लेखक परिचय

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी मूलत: ग्वालियर, म.प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम.फिल तथा पी-एच.डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी

पाकिस्तान कई वर्षों से लगातार आतंकवाद को प्रश्रय दे रहा है, यह बात आज विश्व जानता है, ऐसे में यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि अमेरिका से यह बात छिपी हुई है, किंतु उसके बाद भी अमेरिका आतंकवाद को समाप्त करने एवं अन्य सामाजिक व्यवस्था में सुधार के नाम पर लगातार पाकिस्तान को कई हजार करोड़ डालर की आर्थिक सहायता कर रहा है। भारत द्वारा अनेक अवसरों पर अंतर्राष्ट्रीय मंचों से इस बात को साझा करने के साथ प्रमाण स्वरूप दस्तावेज भी दुनिया के सामने सौंपे जा चुके हैं कि किस तरह से हिन्दुस्तान का यह पड़ौसी मुल्क आतंकवाद को हवा देकर दहशतगर्दों को प्रोत्साहित करने एवं उन्हें हर संभव सहायता देने में लगा हुआ है।

अभी दो माह पूर्व ही अमेरिका के दो बड़े राजनीतिक दलों के दो प्रभावशाली सांसदों ने पाकिस्तान को आतंकवाद प्रायोजित करने वाला देश घोषित करने के लिए प्रतिनिधिसभा में एक विधेयक पेश किया था। उस वक्त कांग्रेस के सदस्य एवं आतंकवाद पर सदन की उपसमिति के अध्यक्ष टेड पो ने कहा था कि अब समय आ गया है कि हम पाकिस्तान की धोखाधड़ी के लिए उसे धन देना बंद कर दें और उसे वह घोषित करें जो वह है, ‘आतंकवाद को प्रायोजित करने वाला देश’। इसी के साथ ही दूसरे सांसद डेमोक्रेटिक पार्टी से कांग्रेस के सदस्य डाना रोहराबाचर ने भी ‘पाकिस्तान स्टेट स्पॉन्सर ऑफ टेरेरिज्म डेजिगनेशन एक्ट’ को सदन में पेश किया था।

पो ने तो अमेरिकी संसद में यहां तक बताया था कि क्यों पाकिस्तान विश्वास करने योग्य देश नहीं। अमेरिका सरकार द्वारा उसकी आर्थिक सहायता इसलिए बंद कर देनी चाहिए कि उसने अमेरिका के शत्रुओं की वर्षों मदद की है और उन्हें बढ़ावा दिया है। यह सच भी है कि ओसामा बिन लादेन को शरण देने से लेकर हक्कानी नेटवर्क के साथ उसके निकट संबंध तक, सभी में पाकिस्तान के संलिप्त होने के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, जिनसे साफतौर पर दिखाई देता है कि किस तरह पाकिस्तान की आतंकवाद के खिलाफ जंग सिर्फ दिखावाभर है। जब यह विधेयक प्रस्तुत किया गया, तब चहुंओर संदेश गया था कि भारत जिस बात को वर्षों से कहता आया है कि पाकिस्तान आतंकवादियों की आश्रय-स्थली है, उस बात को अब अमेरिका ने भी स्वीकार कर लिया है।

अमेरिका के जितने भी पूर्व राष्ट्रपति रहे और वर्तमान राष्ट्रपति तक, सभी आतंकवाद के मुद्दे पर एकमत देखे गए हैं, जिसमें सभी की एक बात समान है कि वह आतंकवाद को कहीं बढऩे नहीं देंगे, जहां होगा भी तो मानवता के हित में उसे वहां जाकर जड़ से समाप्त करने में कोई देरी नहीं करेंगे, किंतु उन तमाम राष्ट्रपतियों की बात पाकिस्तान के मामले में अब तक गलत साबित होती आ रही है। आगे डोनाल्ड ट्रम्प से यह अम्मीद की जा रही है कि वे जरूर इस विषय को गंभीरता से लेंगे और पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित कर उसे दिया जा रहा धन देना बंद कर देंगे। लेकिन कभी-कभी पुराने अनुभव को देखकर लगता है कि वे भी कहीं ऐसा न हो कि पाकिस्तान को लेकर आतंकवाद समाप्त करने की बात हवा में करते रहे हों। क्योंकि यदि अमेरिका की नीति ही इस प्रकार की है तो उसे ही आगे बढ़ाना ट्रंप की मजबूरी साबित होगी, जो हर हाल में मानवता की विरोधी है।

