मप्र के पांच जिले नशे के कारोबार में

*उड़ता पंजाब की राह पर मप्र का उत्तरी अंचल*

*प्रदेश के पांच जिलों में बचपन स्मेक की गिरफ्त में*

(डॉ अजय खेमरिया)

मप्र के  उत्तरी अंचल के पांच जिले शिवपुरी, गुना,अशोकनगर,राजगढ़, औऱ श्योपुर नशे की ऐसी गिरफ्त में समाते जा रहे है जहाँ से इन जिलों की सामाजिक, आर्थिक,व्यवस्था को  चुनोतियाँ तो मिलनी ही है साथ ही कानून व्यवस्था के लिये भी गंभीर समस्या भविष्य में खड़ी होने जा रही है।त्रासदी का आलम यह है स्मेक,चरस, के इस कारोबार में पुलिस महकमा भी शामिल है और पीड़ित वर्ग में 18 साल से कम आयु वर्ग के हजारों बालक है।हाल ही में एक 17 साल की बालिका शिवानी  शर्मा की मौत स्मेक के ओवरडोज से हुई है शिवपुरी में  बाल अपचारी बालकों द्वारा तीन लोगो की हत्याएं जिला मुख्यालय पर सिर्फ इसलिए की जा चुकी है क्योंकि इन बालकों को नशे की लत थी और सामने वाले व्यक्तियों ने उन्हें पैसे देने से इंकार कर दिया।हाल ही में शिवपुरी जिला मुख्यालय पर आम नागरिकों का सँगठित प्रतिरोध भी इस नशे के कारोबार के विरुद्ध मुखर हुआ है सांसद,विधायक से लेकर तमाम नागरिक संगठन सड़कों पर उतरकर नशे के विरुद्ध लामबंद हो रहे है। शिवपुरी ,गुना,राजगढ़ जिलों में अनुमान है कि करीब 10 हजार से ज्यादा बच्चे इस समय स्मेक के शिकंजे में फंस चुके है।अकेले शिवपुरी जिला मुख्यालय पर ही करीब 100 से ज्यादा ऐसे बालकों को चिन्हित किया गया है जिनका उपचार उनके परिजन इस लत के बाद करा रहे है सामाजिक त्रासदी यह है कि अधिकतर बच्चों की उम्र 18 साल से कम या थोडी बहुत ही अधिक है जाहिर है समस्या सिर्फ नशे तक नही है बल्कि समाज के भविष्य से भी जुड़ी है।शिवपुरी जिले में जिस बालिका की मौत स्मेक के ओवरडोज़ से होना बताई गई है उसके छः साथियों को पुलिस ने हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है उनका जब एचआईवी परीक्षण किया गया तो सभी पोजिटिव्ह पाए गए क्योंकि ये सभी समूह में एक ही सिरिंज से स्मेक लेते थे।समझा जा सकता है कि समस्या किस बहुआयामी स्तर पर खड़ी हो रही है।जिस शिवानी शर्मा की मौत हुई है उसके शारीरिक शोषण की बात भी सामने आई है ।शिवपुरी औऱ आसपास के जिलों में हाल ही में पुलिस ने दबाब बढ़ने के बाद करोडों की स्मेक,हेरोइन पकड़ी है। शिवपुरी के पुलिस कप्तान विवेक अग्रवाल की सिफारिश पर आईजी राजाबाबू सिंह ने छः पुलिसकर्मियो को सस्पेंड कर दिया है इन सभी पर आरोप है  की ये नशे के कारोबारियों से जुड़े हुए है।सवाल यह है कि क्या अचानक मप्र के इन जिलों में नशे का कारोबार जम गया क्या??ऐसा नही है करीब तीन साल से इन जिलों में इस अवैध कारोबार ने जड़े जमाई जब कुछ आला पुलिस अफसरों ने इसे अपना सरंक्षण दिया।पंजाब में कैप्टिन अमरिंदर की सरकार आने के बाद वहां जिस बड़े पैमाने पर नशे के नेटवर्क पर सख्ती हुई उसके चलते राजस्थान पर कारोबारियों का फोकस बढ़ा जो पाकिस्तान का सीमावर्ती राज्य है मप्र के ये सभी जिले राजस्थान से सटे हुए है और लोकव्यवहार में भी इन जिलों के लिये  अंतरराज्यीय सीमा आड़े नही आती है।यही कारण है कि राजस्थान से बड़े पैमाने पर स्मेक,चरस,जैसे नशीले पदार्थ मप्र के इन जिलों में आ रहे है पुलिस के कुछ आला अफसर जो कुछ समय पूर्व तक इन जिलों में बड़े जिम्मेदार पदों पर रहे उन्होंने न केवल इस अवैध कारोबार से आंखे फेर रखी थी बल्कि इन गतिविधियों के एवज में बड़ा धन भी कमाया।ऐसा नही की सरकार में बैठे शीर्ष लोगों को  जानकारी नही थी लेकिन बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों के नेता मुँह में दही जमाकर बैठे रहे।नतीजतन आज हालात इतने खराब हो चुके है हर परिवार अपने बच्चों को सशंकित भाव से देखने को विवश है।शिवपुरी, गुना बाल कल्याण समितियों के आंकड़े बड़े ही चौकाने वाले है समिति की सदस्य श्रीमती सरला वर्मा के अनुसार दोनो जिलों में बहुत ही भयानक हालात है न केबल एलीट क्लास बल्कि मजदूरी करने वाले कचरा पन्नी बीनने वाले परिवारों के बच्चे भी इस नशे की जद में आ चुके है श्रीमती वर्मा बताती है कि करीब 100 से ज्यादा बच्चों की काउंसलिंग वह समिति के आगे कर चुकी हूं।