फग्गन सिंह कुलस्ते : प्रभावी राजनेता एवं आदिवासी उन्नायक

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-ललित गर्ग –

भारतीय राजनीति में सादगी, कर्मठता, ईमानदारी एवं राजनीतिक कौशल से अपनी जगह बनाने वाले एवं आदिवासी जनजीवन के लिये उजाला बनने वाले फग्गन सिंह कुलस्ते वर्तमान राजनीति के एक प्रभावी एवं सक्षम राजनेता है। वे अपनी प्रभावी एवं शालीन भूमिका से देश के आदिवासी जन-जीवन के उत्थान एवं उन्नयन की एक बड़ी उम्मीद बने हैं। कुलस्ते एक ऐसे प्रभावी, कठोर, जुझारु, चमत्कारी एवं राजनीति व्यक्तित्व हैं जिन्होंने एक बार नहीं, बल्कि अनेक बार सांसद बनकर अपने राजनीतिक वजूद, कौशल एवं आमजनता पर अपनी पकड़ का परिचय दिया है। वे धैर्य, लगन, आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प, राजनीतिक कौशल के साथ खुद को बुलन्द रखते हैं, जिससेे उनके राजनीतिक रास्ते से बाधाएं हटती ही है और संभावनाओं का उजाला होता ही है। चुनौतीभरे रास्तों में समूचे राष्ट्र में आदिवासियों के लिये उजाले के प्रतीक बनने वाले कुलस्ते का व्यक्तित्व राजनीति की प्रयोगशाला में तपकर और अधिक निखरा है। कुलस्ते एक जुझारु एवं कर्मठ राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान में केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री, भारत सरकार हैं। वे जुलाई 2016-सितंबर 2017 तक केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री रहे, नवंबर 1999-मई 2004 तक वे जनजातीय मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री बने और अक्टूबर- नवंबर 1999 में कुलस्ते संसदीय कार्य राज्य मंत्री बनाए गए। वे भारत की सत्रहवीं लोक सभा के सांसद हैं। 2019 के चुनावों में वे मध्य प्रदेश के मण्डला से निर्वाचित हुए। वे भारतीय जनता पार्टी से संबद्ध हैं और अपने क्षेत्र के साथ-साथ समूचे आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा की आवाज को पहुंचाने वाले सक्षम एवं कार्यक्षम व्यक्तित्व है।
फग्गन सिंह कुलस्ते जितने प्रभावी राजनेता है उतने ही प्रखर समाजसेवी एवं शिक्षासेवी है। समाज में शिक्षा का प्रसार करने के लिए कार्य करना, कई समितियां गठित करके आदिवासियों को अपने अस्तित्व एवं सांस्कृतिक कार्यकलापों से जुडे़ रखने के लिए प्रोत्साहित करना, शैक्षिक संस्थाओं के संस्थापक और व्यवस्थापक, समाज के कमजोर वर्गों के लोगों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करना, आदिवासियों के उत्थान और शिक्षा के प्रसार के लिए बाबलिया विकास खंड की स्थापना आदि कुलस्ते के कार्यक्षेत्र है।
फग्गन सिंह कुलस्ते जमीनी स्तर से कार्य करते हुए, भारत की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के प्रमुख आदिवासी नेता के तौर पर उभरे हैं। वे सफल संगठनकर्ता एवं राजनीति कौशल के महारथि हैं। नरेन्द्र मोदी सरकार के मंत्री कद्दावर नेता कुलस्ते लम्बे समय से अपनी सारी शक्ति, सोच एवं ऊर्जा आदिवासी उत्थान एवं उन्नयन में खपाते रहे हैं। निश्चित ही उनके हर दिन के प्रयत्न से आदिवासी समुदाय में कुछ नया उत्साहपूर्वक परिवेश बनता रहा है, वे एक जुझारू एवं जमीन से जुड़े नेता हैं। उनका राजनीतिक वजूद विलक्षण एवं अद्भुत है, जनता पर उनकी पकड़ है। उनकी स्वतंत्र सोच है, जीत किस तरह सुनिश्चित की जा सकती है, यह गणित उन्हें भलीभांति आता है। यही कारण है कि कुलस्ते लगातार सांसद बनते रहे हैं, पहले 11वीं, 12वीं, 13वीं, 14वीं, 16वीं और 17वीं लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। वे 2012 में राज्यसभा के लिए चुने गए।
