हैं- संस्कार हैं। इन्हीं की कमी से व्यक्ति व समुदाय से लेकर परिवेश और राष्ट्र तक में समस्याओं, कुटिलताओं, विदु्रपताओं और क्षुद्र ऐषणाओं के कई-कई मोहपाश अपना शिकंजा कसते जा रहे हैं। संस्कारहीनता ही वह […] Read more » cutural rite संस्कार
समाज राजोआना से एक अंत क्यों, शुरुआत भी हो सकती है ! March 30, 2012 / March 30, 2012 by जगमोहन फुटेला | 1 Comment on राजोआना से एक अंत क्यों, शुरुआत भी हो सकती है ! जगमोहन फुटेला खुद बलवंत सिंह राजोआना मानता है कि वो तब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह का हत्यारा है. उसे फांसी से माफ़ी भी नहीं चाहिए. बल्कि उसका कहना है कि उस के लिए माफ़ी मांगने वाले उसकी सोच का अपमान कर रहे हैं तो आज पालिटीशियनों को उसके लिए माफ़ी क्यों चाहिए? ऊपर […] Read more » hang till death to balwant Singh rajoana बलवंत सिंह राजोआना
समाज क्या लिव इन रिलेशनशिप की यही परिणिति है ? March 28, 2012 by विनायक शर्मा | 6 Comments on क्या लिव इन रिलेशनशिप की यही परिणिति है ? विनायक शर्मा दिल्ली में कुछ दिनों पूर्व आठ टुकड़ो में मिली महिला के सिर विहीन शव की गुत्थी को सुलझा लेने का दावा करते हुए पुलिस का कहना है कि मृतक पूजा के प्रेमी योगेश जो उसके साथ विगत चार वर्षों से लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहा था, ने ही मृतक महिला से पीछा छुड़ाने के […] Read more » legality of live in relationship Live in relationship लिव इन रिलेशनशिप
महत्वपूर्ण लेख समाज कहाँ जा रहा है लोकतंत्र: सुप्रीम कोर्ट के भरोसे चल रहा है देश March 28, 2012 / July 22, 2012 by भार्गव चन्दोला | 2 Comments on कहाँ जा रहा है लोकतंत्र: सुप्रीम कोर्ट के भरोसे चल रहा है देश भार्गव चन्दोला क्या हो गया है लोकतंत्र को जब राजनीतिक पार्टियों का अपने नेताओं अपने कार्यकर्ताओं पर ही विश्वाश नहीं हैं तो वो जनता के विश्वाश पर कैसे खडे उत्तरेंगे ? बी.जे.पी. ने अपने उत्तराखंड के सभी विधायक उज्जैन में एकत्रित कर रखे थे और सभी विधायकों के मोबाइल भी ले रखे थे ताकि वो […] Read more » democracy and Supreme Court लोकतंत्र सुप्रीम कोर्ट