महिला-जगत समाज हमारा समाज पुरूष प्रधान नही वरन महिला प्रधान April 19, 2017 / April 19, 2017 by हरीश शर्मा | 1 Comment on हमारा समाज पुरूष प्रधान नही वरन महिला प्रधान भारतीय परिदृष्य में यदि बात की जाए तो यह कहा जाता है कि हमारा समाज पूरूष प्रधान है , परंतु यह कहना अर्धसत्य जैसा ही होगा क्योकि वह समाज पूरूष प्रधान केसे हो सकता है जहाॅ पुरूषों की उत्पत्ति का आधार ही महिलाए है। बल्कि यदि यह कहा जाए तो गलत नही होगा कि हमारा समाज पुरूष प्रधान नही वरन महिला प्रधान है वर्तमान परिवेष में जब महिलाओं का समान अधिकार देने व उन्हे आगे बढाने की बाते जोर पकड रही है तो यह ध्यान रखना होगा कि इस प्रकार की बाते सिर्फ मंचो से लोगों की तालिया बटोरने भर के लिए नहीं कही जाए वरन दोहरे व्यक्तित्व को छोडकर राजनैतिक पूरोधाओं को भी नारी शक्ति के अस्तित्व को न सिर्फ मंचो से बल्कि वास्तविक जीवन मे भी सत्यता से स्वीकार व अंगीकार करना होगा। Read more » Featured महिला प्रधान समाज महिलाओं का सम्मान हमारा समाज पुरूष प्रधान हमारा समाज महिला प्रधान
महिला-जगत समाज नारी मुक्ति की यन्त्रणा April 17, 2017 by गंगानन्द झा | Leave a Comment औद्योगिक समाज में पुरुष और नारी के बीच का समीकरण बदला। औरत और मर्द के बीच समानता की अवधारणा उभड़ी। लिंग आधारित श्रम-विभाजन की अवधारणा पर सवाल उठने लगे। और नारी पुरुष का सम्पर्क पूरक होने के बजाय योगात्मक होने लग गया। स्त्रियों का कर्मक्षेत्र घर की चाहरदीवारी से बाहर भी प्रतिष्ठित हुआ और पारस्परिक निर्भरशीलता की बाध्यता में कमी आई। औरतों के हाथ में आर्थिक क्षमता आने के साथ परम्परा से सम्मानित पितृसत्ता में दरारें पड़ने लगीं। Read more » Featured नारी मुक्ति
महिला-जगत समाज अनचाही बेटियाँ March 8, 2017 by जावेद अनीस | Leave a Comment समाज में लिंग अनुपात संतुलन लगातार बिगड़ रहा है. वर्ष 1961 से लेकर 2011 तक की जनगणना पर नजर डालें तो यह बात साफ तौर पर उभर कर सामने आती है कि 0-6 वर्ष आयु समूह के बाल लिंगानुपात में 1961 से लगातार गिरावट हुई है पिछले 50 सालों में बाल लिंगानुपात में 63 पाइन्ट की गिरावट दर्ज की गयी है. लेकिन पिछले दशक के दौरान इसमें सांसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गयी है Read more » Featured unwanted daughters अनचाही बेटियाँ भ्रूणलिंग जांच समाज में घटती महिलाओं की घटती संख्या
महिला-जगत समाज माँ, ममता और महिला March 8, 2017 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:’ की आध्यात्मिक ताक़त वाला राष्ट्र जिसकी रगों में नारी का सम्मान बसा हुआ है, किंतु दुर्भाग्य इस कलयुगी पौध का जो यौवन के मदमास में अपने गौरवशाली इतिहास की किताबो को कालिख पोतते हुए अपमान के नए अंगवस्त्र तैयार कर रही है, वो भूल गई 'यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्रफला: क्रिया’ अर्थात जिन घरों में स्त्रियों का अपमान होता है, वहां सभी प्रकार की पूजा करने के बाद भी भगवान निवास नहीं करते हैं। Read more » Featured अंतराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास ममता महिला मां
महिला-जगत समाज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस March 8, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | Leave a Comment माता का हमेशा सम्मान हो मां अर्थात माता के रूप में नारी, धरती पर अपने सबसे पवित्रतम रूप में है। माता यानी जननी। मां को ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है, क्योंकि ईश्वर की जन्मदात्री भी नारी ही रही है। मां देवकी (कृष्ण) तथा मां पार्वती (गणपति/ कार्तिकेय) के संदर्भ में हम देख सकते हैं इसे। किंतु बदलते समय के हिसाब से संतानों ने अपनी मां को महत्व देना कम कर दिया है। यह चिंताजनक पहलू है। Read more » Featured International Women Day अंतराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस अरुणा आसफ अली इला भट्ट देवी अहिल्याबाई होलकर मदर टेरेसा महादेवी वर्मा राजकुमारी अमृत कौर सुचेता कृपलानी और कस्तूरबा गांधी