इस सबके बीच बात अब पाकिस्तान और आतंकवाद के बीच कैसा गहरा नाता है इसे लेकर हालिया अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने जो एक रिपोर्ट जारी की है, उसकी हो जाए। इस रिपोर्ट में उसने पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को पालने-पोसने पर गंभीर चिंता जताई है। उसके मुताबिक तालिबान, हक्कानी व अन्य कई आतंकी समूह पाकिस्तान में पूरी आजादी के साथ अपने कारनामों को अंजाम दे रहे हैं।

पिछले छह महीनों में इन्हें रोकने की पाकिस्तान की कोशिशें नाकाम रही हैं। यहां पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सरहद पर बड़ा इलाका इन आतंकी संगठनों के लिए महफूज बना हुआ है। ये संगठन यहां बैठकर दुनियाभर में आतंक फैला रहे हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन तथ्यों के आधार पर आज यह बता रहा है कि यहां कई प्रमुख आतंकी संगठन एक साथ काम कर रहे हैं। कुछ मामलों में मिलजुलकर और कुछ में अलग होकर यहां पर यह संगठन सक्रिय हैं। इन आतंकी संगठनों में तालिबान वह संगठन है, जिससे 60 हजार से ज्यादा आतंकी जुड़े हुए हैं। अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज ने जब इसे खदेड़ दिया, तो यह पाकिस्तान में अपना अड्डा बनाने में सफल हो गया।

हक्कानी नेटवर्क, जिसमें 15 हजार आतंकवादी हैं ने अपना मुख्य कार्यालय यहां खोला हुआ है। 40 हजार आतंकियों की ताकत रखने वाला अल-कायदा को यहां कोई रोकटोक नहीं है। भारतीय उपमहाद्वीप में सक्रिय 600 आतंकवादियों का एक्यूआइएस अल कायदा का आतंकी संगठन इस क्षेत्र में फलफूल रहा है। इसी प्रकार लश्कर-ए-तैयबा, 50 हजार से ज्यादा आतंकियों को जोडक़र भारतीय उपमहाद्वीप में सक्रिय है, जिसका उद्देश्य भी स्पष्ट है कि वह कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाना चाहता है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान आतंकी संगठन में 25 हजार लोग जुड़े हुए बताए जाते हैं। एक संगठन आइएसआइएल-के हैं, जिसमें एक हजार आतंकी सक्रिय हैं। इस्लामिक स्टेट (आईएस) का समूह, इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान भी पाकिस्तान की धरती से अपने आतंक के मंसूबों को हवा देने में लगा है।

अभी जब दो माह पूर्व उड़ी में पाकिस्तानी आतंकियों ने भारतीय सेना पर हमला किया था तब भी हमले में पाकितान के लोगों के शामिल होने के ठोस सबूत मिले थे। पठानकोट हमले के बाद तो पाकिस्तान ने यह स्वीकार ही कर लिया था कि इन हमलों में पाकिस्तान के कुछ संगठन शामिल थे। जिसके कारण ही आगे पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को दिखाने के लिए उन संगठनों के खिलाफ कुछ दिनों के लिए प्रतिबंध भी लगाए। ऐसे ही मुंबई में हुए सीरियल ब्लास्ट से जुड़ा मामला हो या फिर अजमल कसाब के जिंदा पकड़े जाने का विषय अथवा अन्य फिर कोई और भारत पर हुए आतंकी हमले का मामला, सभी में पाक की भूमिका किसी न किसी स्तर पर अवश्य मिलती रही है। किंतु इसके बाद भी अमेरिका सदैव से पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने से बचता रहा है। इससे साफ नजर आता है कि अमेरिका ने आतंकवाद पर अपनी दोहरी नीति अपना रखी है, एक तरफ उसका रक्षा विभाग कहता है कि पाकिस्तान आतंक पोषित देश है तो दूसरी ओर अर्थिक सहयोग देकर अप्रत्यक्ष रूप से आतंक को बढ़ावा देने में भी अमेरिका किसी न किसी तरह लगा हुआ दिखाई देता है।

6 Responses to “पाकिस्तान पर अमेरिका की दोहरी नीति”

  1. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. मधुसूदन

    अमरिका फिर भी, कुछ आशान्वित होगा। मानता होगा; कि संबंध (बचाकर)रखकर ही कुछ कार्यवाही करवाई जा सकती है। संबंध बिलकुल समाप्त करे तो, कोई अंकुश ही नहीं बचेगा। यह प्रतीति का (पर्सेप्शन) का अनुमानित खेल लगता है।
    सारे विकल्पों में अमरिका के लिए आर्थिक सहायता देना ही, सस्ता होता है। ये प्रतीति का खेल है।
    *संबंध बिलकुल तोडकर तो कोई अंकुश ही नहीं बचेगा।” जब तक अमरिका को शरीफ़ द्वारा कुछ करवा लेने की आशा है; ऐसा संबंध बना रहेगा। आज की परिस्थिति में, यही रास्ता अमरिका को ठीक लगता होगा। जब तक कुछ करवा लेने की आशा है; ऐसी सहायता देते रहेगा। इसके अतिरिक्त दूसरी संभावनाएँ लाभप्रद नहीं दिखती होगी। —-यह मेरा मानना है।
    ऐसा पहली बार भी नहीं हुआ है। पाकिस्तान में शरीफ के लिए शासन भी कठिन है। यह भी अमरिका जानता होगा। फिर भी और कोई विकल्प दिखाई नहीं देता।

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  2. Himwant

    रूस के अफगानिस्तान अतिक्रमण को रोकने के लिए अमेरिका ने ही पाकिस्तान को आतंकी संगठन खोलने के निर्देश दिए. लेकिन एक सभ्य समाज और विश्व में राज्य समर्थित आतंकवाद अधिक चल नही सकता. उस आतंकवाद का खामियाजा अमेरिका, पकिस्तान और भारत को भुगतना पड़ रहा है. यह सभी के हित में होगा की सब आतंकवाद तथा अलगाववाद से तौबा करें.

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    • आर. सिंह

      R.Singh

      अभी तो हालात ऐसे दिखाई दे रहे हैं,जैसे पाकिस्तान ,चीन और रूस मिलकर भारत के विरुद्ध नाकेबंदी कर रहे हैं और भारत अमेरिका के गोद में जा रहा है.

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      • Himawant

        अरे सिंह साहब, आप का मानस मिडिया का बनाया हुआ है. आपको सुचनाए मीडिया से मिलती है, मिडिया आपका माइंड मैनेज कर रहा है. मिडिया यह जानता है की क्या समाचार देने पर आपको क्या लगेगा. यह जरुरी नहीं की आपको जो लग रहा है वह सत्य हो . मिडिया पर पश्चिमी जगत का प्रभाव है. अमेरिका और यूरोप की यह निरंतर निति रही है की अन्य देशो में शत्रुता बढ़ाए. भारत – पाकिस्तान एवं चीन के बीच शत्रुता बढाने का काम बेहद सुनियोजित और सोचे समझे ढंग से किया जाता रहा है. वह भारत को भी उकसाता है और पाकिस्तान को भी. भारत एवं पाकिस्तान की पश्चिम परस्त मीडिया उनका भरपूर सहयोग करती है. भारत एवं पाकिस्तान की विदेश निति निर्माण संरचना में अमेरिका की गहरी घुसपैठ है.

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        • आर. सिंह

          R.Singh

          हिमवंत जी,धन्यवाद.मेरे लिए तो सूचना का आधार या तो मीडिया है या आप जैसे लोगों का आलेख. न मैं आधुनिक संजय हूँ और न दिव्य गृष्टि प्राप्त ऋषि या देवता कि मुझे सीधे यह सब ज्ञातव्य हो जाये.मैं विश्लेषण अवश्य करता हूँ.

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          • Sangita Gupta

            Hum log dhritrastra hai. Media Sanjay hai. Hum andhe hai, media Jo kahati hai us par viswas kat lete hai. Media ko wideshi (paschimi desh) control karte hai. Jara dimag lags kat wishleshan karenge to bat samajh ayegi.

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