सच व झूठ में अन्तर


सच सच ही रहेगा,एक दिन अवश्य आयेगा।
झूठ झूठ ही रहेगा,वह कभी भी न आयेगा।।
झूठ के पैर होते नहीं,वह कभी न चल पायेगा

लगता हैं समय सच को साबित करने के लिए।
झूठ लेता है झूठ का सहारा कदम चलने के लिए।
बोलने पड़ते हैं सौ झूठ,एक झूठ छिपाने के लिए।।

सच को साक्ष्य की जरूरत नहीं खुद ही एक साक्ष्य है।
झूठ ढूंढ़ता फिरता है झूठे साक्ष्य जो झूठे साक्ष्य है।
सच की जीत व झूठ की हार,यह एक सत्य साक्ष्य है।।

होता है सच में कड़वापन,झूठ में सदा मिठासपन।
होता है सच में अपनापन,झूठ में न होता अपनापन।
इसलिए झूठ को ग्रहण करते है, होता है मीठासपन।।

झूठ बोलना पहली बार,होता है बहुत आसान
पर झूठ बोलकर इंसान हो जाता हैं परेशान।
बोलते रहो सच,यही है जिंदगी का फरमान।।

आर के रस्तोगी

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