मानवीय पीड़ाओं में भेदभाव

-विनोद कुमार सर्वोदय-

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अत्यंत खेद का विषय है कि कांग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी जी पर सांप्रदयिकता बढ़ाने व ध्रुवीकरण करने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार समाज में मोदी जी अपने सहायको द्वारा समाज में घृणा फैला कर अल्पसंख्यको को भयभीत करके दबाव बना रहे है।
क्या कोई बताएगा कि जब सोनिया गांधी पर्दे के पीछे से पुरे 10 वर्ष ( 2004 से 2014 तक) केंद्र सरकार की सर्वेसर्वा बनकर बहुसंख्यकों की उपेक्षा करके अल्पसंख्यको को भरपूर लाभान्वित करने के लिए अनेकों प्रपंच रच रही थी, तब क्या अल्पसंख्यको का ध्रुवीकरण व उनकी सांप्रदायिकता के भय व दबाव से देश का मूल बहुसंख्यक समाज पीड़ित होकर हताश व निराश नहीं हो रहा था ?

सोनिया गांधी ने तो देश की राजनीति को ही अल्पसंख्यकों बनाम बहुसंख्यकों को ही आधार बना कर समाज में घृणा व वैमनस्य फैलाने की सारी सीमाएं ही लांघ दी थी। याद करो “साम्प्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक ( 2011)” जिसमें  किसी भी प्रकार के साम्प्रदायिक विवाद होने पर मानवता व न्याय के मूल सिद्धान्तों की उपेक्षा करके असंवैधानिक रूप से देश के बहुसंख्यक समाज को ही अपराधी बना कर बंदी बनाने का प्रावधान किया जा रहा था।
इसके अतिरिक्त उनके कार्यकाल में अल्पसंख्यकों के लिए कुछ निम्न योजनाओं का व्यापक कार्य हुआ … ….
1  . सन् 2004 में एक नया “अल्पसंख्यक मंत्रालय ” गठित किया गया।
2.  केंद्रीय बजट का 15 प्रतिशत अल्पसंख्यको को आवंटित किया गया।
3 .सच्चर कमेटी की मनगढ़ंत रिपोर्ट से हज़ारों करोड़ रुपया केवल
अल्पसंख्यकों को पोषित करने में लगाया गया।
4. सरकार के  मुख्य उच्च पदों पर अल्पसंख्यकों को ही प्राथमिकता के साथ
नियुक्त किया गया था।
5.  पोटो जैसा आतंकवाद के लिए बना कठोर क़ानून को भी समाप्त  करने के पीछे कही न कही अल्पसंख्यकों को ही लाभ पहुंचाया गया।
6.  पिछले 6 वर्षों में 9 लाख करोड़ रुपया सरकारी बैंकों पर दबाव डाल कर
केवल अल्पसंख्यकों को ही ऋण उपलब्ध करवाया गया।

उपरोक्त कुछ मुख्य विवरण संक्षेप में है जिससे यह स्पष्ट होता है कि सोनिया गांधी ने देश में कितनी घृणित राजनीति का सूत्रपात किया था फिर वह क्योंकर श्री नरेन्द्र मोदी पर ध्रुवीकरण की राजनीति का आरोप लगाने का दुःसाहस कर रही है ?
चलते चलते यह भी लिखने में कोई संकोच नहीं कि अब मौन मनमोहन सिंह भी मोदी जी को अपने से अच्छा ” सेल्समैन व इवेन्ट मैनजर ” बता कर, खुलकर सांस लेने का आनंद उठा रहे हैं ।

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