समझा जा सकता है कि समस्या किस व्यापक स्तर पर भविष्य के लिये खड़ी होने जा रही है।जुबेनाइल जस्टिस बोर्ड से जुड़े रहे बाल अधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार रंजीत गुप्ता के अनुसार अंचल में बहुत ही त्रासदपूर्ण हालत है पुलिस ने पहले तो इस कारोबार को खुद ही जमने दिया और बाद में बड़ी संख्या में खुद पुलिस कर्मी इस कारोबार में उतर आए।समस्या उन बच्चों को लेकर बड़ी है जो बहुत ही गरीब घरों से है और मजदूरी या भीख मांगकर जी रहे है सर्वाधिक संख्या इसी तबके की है जो स्मेक  का आदी हो चुका है अंचल की कानून व्यवस्था के लिये ये बच्चे खतरा बनेंगे ही औऱ बाल सरंक्षण की हमारी संसदीय वचनबद्धता के लिये भी यह स्थिति बेहद शर्मनाक है।समाजसेवी औऱ चिकित्सक डॉ गोविंद सिंह के अनुसार मप्र के इस उत्तरी अंचल में स्मेक के कारोबार ने दबे पांव एड्स की जमीन भी निर्मित कर दी है क्योंकि स्मेक के पाउडर को एविल इंजेक्शन के साथ घोलकर सिरिंज से लिया जाता है और जागरूकता के आभाव में बच्चे एक ही सिरिंज से स्मेक का डोज लेकर इस बीमारी को आमंत्रित कर रहे है।शिवानी की मौत के बाद आरोपी बनाए गए शिवपुरी के 6 युवक युवतियो में एचआईवी पोजिटिव्ह  इसीलिए पाया गया कि वे सभी एक या दो सिरिंज से ही स्मेक लेते थे।जाहिर है हजारों की संख्या में ऐसे मामले सामने आ सकते है जब ऐसे बच्चों का चिकित्सकीय परीक्षण किया जाएगा।तब ये आंकड़े हमे शर्म से सिर झुकाने के लिये पर्याप्त होंगे।इस इलाके में यह नशा राजस्थान से आ रहा है एक सुगठित रैकेट इसे इस सुनियोजित तरीके से संचालित कर रहा है कि गांव गांव तक इसके तलबगार पैदा हो गए है कुछ सम्पन्न परिवार तो जानते हुए भी मजबूर है वे खुद नियमित पैसा इन्हें देते है ताकि बाहर जाकर बदनामी भरे कामो से  बच्चे को बचाया जा सके।स्मेक का डोज यहां टिकिट कोड वर्ड के रूप में मिलता है परचून की दुकानों से लेकर मेडिकल स्टोर सरकारी भांग दुकानों सब जगह यह आसानी से उपलब्ध है 100 से 500 रुपए के टिकिट प्रचलन में है मेडिकल स्टोर्स पर भी टिकिट के साथ पूरी किट जिसमे एविल का इंजेक्शन निडिल सब उपलब्ध रहती है।अकेले गुना औऱ शिवपुरी जिले में एविल इंजेक्शन की खपत इंदौर भोपाल जैसे बड़े शहरों से ज्यादा बताई गई है क्योंकि इसी के साथ  स्मेक को घोलकर शरीर मे इंजेक्शन के साथ लिया जा रहा है।हाल ही में वैकल्पिक रुप से शिवपुरी के पुलिस कप्तान के रुप में पदस्थ किये गए विवेक अग्रवाल की छानबीन में पता चला है कि तमाम पुलिसकर्मियों की बातचीत स्मेक का नशा करने वाले औऱ मृतका शिवानी के साथ होती थी इनमे से 6 पुलिसकर्मियों को अभी निलंबित किया गया है।अगर इन सभी  प्रभावित जिलों में इसी तर्ज पर गोपनीय जांच सरकार के स्तर पर हो तो इस नेटवर्किंग को ध्वस्त करने में काफी मदद मिल सकती है क्योंकि यह भी तथ्य है कि बगैर पुलिस सरंक्षण के कोई भी अवैध कारोबार हिंदुस्तान में सम्भव नही है।अगर वाकई मप्र में सरकार मे बैठे लोग अपने ही सहोदरों के लिये चिंतित है तो उन्हें इन सभी जिलों में तत्काल बड़ी कारवाई बगैर दबाब के सुनिश्चित करनी पड़ेगी।विवेक अग्रवाल जैसे नए आईपीएस अफसरों को फ्री हैंड देकर जिलों में काम कराना होगा नही तो आने वाले समय मे मप्र का यह उत्तरी अंचल पंजाब की तरह उड़ता नजर आएगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी और सत्ता के शिखर पर बैठे लोग सिर्फ मातमपुर्सी के लायक ही रह पाएंगे।बताना होगा कि यह प्रभावित जिले मप्र की सियासत के सबसे ताकतवर लोगों के इलाके में आते है।क्या जागेगी हमारे मप्र के ताकतवर नेताओ की संवेदना??(लेखक जुबेनाइल जस्टिस एक्ट के अधीन गठित चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के अध्यक्ष है)

Leave a Reply

%d bloggers like this: