शख्सियत समाज सोनी सोरी एक हार्डकोर नक्सली August 8, 2012 by आशीष महर्षि | Leave a Comment सोनी सोरी आपके लिए कोई नया नाम नहीं होगा। वह आपके लिए नक्सली होगी। सरकार के लिए भी वह एक हार्डकोर नक्सली है। लेकिन मेरे जैसे लाखों लोगों के लिए वह एक पीडि़त महिला है, जिसे आदिवासी होने की सजा मिल रही है। वह भी उस राज्य की आदिवासी, जहां भाजपा सरकार है। सोनी सोरी […] Read more » एक हार्डकोर नक्सली सोनी सोरी सोनी सोरी एक हार्डकोर नक्सली
समाज क्या है महिला सशक्तिकरण? August 5, 2012 / August 5, 2012 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment महिला सशक्तिकरण की बात समाज में रह रहकर उठती रही है। महिला सशक्तिकरण का अर्थ कुछ इस प्रकार लगाया जाता है कि जैसे महिलाओं को किसी वर्ग विशेषकर पुरूष वर्ग का सामना करने के लिए सुदृढ किया जा रहा है। भारतीय समाज में प्राचीनकाल से ही नारी को पुरूष के समान अधिकार प्रदान किये गये […] Read more » what is women empowerment? women empowerment महिला सशक्तिकरण
समाज परदा August 4, 2012 by पियूष द्विवेदी 'भारत' | Leave a Comment पियूष द्विवेदी ‘भारत’ ‘परदे में रहने दो, परदा न हटाओ’, ‘परदा है परदा, परदे के पीछे पर्दानशी है’ ये तथा ऐसे ही और भी तमाम गाने हमारी हिंदी सिनेमा में आये और लोगों की जुबां पर अमर हो गए! इन गानों की सबसे बड़ी खासियत इनमे मौजूद शब्द ‘परदा’ है! ‘परदा’ नाम आते ही प्रायः […] Read more » परदा
समाज स्त्रियों का आदर करें August 3, 2012 / August 3, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 2 Comments on स्त्रियों का आदर करें डॉ. दीपक आचार्य आधे आसमाँ को दें पूरा सम्मान स्त्रियों का आदर करें मनुष्य के जीवन में सफलता के लिए पुरुष और प्रकृति का पारस्परिक सहयोग, सहकार और समन्वय सर्वाधिक जरूरी कारक है जिसके बगैर सृष्टि में समत्व, आनंद और शाश्वत संतोष की कल्पना कदापि नहीं की जा सकती है। सृष्टि में हर वस्तु या […] Read more » pay respect to women स्त्रियों का आदर करें
समाज घटते सामाजिक मूल्यों के जिम्मेदार हम तो नही? August 3, 2012 / August 3, 2012 by रामस्वरूप रावतसरे | 1 Comment on घटते सामाजिक मूल्यों के जिम्मेदार हम तो नही? रामस्वरूप रावतसरे हमारा संस्कार युक्त भारतीय समाज अपराधवृति प्रकार हो गया है । जिस किसी की भी बात सुनों वह अपराध की ही बात करेगा। जिस किसी भी पत्र पत्रिका या टीवी चैनल को देखों, उसमें भी सबसे पहले अपराध युक्त समाचारों का ही बोल बाला मिलेगा । एक अनुमान के अनुसार देश में प्रति […] Read more » declining social values घटते सामाजिक मूल्यों
समाज रोको: किस ओर जा रहा है आदमी August 3, 2012 / August 4, 2012 by राकेश कुमार आर्य | 2 Comments on रोको: किस ओर जा रहा है आदमी राकेश कुमार आर्या अलीगढ़ के डॉ. नजमुद्दीन अंसारी और उनके कुछ जागरूक मुस्लिम साथियों ने देश में गोवध और दुधारू पशुओं को काटकर विदेशों में मांस भेजने और बेचने पर गहरी चिंता प्रकट की है। उन लोगों ने मानवता और प्राणीमात्र के हित में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाकर भारत सरकार को सावधान किया है। उनका […] Read more » animal slaughter
