सार्थक पहल

सार्थक पहल, sarthak pahal, new initiative

कुछ कर गुजरने के जूनुन ने पहुंचाया जया को इस मुकाम तक

जया देवी का सराधी गांव  हर साल सूखे के कारण फसलों के बर्बाद होने से परेशान रहता था। ऐसे में जया देवी ने इस समस्या का तोड़ निकालने का फैसला लिया और एक दिन वो एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी  के गवर्निंग सदस्य किशोर जायसवाल  से मिलीं। उन्होने जया को सूखे का कारण और बारिश के पानी को कैसे बचाया जाये? इसके बारे में बताया। किशोर जायसवाल ने उनको बंजर जमीन  पर पेड़ लगाने के लिए कहा।

 पर्यावरण से छेड़छाड़ के बिना ही मिलने लगा भरपूर पानी

“जब मैं छोटा था बहुत बारिश और बर्फ होती थी। मई के अंत तक पहाड़ बिल्कुल सफेद रहते थे। लेकिन अब बर्फ बहुत ही कम हो गए हैं। सफेद की जगह हरे नजर आते हैं। क्योंकि बारिश ज्यादा होने लगी है”। ये वाक्य है लद्दाख के फ्यांग गांव में रहने वाले 80 वर्षीय टुंडुप वांगाईल का। इसी गांव के 51 वर्षीय रींचेन वांगड़ूज़ बताते हैं कि “साल दर साल वाहनो से निकलने वाले धुंए के कारण वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे है”।

भारत में एक फादर टेरेसा भी है

आज सेवाधाम के 500 आवासी सीमेंट के पक्के भवनों में रहते हैं। सबके लिए साफ-सुथरे बिस्तर और पलंग लगे हुए हैं। सबको उत्तम भोजन मिलता है। अपंग बच्चों के लिए विशेष इलाज और कसरत का प्रबंध है। अब इस सेवाधाम को मांगे बिना ही करोड़ों रु. दान में मिलते हैं। मुंबई के गिरीश शाह और जयेश भाई का विशेष योगदान है। कश्मीर से केरल तक के लोग यहां हैं। यहां जाति और मजहब का कोई बंधन नहीं है।

अनोखा मदरसा ‘मुईन उल इस्लाम’ में सद्भावना का पाठ

आगरा देवरैठा का मदरसा हिंदू-मुस्लिम एकता की किसी मिसाल से कम नहीं है। यहां धर्म की दीवार तोड़ बच्चे उर्दू और संस्कृत दोनों विषयों की शिक्षा एकसाथ गृहण कर रहे हैं। मुस्लिम बच्चे संस्कृत के श्लोकों का उच्चारण जबकि हिंदू बच्चे कुरान की आयतें पढ़ते हैं। शिक्षक हों या बच्चे, सभी कहते हैं, मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। कक्षा आठ की छात्रा निशा खान के मुंह से गायत्री मंत्र का उच्चारण सुन लगेगा मानो इस बच्ची की जुबां पर स्वयं सरस्वती मां विराजमान हो गई हैं। मासूम से चेहरे पर न तो किसी धर्म की परछाई दिखाई पढ़ती है और न ही किसी प्रकार का धार्मिक भेदभाव। कक्षा सात के छात्र ऋषभ उर्दू सीखता है और कुरान की आयतें भी पढ़ता है।

हाजी अली दरगाह दिखाए रास्ता

1931 में दरगाह ट्रस्ट को 171 वर्ग मीटर जगह मस्जिद के लिए दी गई थी लेकिन प्रबंधकों ने 908 वर्ग मीटर जगह घेर ली। मुंबई की नगर निगम ने मुकदमा चलाया तो मुंबई उच्च न्यायालय ने मस्जिद और दुकानों को सारे इलाके से हटाने के आदेश जारी कर दिए लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसे संकेत दिए कि यदि सारे अवैध कब्जे को ट्रस्ट हटा ले तो मस्जिद बच सकती है। ट्रस्ट ने आगे होकर कहा कि वह 737 वर्ग मीटर जमीन पर बने सारे अवैध निर्माणों को खुद खत्म करेगा।

बदलनी शुरु हो गई आगरा में यमुना की तस्बीर

यमुना निर्मलीकरण से सम्बन्धित समिति के दिनांक 06.08.2009 के आवेदनपत्र पर तत्कालीन आयुक्त महोदया माननीया राधा एस. चैहान की अध्यक्षता में दिनांक 17.08.2009 को आयुक्त सभागार में एक बैठक भी आहूत हो चुकी है। इसके कुछ विन्दुओं पर कुछ कार्यवाही भी हुई थी और कई अभी भी लम्बित पड़े हैं। इस कार्य के सम्पन्न होने पर जहां भारत की स्वच्छता व हरीतिमा का पुनः दर्शन सुगम हो सकेगा वहीं आगरा शहर एक हेरिटेज सिटी की ओर भी बढ़ सकेगा।

यमुना का प्रदूषण और उमा भारती के प्रयास

उमा भारती के अनुसार उन्होंने यमुना के लिए जो प्लान किया है उसमे दिल्ली से गंदा पानी अब मथुरा में नहीं आ पायेगा। नमामि गंगे प्रोजेक्ट में दिल्ली से आने वाला गंदा पानी ट्रीट होकर मथुरा की यमुना नदी में शुद्ध होकर आयेगा। जिसके लिए दिल्ली में भी कई प्रोजेक्ट्स को पहले ही लांच किया जा चुका है। इसके अलावा उमा भारती ने दिल्ली में यमुना को हाइब्रिड एन्यूटी पर ले जाकर पूरी की पूरी यमुना और उसके घाटों को ठीक करने की बात कही है। अगले चरण में आगरा की यमुना नदी को भी इस योजना का हिस्सा बनाने की बात की गयी है।’’ अब आगे देखने वाली बात होगी कि केंद्रीय मंत्री उमा भारती यमुना का कितना जीर्णोद्धार या कायाकल्प कर पाती हैं।