कुलस्ते सांसद के साथ-साथ अनेक संस्थाओं एवं गतिविधियों से जुड़े हैं। वे अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष हैं। वे भाजपा (अ.ज.जा. प्रकोष्ठ) 1993, राष्ट्रीय सचिव (प्रभारी) एवं भाजपा (अ.ज.जा. प्रकोष्ठ) 1996, उपाध्यक्ष भी रहे हैं। अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद् दिल्ली एवं अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद्, मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा, 2004 एवं 2010 (दो कार्यकाल), भाजपा, मध्यप्रदेश, 2006-2010 (दो कार्यकाल) महासचिव रहे, अखिल भारतीय गोंड संघ, 1998 से संरक्षक हैं।
फग्गन सिंह कुलस्ते का जन्म 18 मई 1959 को मध्य प्रदेश के मंडला में हुआ था। कुलस्ते के पास एमए, बीएड और एलएलबी की डिग्री है। उन्होंने अपनी पढ़ाई मंडला कॉलेज, डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर और रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर से पूरी की। कुलस्ते ने सावित्री कुलस्ते से शादी की है और उनकी 3 बेटियां और 1 बेटा है। कुलस्ते का जीवन राजनीतिक जज्बों, प्रयोगों एवं संघर्षों से भरा रहा है। ऐसा लगता है वे आदिवासी राजनीति के लिये ही बने हैं, वे आदिवासी राजनीति के महारथि एवं महायौद्धा हैं। उन्होंने चुनौतियों को अवसर में बदलने की महारथ हासिल की है। कुलस्ते आधुनिक तकनीक एवं साधनों का प्रयोग करते हुए अपने मंत्रालय को सक्रिय किये हुए हैं। वे ऐसी अनूठी एवं विलक्षण शख्सियत हैं जिनके दम पर आदिवासी जनजीवन का नया भविष्य तलाशा जा रहा है। वे कई सालों से राजनीति में हैं और राजनीति के दांव पेच से अच्छे से वाकिफ हैं। उनके सामने चाहे कैसी भी परिस्थिति हो लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज आदिवासियों में जो उनका मुकाम है उसे हासिल करने के लिए उन्होंने अपने जीवन में खूब मेहनत की है, अनेक संघर्षों में तपकर-खपकर निखरे हैं। कुलस्ते मध्यप्रदेश के आदिवासियों के लिये ही एक नया सवेरा, नई उम्मीद और नई प्रेरणा बनकर नहीं उभरे, बल्कि देश के समूचे आदिवासी जनजीवन के लिये भी एक नई प्रेरणा सिद्ध हुए हैं।
फग्गन सिंह कुलस्ते टेढ़े-मेढ़े, उबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरते हुए, संकरी-पतली पगडंडियों पर चलकर भाजपा-भावना से आदिवासियों की शक्ति बने हैं। वे किसी पद या जिम्मेदारी लेने की दौड से स्वयं को दूर रखते रहे हैं, उन्होंने कहा भी है कि हमारे यहां कोई व्यक्ति खुद से किसी दौड़ में शामिल नहीं होता। भाजपा में जिम्मेदारी दी जाती है। वे भाजपा की राजनीति को मूल्यों एवं राष्ट्रीयता से प्रेरित राजनीति मानते हैं। उन्होंने कहा भी है कि हम देश बनाने के लिये काम करते हैं, मातृभूमि का वैभव अक्षुण्ण रखना चाहते हैं। ऐसे ही सक्रिय होकर काम करने वाले नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से ही भाजपा मजबूत बनी है। ऐसे ही नेताओं के चरित्र एवं साख से देश की अधिसंख्य जनता को पता चला है कि भाजपा की राष्ट्रीयता से प्रेरित राजनीति के मायने क्या-क्या हैं? भले ही कुलस्ते आज सफल राजनीतिक शख्सियतों में शुमार किये जाते हों, लेकिन राजनीतिक जीवन ने उन्हें कई थपेड़े दिये, कई बदरंग जीवन की तस्वीरों से बार-बार रू-ब-रू कराया और इन थपेड़े एवं भौंथरी तस्वीरों ने उन्हें झकझोरा भी – जीवन को हिला भी दिया लेकिन उतना ही निखारा भी।
