महिला-जगत पर आखिर पुरूष हैं कहां December 30, 2010 / December 18, 2011 by राखी रघुवंशी | Leave a Comment राखी रघुवंशी प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से महिलाओं पर हिंसा पुरूषों की सुविधाओं को बरकरार रखने का असरदार हथियार है। हमने यह देखा है कि महज़ हिंसा की धमकी औरतों को चुप्पी साधने या फिर सब बातों को मानने के लिए बाध्य कर देती है। और फिर हिंसा का शिकार हुई औरत इस हिंसा का […] Read more » Woman Torture महिलाओं पर हिंसा
महिला-जगत मित्रता का स्त्रीवादी मर्म December 6, 2010 / December 19, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment -विजया सिंह समस्त मानवीय संबंधों में मित्रता सबसे महत् संबंध है। यह साथ, साहचर्य, सहयोग, पारस्परिकता एवं स्वतंत्रता पर आधारित विशुध्द रूप से सकारात्मक संबंध है। जीवन की अनेकानेक पूर्णताओं के बावजूद मित्रहीन जीवन स्वीकार्य नहीं होता। स्वतंत्रता का विवेक, निजी व अन्य की अस्मिता का सहज, स्वाभाविक स्वीकार मित्रता के स्वरूप को प्रगाढ़ बनाते […] Read more » Friends मित्रता
महिला-जगत के बी सी से एक करोड़ की ‘राहत तसलीम’ किया जाना November 26, 2010 / December 19, 2011 by निर्मल रानी | 1 Comment on के बी सी से एक करोड़ की ‘राहत तसलीम’ किया जाना -निर्मल रानी भारत में समय समय पर कराए जाने वाले राष्ट्रीय स्तर के सर्वेक्षण प्राय:हमें यह आंकड़े देते हैं कि हमारे देश का मुस्लिम समाज अन्य समुदायों की तुलना में अधिक अशिक्षित है। विशेषकर मुस्लिम समाज की महिलाएं शिक्षा के क्षेत्र में चाहते हुए भी उतनी शिक्षा ग्रहण नहीं कर पातीं जितनी कि अन्य समुदायों […] Read more » Muslim मुसलमान राहत तसलीम
महिला-जगत मायके गई पत्नी को लिखा गया भैरंट लेटर November 6, 2010 / December 20, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on मायके गई पत्नी को लिखा गया भैरंट लेटर लेखक अनुज खरे प्रिय पत्नी जी, सादर प्रणाम। सादर प्रणाम इसलिए कि आपकी दिशा में किए गए मेरे सारे काम सादर एवं साष्टांग अवस्था में ही होते हैं। उपरोक्त तथ्य आपको पता ही है, लेकिन मेरे लिए आश्चर्य दूसरों के लिए सत्य कि यह तथ्य सर्वविदित है। आगे समाचार यह कि तुम्हारे बिना घर सूना-सूना […] Read more » Wife पत्नी
महिला-जगत क्या औरत को माँ बनने के लिए प्रोत्साहन की ज़रूरत है? October 21, 2010 / December 20, 2011 by सुधा सिंह | 5 Comments on क्या औरत को माँ बनने के लिए प्रोत्साहन की ज़रूरत है? -सुधा सिंह यूरोपीय समुदाय स्त्रियों के लिए मातृत्व के अवकाश को बढ़ाने पर विचार कर रहा है। यूरोप में अभी चौदह हफ्ते का मातृत्व अवकाश स्त्रियों को मिला हुआ है। इसे बढ़ाकर इक्कीस हफ्ते करने पर यूरोपीय संसद विचार कर रही है। क्या इसे स्त्री आंदोलनों की सफलता माना जाए? या फिर स्त्री आंदोलनों के […] Read more » Ma माँ
महिला-जगत दलीय राजनीति और महिलाएं October 20, 2010 / December 20, 2011 by राखी रघुवंशी | 4 Comments on दलीय राजनीति और महिलाएं -राखी रघुवंशी दलित महिलाओं की स्थिति पर अक्सर मीडिया का ध्यान तब जाता है जब वे बलात्कार की शिकार होती हैं या उन्हें नग्न, अर्धनग्न करके सड़कों पर घुमाया जाता है। ऐसी शर्मनाक घटनाओं की रिर्पोटिंग के बाद उनका फॉलोअप बहुत ही कम किया जाता है। दरअसल आजादी के छह दशक बाद भी दलित महिलाओं […] Read more » Woman दलित महिला