महिला-जगत विविधा कौन कहता है कि तुलसी की नारी है ताडऩ की अधिकारी March 8, 2017 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च पर विदेश राकेश कुमार आर्य तुलसी के राम बाल्मीकि के राम से कई रूपों में भिन्न हैं। ऐसा प्रक्षेपों के कारण तो हुआ ही है साथ ही अर्थ का अनर्थ कर देने से भी हुआ है। असंगत अर्थों को और अतार्किक बातों को हमने पत्थर की लकीर मान लिया और […] Read more » Featured अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
महिला-जगत समाज आधी दुनिया के हिस्से को पूरा हक March 7, 2017 by मनोज कुमार | Leave a Comment विश्व महिला दिवस पर 8 मार्च पर विशेष एक अनजाना सा गांव पुलवाही देश ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय फलक पर चमक उठा है. ग्राम फलवानी डिंडोरी जिले के मेहदवानी विकासखंड में आता है. भौगोलिक रूप से यह गांव, विकासखंड और जिला मध्यप्रदेश में है लेकिन इस पर कभी मध्यप्रदेश का अविभाज्य अंग रहे छत्तीसगढ़ की […] Read more » 8 मार्च Featured महिला सशक्तिकरण विश्व महिला दिवस
महिला-जगत समाज मातृशक्ति को अपने अधिकारों और शक्ति को पहचानने की जरुरत March 6, 2017 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment आज जरूरत है कि समाज में महिलाओं को अज्ञानता, अशिक्षा, कूपमंण्डुकता, संकुचित विचारों और रूढिवादी भावनाओं के गर्त से निकालकर प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए उसे आधुनिक घटनाओं, ऐतहासिक गरिमामयी जानकारी और जातीय क्रियाकलापों से अवगत कराने के लिए उसमे आर्थिक ,सामजिक, शैक्षिक, राजनैतिक चेतना पैदा करने की। जिससे की नारी पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर समाज को आगे बढाने में सहयोग कर सके। Read more » 08 मार्च Featured अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस 08 मार्च मातृशक्ति
महिला-जगत समाज नारी अस्तित्व एवं अस्मिता पर धुंधलके क्यों? March 3, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- सम्पूर्ण विश्व में नारी के प्रति सम्मान एवं प्रशंसा प्रकट करते हुए 8 मार्च का दिन उनकी सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में, उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन से पहले और बाद में हफ्ते भर तक विचार विमर्श और गोष्ठियां होंगी जिनमें महिलाओं से जुड़े मामलों जैसे […] Read more » Featured नारी अस्तित्व नारी अस्तित्व एवं अस्मिता नारी अस्मिता नारी की अवमानना
महिला-जगत विविधा आत्मनिर्भर महिलाओं की नई दुनिया February 22, 2017 by मनोज कुमार | Leave a Comment महिलाएं आत्मनिर्भर कैसे होती हैं? इसका जीता-जागता मिसाल देखना है तो आपको छत्तीसगढ़ आना पड़ेगा. एक नगर, एक कस्बा या एक गांव में एक आत्मनिर्भर महिला की संख्या आप अंगुलियों पर नहीं गिन पाएंगे. कहीं पूरा का पूरा गांव महिलाओं के आत्मनिर्भरता की पहचान बन गया है तो कहीं समूह आत्मनिर्भर है. कुछ ऐसी जगह […] Read more » Featured महिलाएं आत्मनिर्भर
महिला-जगत समाज नारी तुम केवल श्रद्धा हो…? February 1, 2017 by अनिल अनूप | Leave a Comment -अनिल अनूप नारी के सम्बन्ध में मनु का कथन ”पितारक्षति कौमारे……….न स्त्री स्वातंन्न्यम् अर्हति।” वहीं पर उनका कथन ”यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता”, भी दृष्टव्य है वस्तुतः यह समस्या प्राचीनकाल से रही है। इसमें धर्म, संस्कृति साहित्य, परम्परा, रीतिरिवाज और शास्त्र को कारण माना गया है। भारतीय दृष्टि से इस पर विचार करने की […] Read more » नारी
महिला-जगत समाज क्यों न स्त्री होने का उत्सव मनाया जाए December 18, 2016 by डॉ नीलम महेन्द्रा | Leave a Comment स्त्री ईश्वर की एक खूबसूरत कलाकृति ! यूँ तो समस्त संसार एवं प्रकृति ईश्वर की बेहतरीन रचना है किन्तु स्त्री उसकी अनूठी रचना है , उसके दिल के बेहद करीब । इसीलिए तो उसने उसे उन शक्तियों से लैस करके इस धरती पर भेजा जो स्वयं उसके पास हैं मसलन प्रेम एवं ममता से भरा ह्दय , सहनशीलता एवं धैर्य से भरपूर व्यक्तित्व ,क्षमा करने वाला ह्रदय , बाहर से फूल सी कोमल किन्तु भीतर से चट्टान सी इच्छाशक्ति से परिपूर्ण और सबसे महत्वपूर्ण , वह शक्ति जो एक महिला को ईश्वर ने दी है , वह है उसकी सृजन शक्ति । Read more » Featured lets celebrate for being women स्त्री स्त्री होने का उत्सव