विज्ञान

वैज्ञानिकों के चमत्कार को नमस्कार

अब आज जब हम अपने आधुनिक विश्व के वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष की खोज करते हुए देखते हैं, हम यह भी देखते हैं कि आज के वैज्ञानिक कैसे नये-नये अंतरिक्षीय रहस्यों से पर्दा उठाते जा रहे हैं, तो हमें उन पर आश्चर्य होता है। वास्तव में यह आश्चर्य करने की बात नहीं होनी चाहिए, अपितु हमें अपने आप पर गर्व होना चाहिए कि आज का विज्ञान जितना ही अंतरिक्षीय रहस्यों को उद्घाटित करता जा रहा है-वह उतना ही अधिक हमारे साक्षात्धर्मा ऋषियों के उत्कृष्टतम चिंतन को नमन करता जा रहा है।

विश्वास का जीव विज्ञान

नवीन जीव विज्ञान (New Biology) दिखलाता है कि डीएनए जीव विज्ञान का नियन्त्रण नहीं करता. बल्कि डीएनए ही कोशा के बाहर से आनेवाले संकेतों, से नियन्त्रित होता हैं। इन पर्यावरणीय सकेतों में हमारे सकात्मक और ऋणात्मक विचार भी शामिल हैं। कोशा विज्ञान एवम् क्वाण्टम भौतिकी में डॉ लिपटन के नवीनतम एवम् सर्वोत्तम अनुसंधान स्थापित करते हैं कि हम अपने सोचने के तरीके को पुनः प्रशिक्षित करके अपने शरीरों को बदल सकते हैं।

नासा के पृथ्वी लोक

नासा के ये प्रमाणिक पृथ्वीलोक निःसंदेह हमारी भारतीय वैदिक संस्कृति में उल्लिखित अनेक लोकों यथा सत्यलोक या ब्रह्मलोक, तपो लोक, भृगु लोक, स्वर्ग लोक, इंद्र लोक, ध्रुव लोक, सप्तऋषि लोक, जन लोक या महर लोक, भूलोक, कर्मलोक, भुवर लोक, पाताल लोक आदि की पुष्टि करते हैं। नासा के पृथ्वीलोक इस उक्ति का कहीं न कहीं समर्थन सा करते प्रतीत होते हैं कि कल्पनाओं की उड़ानों में पंख यथार्थ के ही होते हैं।

विश्वविख्यात वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को भारत के वास्तु वैज्ञानिक राजकुमार झांझरी की चुनौती

विश्वविख्यात वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को भारत के वास्तु वैज्ञानिक राजकुमार झांझरी की चुनौती ‘दी गार्डियन’…

टेक्सास में हुई अद्भुत भ्रूण शल्यक्रिया का विश्लेषण

देखा जाए तो अतिप्राचीन युग में भी भारत की चिकित्सा प्रणाली का उद्देश्य वृहत रुप से व्यापक और सर्वज्ञान पद्धति से परिपूर्ण था। ‘चरक संहिता’ सिर्फ भारत में ही नहीं, अपितु विदेशों में भी इसका अध्ययन किया जा रहा है। इसी आधार पर आज भी पाश्चात्य चिकित्सक इस बात को सार्वजनिकतौर पर बोलने से भले ही कतराते हों, परन्तु आंतरिकरुप से स्वीकार करते हैं कि चरक-सुश्रुत के काल में भारतीय चिकित्सा विज्ञान आधुनिक पश्चिमी चिकित्सा विज्ञान से कहीं अधिक आगे था।