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    Homeसाहित्‍यकविताडॉक्टर और साहित्यकार

    डॉक्टर और साहित्यकार

    सब बीमारियां
    अलसा कर बूढी हो गयी है
    सब दवाईयाँ स्वर्ग चली गयी है
    और
    कुछ डॉक्टर
    साहित्यकार बन गए है
    वो बीमारियों की किताब से चुराते है
    अलंकारिक शब्द
    और
    मरी हुई कविता का करते है
    पोस्टमार्टम
    और अपने शब्दों का भूसा
    भर कर के रिपोर्ट बना देते है

    और
    कुछ साहित्यकार
    डॉक्टर बन गए है
    जो अपनी प्रेम कविताओं से करते है
    मौत का इलाज
    जरुरत के हिसाब से शरीर के कुछ अंग
    सहेज कर रख लेते है
    अपनी कविताओं में

    कुछ शब्द घबराते है
    प्रेम और हिंसा
    के एक साथ इंजेक्शन से
    पर बेरहम
    डॉक्टर और साहित्यकार
    ठोक देते है
    किसी भी जगह
    अपने हिसाब से!

    मंजुल सिंह
    मंजुल सिंह
    शिक्षा- सिविल इंजीनियरिंग, एम.ए. (हिंदी), यू.जी.सी (नेट/जे.आर.एफ-हिंदी), वर्तमान में अध्यनरत

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