Home साहित्‍य व्यंग्य चट तलाक –पट ब्याह  

चट तलाक –पट ब्याह  

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जग मोहन ठाकन

अबकी बार तो मुझे पक्का भरोसा है , निशा मौसी का नाम जरूर गिनीज बुक में दर्ज होगा . शाम को तलाक , रात होने से पहले सगाई और दिन निकलते ही फेरे . कमाल है मौसी का भी . शाम को तो लोग- बाग़ फूस –फूस कर रहे थे , अब आगे क्या करेगी मौसी ?  बनी बनाई पटरानी एक झटके में सिंदूर विहीन हो गयी थी . पर यही बात तो  मौसी को औरों से अलग दर्शाती है .मौसी कभी बिना सिंदूर रह सकती है क्या ? पिछले पति का सिंदूर तो ठीक से धुल भी नहीं पाया था, मौसी ने झट नयी सिंदूर दानी मंगाई और सुबह देखो तो नवी –नवेलियों को भी माफ़ कर रही थी . क्या गजब का श्रृंगार

किया था मौसी ने . मांग में ताज़ा कटे बकरे के खून की माफिक सिंदूर दमक रहा था . अब कौन सा बकरा मौसी कब काट दे ये तो खुद बकरे को भी पता नहीं चलता .बकरे की बलि चढ़ाना तो मौसी का सगल भी है और मजबूरी भी .

यूं तो मौसी को भी ध्यान नहीं होगा कि कितने लोगों से गलबहियां की होंगी . हाँ अभी ताज़ा मामला तो यह है कि अपने दूसरे पति को अचानक पैर का अंगूठा दिखाकर तीन बार नहीं बल्कि एक ही बार ऐसा तलाक बोला कि बेचारा लाचार हो चुका बूढा  पति नंबर दो अपने पूर्व पत्नी से जन्मे बच्चों को लेकर चुपचाप चारपाई पर पसर गया . लोग कहते हैं कि अभी तक सदमा कम नहीं हुआ है ,और शायद जल्दी सी होने के आसार भी नहीं लगते . मौसी ने कोई धतूरे की घूटी नहीं चटाई है, बल्कि ऐसा  इंजेक्शन मारा है कि  बूढा कई दिन में आँख खोलेगा , महीनों तक तो दिन रात तारे ही तारे नज़र आयेंगे .

एक अचरज वाली बात यह है कि मौसी ने दोबारा से अपने पूर्व पति नंबर एक से ही निकाह कर लिया . यहाँ सवाल उठता है कि जब पति नंबर एक के साथ ही रहना था तो फिर बूढ़े पति संग क्यों अटखेलियाँ की थी . लोग कहते है ये तो मात्र छलावा था . कुछ लोग यह भी कहते है कि मौसी पटरानी नहीं महा पटरानी बनने  के सपने देखने लगी थी और बुढऊ पति की कमर पर चढ़कर अपना यह सपना सच करना चाहती थी . परन्तु अब मौसी को अपनी गलती का अहसास हो गया था कि  इस बुढऊ के  पल्ले रहकर वह गरीब की जोरू सब की भाभी बन कर रह गयी थी.  मौसी को समझ आ गया कि यदि जोरू ही बनना है तो कम कम से किसी ५६ इंची छाती वाले की तो बने . लोग तो सलाम ठोकेंगे , छोटे मोटे सिपहिया तो तंग नहीं करेंगे . और अब वही हुआ भी . बड़े बड़े वर्दी धारी सलाम ठोकने लगे हैं . मौसी के तो अच्छे दिन आ गए , पर बेचारे  बुढऊ और उसके दूध मुहे बच्चों के तो बुरे दिन सौ फीसदी आयेंगे ही .

मौसी की टक्कर

हरियाणा के एक गाँव में  भी निशा मौसी की तासीर वाली एक मौसी  थी . उसकी  समस्या याह थी अक  मौसी कै साथ जिस किसी के फेरे करवाते वो  गाँव छोड़कर भाग जाता . चार बार इसा ए सूत सधा . ईब गाँव के रांडे मौसी  नै पल्ला उढाण ( विधवा से विवाह ) तैं नाटण लागगे . गाँव की पंचायत होई  , पण्डित बुह्ज्या गया . फैसला होया अक सूण शास्त्र खातिर एक बार मौसी का पल्ला गाँव कै झोटे गेल बांध दो . तीसरे दिन गाँव तैं झोटा नदारद. ईब गाँव मैं समस्या याह आ री सै  अक गाँव आले नया झोटा ल्यावें  सैं  अर तीसरे दिन भाज ज्या सै . नथू का कहना सै अक झोटे की टक्कर ओट्टी जा सकै सै पर मौसी की टक्कर कोन्या उटै .गाँव झोटा विहीन हो ग्या ,मौसी ज्यों की त्यों खुरी करै सै . मामला संगीन लगता है , एक छोटी सी सीबीआई जाँच तो हो ए जाणी चाहिए .

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