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    Homeसाहित्‍यकविताशब्दों के बदलते अर्थ

    शब्दों के बदलते अर्थ

    –विनय कुमार विनायक
    युग-युग से शब्दों के अर्थ
    बदलते/उलटते/पलटते रहे हैं
    प्रजातंत्र के युग में
    याचक का अर्थ दानी होता
    और दानी का अर्थ याचक
    आज याचक प्रजा एकमुश्त
    सर्वाधिकार/मताधिकार दानकर
    किस्त-दर-किस्त कुछ पाने की
    चाह में टकटकी लगाए रहती!
    दानी सर्वस्व पाकर आंखें मूंद लेता!
    आवर्ती दर पर आंखें खोलकर
    पुनः टकटकी लगाता सर्वाधिकार पाने,
    पुनः-पुनः अपना भाग्य आजमाने
    एक की टकटकी लगी की लगी रह जाती
    दूसरे की टकटकी टके में बदल जाती!
    —विनय कुमार विनायक

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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