समाज असम : दंगों की वजह घुसपैठ August 2, 2012 / August 2, 2012 by प्रमोद भार्गव | 2 Comments on असम : दंगों की वजह घुसपैठ प्रमोद भार्गव असम में बड़े पैमाने पर हुए दंगों की वजह साफ हो रही है। बांग्लादेशी घुसपैठियों ने सीमावर्ती जिलों में आबादी के घनत्व का स्वरुप तो बदला ही, उनकी बढ़ती आबादी अब मूल निवासी, बोडो आदिवासियों को अपने मूल निवास स्थलों से बेदखल करने पर भी आमादा हो गर्इ है। लिहाजा दंगों की पृष्ठभूमि […] Read more » riots in assam असम : दंगों की वजह घुसपैठ
समाज नक्सलों और आदिवासियों में फर्क कीजिए August 2, 2012 / August 2, 2012 by प्रभात कुमार रॉय | Leave a Comment प्रभात कुमार रॉय नक्सलवाद अथवा माओवाद के विषय में प्रायः कोई राष्ट्रीय विचार विमर्श तभी होता है, जबकि कोई भयानक खूंरेज घटना अंजाम दे दी जाती है, अन्यथा इस ज्वलंत राष्ट्रीय प्रश्न पर प्रायः उदासीनता और खामोशी व्याप्त रहती है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर इलाके में 28/29 जून 2012 के रात्रिकाल में सीआरपीएफ और माओवादियों के […] Read more » difference between adiwasi and naxals नक्सलों और आदिवासियों में फर्क कीजिए
समाज रिटायरमेंट के बाद August 2, 2012 / August 1, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 1 Comment on रिटायरमेंट के बाद रिटायरमेंट के बाद ही होता है नौकरशाहों का असली मूल्यांकन डॉ. दीपक आचार्य समूची व्यवस्था में तरह-तरह के बाड़े हैं जिनमें घुसे हुए लोग कभी पांच साला जिन्दगी जीने के बाद बाहर कर दिए जाते हैं कभी इनकी विलासिता आयु इन प्राणियों के कर्म और व्यवहार को देख कर बढ़ती है, कभी शून्य में खो […] Read more » life after retirement
समाज एक दिन में सिमट आए हैं सारे रिश्ते August 1, 2012 / August 2, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य एक दिन में सिमट आए हैं सारे रिश्ते फिर साल भर पा लो संबंधों से मुक्ति युगों-युगों से ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का उद्घोष करने वाली भारतीय संस्कृति के लिए यह समय कितना दुर्दिनों भरा आ गया है जहाँ आदमी के मन से लेकर पूरे परिवेश तक संवेदनाआंे के लिहाज से शून्य का माहौल […] Read more »
समाज तरुण गोगोई बताएं कि ये अस्थायी दंगे क्या होते है ?? July 30, 2012 / July 30, 2012 by प्रवीण गुगनानी | 1 Comment on तरुण गोगोई बताएं कि ये अस्थायी दंगे क्या होते है ?? प्रवीण गुगनानी, क्यों सो रहा है तथाकथित बुद्धिजीवी मीडिया और प्रगतिशील अगड़ा समाज ?? असम में चल रहे दंगो की भयावहता पूरे देश के सामने आ चुकी है और असम प्रदेश सरकार और केन्द्र की सप्रंग सरकार की इन दंगो को रोकने और पीडितों के प्रति पूर्वाग्रही और असंवेदनशील आचरण भी अपने नग्नतम रूप में […] Read more » voilence in assam अस्थायी दंगे
समाज समाज को दूषित करती इनकी कामुक मानसिकता July 26, 2012 / July 26, 2012 by अनुशिखा त्रिपाठी | 5 Comments on समाज को दूषित करती इनकी कामुक मानसिकता इन दिनों रंगीन बुद्धू बक्से पर सन्नी लियोन, शर्लिन चोपड़ा, पूनम पाण्डेय, कविता राधेश्याम जैसी महिलाओं का बोलबाला है| शर्लिन जहां पुरुषों की उत्तेजक पत्रिका प्लेबॉय के कवर पृष्ठ पर अपनी नंगी तस्वीरों से प्रसिद्धि बटोरने में लगी हैं, वहीं कविता राधेश्याम कभी पेटा के लिए अर्धनग्न भाव-भंगिमाओं में उत्तेजक पोज देती नजर आती हैं […] Read more » sherlin chopra sunny leoni कविता राधेश्याम कामुक मानसिकता पूनम पाण्डेय शर्लिन चोपड़ा सन्नी लियोन