राष्ट्रवाद के परिकल्पनात्मक स्वरूप को अगर भाजपा देश की जनता के हृदय तक पहुंचाने में कामयाब रही है तो इसका श्रेय काफी हद तक नरेन्द्र मोदी, अमित शाह एवं जेपी नड्डा के नेतृत्व में कुलस्ते जैसे नेताओं को ही जाता है। उन्होंने देश के लोगों में भाजपा के लिये सकारात्मक वातावरण बनाने की दिशा में जो प्रयत्न किये हैं, निश्चित ही उसके प्रभावी परिणाम देखने को मिलें है और मिलते रहेंगे। देश में भाजपा ने आदिवासियों की विधिवत परवाह की है और उन्हें अपने भविष्य को लेकर किसी प्रकार की चिंता से ग्रस्त नहीं होना चाहिए। स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अनेक अवसरों पर आदिवासी कल्याण एवं उन्नत जीवन के संकल्प को दोहराया है और अनेक बहुआयामी योजनाएं शुरु की है।
आजादी के आंदोलन के दौरान से ही जनसेवा की भावना राजनीतिक कर्म में समाहित रही है। इसलिए राजनीति का आज भी दावा है कि वह जनसेवा का ही माध्यम है। लेकिन हाल के कुछ वर्षों में जनसेवा के लिए सत्ता का नया आयाम जुड़ गया है। इसलिए आज राजनेता वही कामयाब माना जाता है, जिसकी जनता पर पकड़ हो, जनता के मुताबिक राजनीतिक रणनीति बना सके और इसके जरिए अपनी राजनीतिक विचारधारा को सत्ता तंत्र के शीर्ष पर पहुंचा सके। इन अर्थों में देखें तो कुलस्ते हाल के दिनों में बड़े राजनीतिक रणनीतिकार के तौर पर उभरे हैं।
मुझे कुलस्तेजी से अनेक बार मिलने एवं आदिवासी विकास पर चर्चा करने का सौभाग्य मिला। वे गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में आदिवासी संत गणि राजेन्द्र विजयजी के नेतृत्व में संचालित सुखी परिवार अभियान एवं सुखी परिवार फाउण्डेशन के प्रारंभ से सहयोगी एवं मार्गदर्शक रहे हैं। एक संत एवं एक राजनेता- दोनों ही आदिवासी जनजीवन के उत्थान और उन्नयन के लिये लम्बे समय से प्रयासरत है और विशेषतः आदिवासी जनजीवन में शिक्षा की योजनाओं को लेकर जागरूक है। दोनों ही आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा के साथ-साथ नशा मुक्ति एवं रूढ़ि उन्मूलन की अलख जगाते हैं। दोनों का ही जीवन-ध्येय शिक्षा एवं पढ़ने की रूचि जागृत करने के साथ-साथ आदिवासी जनजीवन के मन में अहिंसा, नैतिकता, स्वावलम्बन एवं मानवीय मूल्यों के प्रति आस्था जगाना है। कुलस्ते चाहते हैं आदिवासी समाज को उचित दर्जा मिले। वह स्वयं समर्थ एवं समृद्ध है, अतः शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिये स्वयं आगे आएं। एक तरह से कुलस्ते के प्रयत्नों से एक सम्पूर्ण पिछडा एवं उपेक्षित आदिवासी समाज स्वयं को आदर्श रूप में निर्मित करने के लिये तत्पर हो रहा है, यह एक अनुकरणीय एवं सराहनीय प्रयास है।
भारत को आज सांस्कृतिक क्रांति का इंतजार है। यह कार्य सरकार तंत्र पर नहीं छोड़ा जा सकता है। सही शिक्षा और सही संस्कारों के निर्माण के द्वारा ही परिवार, समाज और राष्ट्र को वास्तविक अर्थों में स्वतंत्र बनाया जा सकता है। इसी दृष्टि से कुलस्ते का आदिवासी मिशन एक रोशनी है। एक स्वस्थ समाज निर्माण का संकल्प है। वे एक उन्नत एवं आदर्श आदिवासी समाज की स्थापना के लिये प्रतिबद्ध है। मेरी दृष्टि में फग्गन सिंह कुलस्ते के उपक्रम एवं प्रयास आदिवासी अंचलों में एक रोशनी का अवतरण है, यह ऐसी रोशनी है जो हिंसा, आतंकवाद, नक्सलवाद, माओवाद जैसी समस्याओं का समाधान बन रही है।

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