पियूष द्विवेदी 'भारत'

लेखक मूलतः उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के निवासी हैं। वर्तमान में स्नातक के छात्र होने के साथ अख़बारों, पत्रिकाओं और वेबसाइट्स आदि के लिए स्वतंत्र लेखन कार्य भी करते हैं। इनका मानना है कि मंच महत्वपूर्ण नहीं होता, महत्वपूर्ण होते हैं विचार और वो विचार ही मंच को महत्वपूर्ण बनाते हैं।

मुझे भी गालियाँ पड़ती हैं, पर मै आपकी तरह सार्वजनिक रुदन नहीं करता, रवीश कुमार!

मेरी ही तरह और भी तमाम लेखक मित्रों को ये सब सुनना पड़ता होगा, लेकिन उन्हें भी कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन ऐसी ही प्रतिक्रियाओं से रवीश का जीना मुश्किल हो गया है, तो इसका क्या मतलब समझा जाय ? या तो ये कि उनकी निर्भीकता की सब बातें हवाई हैं अथवा ये कि वे डरने का बहुत अच्छा अभिनय कर रहे हैं। बिलकुल वैसा ही ‘अच्छा अभिनय’ जैसा रवीश की रिपोर्ट में करते थे। सच क्या है, रवीश ही जानें। हाँ, सोए हुए को जगाया जा सकता है, सोने का अभिनय करने वाले को नहीं। पत्रकारिता के छात्रों से भी कहना चाहूँगा कि चयन का अधिकार आपको है, लेकिन अपना पत्रकारीय आदर्श चुनने से पहले महान निर्भीक पत्रकारों की विरासत और अपने वर्तमान चयन की तुलना कर लीजिएगा।