महिला-जगत भारतीय चिंतन में नारी दृष्टि October 11, 2010 / December 21, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 7 Comments on भारतीय चिंतन में नारी दृष्टि -हृदयनारायण दीक्षित मां सृष्टि की आदि अनादि अनन्य अनुभूति है। प्रत्येक जीव मां का विकास है। मां प्रथमा है। दिव्यतम् और श्रेष्ठतम् अनुभूति है मां। इसलिए सभ्यता विकास के प्रारंभिक चरण में ही मनुष्य को जहां-जहां अनन्य प्रीति मिली, वहां-वहां उसने मां की अनुभूति पाई। जल जीवन का प्राण है। जल नहीं तो जीवन नहीं। […] Read more » Woman नारी
महिला-जगत स्त्री विमर्श और डॉ. लोहिया August 7, 2010 / December 22, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 6 Comments on स्त्री विमर्श और डॉ. लोहिया – डॉ. सुमन सिंह भारतीय सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में जन्में डॉ0 राममनोहर लोहिया अनिश्वरवादी थे। वह हिन्दू होते हुए भी हिन्दू धर्म की मूल-मान्यताओं के कट्टर विरोधी थे। व धर्म को ईश्वर से न जोड़कर, मानव प्राणियों की भलाई के एक साधन के रूप में मानते थे। वे वर्णाश्रम व्यवस्था को भारतीय समाज में कोढ़ मानते […] Read more » Woman नारी राममनोहर लोहिया
परिचर्चा महिला-जगत परिचर्चा : राष्ट्रमंडल खेल और सेक्स August 4, 2010 / April 9, 2014 by संजीव कुमार सिन्हा | 144 Comments on परिचर्चा : राष्ट्रमंडल खेल और सेक्स यह पतन की पराकाष्ठा है। पश्चिमी सभ्यता भारतीय जीवन-मूल्यों को लीलने में जुटा हुआ है। भारतीय खान-पान, वेश-भूषा, भाषा, रहन-सहन, जीवन-दर्शन इन सब पर पाश्चात्य प्रवृति हावी होती जा रही है। हम नकलची होते जा रहे हैं। हम अपना वैशिष्टय भूलते जा रहे हैं। हम स्व-विस्मृति के कगार पर हैं। अच्छी प्रवृतियों की नकल करने […] Read more » Sex राष्ट्रमंडल खेल सेक्स
कविता महिला-जगत स्तनपान बनाम बोतलपान : एक नवजात शिशु की अभियक्ति August 2, 2010 / December 22, 2011 by शालिनी मैथु | 1 Comment on स्तनपान बनाम बोतलपान : एक नवजात शिशु की अभियक्ति हे माँ ! मैं तो नन्हा सा मासूम हूँ . तेरा ही सलोना सा लाल हूँ. मेरी स्नेहिल अनुभूति को समझा है, तूने, आँचल को छुड़ाकर,बोतल दिया है,तूने. यह कैसा है न्याय तेरा, कहती है तो लाल है मेरा. आधुनिकता की दोड़ मैं सिद्ध तूने किया है, स्तनपान के बजाय बोतलपान मेरा आहार है. इस […] Read more » child स्तनपान
महिला-जगत स्त्री अस्मिता और पुरबिया संस्कृति July 28, 2010 / December 23, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 2 Comments on स्त्री अस्मिता और पुरबिया संस्कृति -जगदीश्वर चतुर्वेदी स्त्री अपने शरीर के बारे में समझ बनाने के बाद ही उसे अस्वीकार या खारिज कर सकती है। इसके बाद ही सही रूप में लिख सकती है। पितृसत्ता और लिंगभेदीय संस्कृति की समाप्ति के बारे में लिखकर ही अर्थपूर्ण लेखन कर सकती है। दमन के बिना स्त्री की कल्पनाशीलता कभी खत्म नहीं होती, […] Read more » Female identity स्त्री अस्मिता
महिला-जगत लिंगभेद की ऊहापोह तथा औरत की अस्मिता July 27, 2010 / December 23, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 2 Comments on लिंगभेद की ऊहापोह तथा औरत की अस्मिता -जगदीश्वर चतुर्वेदी स्त्री और पुरूष दो लिंग हैं और दोनों को अलग-अलग ही रहना चाहिए,अपने लिंग के प्रति वफादार होना चाहिए। लिंगों की स्वायत्त पहचान को किसी भी बहाने अस्त-व्यस्त नहीं करना चाहिए। लिंग की स्त्री और पुरूष के रूप में स्वायत्तता का अर्थ यह नहीं है कि स्त्री और पुरूष के बारे में परंपरागत […] Read more » Woman औरत लिंगभेद