सावन पर दोहे

आर के रस्तोगी

सावन में साजन न मिले,मन हो जात है अधीर |
सजनी को साजन मिले,मन हो जात है अमीर ||

सजनी सज धज के निकली,साजन हुआ शिकार |
नयनो से बाण चलत है,तब धनुष बाण  बेकार ||

कोयल कानो में कूक रही,सुना रही है ये गीत |
इस सावन में हो जायेगा,प्रेमी प्रेमिका में प्रीत ||

काले मेघ उमड़ घुमड़ कर,सजनी को खूब डराये |
बिजली चमक दमक कर,सजनी को खूब सताये || 

बैरी बादल बरस रहे है,मोर मचा रहे खूब शोर |
सावन भैया तुम जल्दी आना,हो न सजनी बोर ||

दादुर मोर चकोर सब कर रहे है सावन की बाट |
सावन की शीतलता मिल जाये,हो जायेगे ठाठ ||

आर के रस्तोगी 
गुरुग्राम मो 9971006425

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