घोटाले…भक्ति वाले

भक्ति का सबसे बडा घोटाला अभी आँखो के सामने है एक व्यभिचारी की भक्ति में डूबी महिलायें लाठी लिये खड़ी हों पूरा शहर ठप्प पड़ा है, इस डर से कि इस कुकर्मी को  सज़ा मिले तो हिंसा हो उसके समर्थकों द्वारा।सरकारने इन्हे इक्ट्ठा होने ही क्यों दिया। सुच्चा डेरा के राम रहीम भी ग़लत कारणों के कारण समाचारों की सुर्ख़ियों मे रहे, कभी अपनी बेहूदा फिल्मों के कारण कभी महिलाओं से दुष्कर्म के कारण को कभी हत्याओं के कारण।  इन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता क्योंकि इनके भक्त सब आरोपों को षडयंत्र कहकर नकार देते हैं।  यही नहीं दोषी साबित होने पर समर्थक हिंसा पर उतारू हैं। यह घटना तो हाल की है सब जानते हैं पर इससे पहले भी होते रहे हैं घोटाले धर्मवालेजो आर्थिक घोटालों से भी ख़तरनाक हैं।

आस्था के नाम पर ठगी होती है, विश्वास की जगह अंधविश्वास पनपता है। धर्म की आड़ मे लोगों को इस क़दरप्रभावित कर लिया जाता है कि वे अपना हित अनहित समझने की क्षमता ही खो बैठते हैं। फ़िज़ूल की बातों मे ,कर्मकान्डों मे अपना समय धन और शक्ति बरबाद करने लगते हैं।

मै निर्मल बाबा की ही बात करने जा रही हूँ।यह ठीक है कि अभी तक उनके जुर्म साबित नहीं हुए हैं पर जो स्पष्टदिख रहा है उसके साबित होने की प्रतीक्षा भी क्या करनी। निर्मल बाबा की अपार संपत्ति उनके भक्तों और प्रशंसकोकी दी हुई है, बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से ,यदि वे इसपर पूरा आयकर देते हैं तो हमारे देश के कानून के हिसाबसे वे कोई जु्र्म कर ही नहीं रहे, पर गहराई से सोचा जाय तो वह बहुत बड़ा जुर्म कर रहे हैं, वे जनता को अपनेवाकचातुर्य से भ्रमजाल मे फंसाकर मनमानी करवा रहे हैं। उनके भक्त उनके लियें कुछ भी कर सकते हैं। अपनेनिजी लाभ के लियें जनता को गुमराह करना किसी जुर्म से कम नहीं है। पहले तो मीडिया की इनपर बड़ी कृपा रहीकाफ़ी समय तक इनके समागम को समाचार चैनल और तथाकथित धार्मिक चैनल ख़ूब दिखाते रहे पर जैसे ही इनकेख़िलाफ़ कई शहरों से शिकायतें आईं तो सब एक साथ इनकी धन सम्पत्ति और कार्य प्र णाली के खुलासे करने मेजुट गये, जुटे रहे, जब तक कोई और संसनीख़ेज़ ख़बर हाथ नहीं लगी।निर्मल बाबा जैसे बहुत से बाबा, बहुत सेधर्मगुरु और बहुत सी गुरु मातायें यहाँ छोटे बड़े शहरों मे अपनी अपनी दुकाने सजाये बैठे हैं, भीड़ की कहीं कोईकमी नहीं है। हर जगह लम्बी लम्बी कतारें लगी हैं अपने गुरु के दर्शन पाने के लियें।ये गुरु भक्तों की मानसिकता परइतने हावी हो जाते हैं कि उन्हे उनके मोहजाल से निकाल पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है (क्षमा करें फ़िल्मीसंवाद है) निर्मल बाबा की तरह इस देश मे बहुत से बाबा, गुरु या गुरु मातायें हैं जो लोगों की भावनाओं से खेल कर ख़ूब धन बटोर रहे हैं,यदि धन नहीं भी बटोर रहे तो लाखों लोगों पर अपनी सत्ता जमाने का सुख तो भोग ही रहे हैंकभी कभी सत्ता का लालच पैसे के लालच से भी बड़ा हो जाता है। असंख्य भक्तों का समूह हाथ जोड़कर इनकेदर्शन की प्रतीक्षा करता है तो इनके अहम् तृप्ति मिलती है।

कुछ समय पहले पुट्टापर्थी के सत्य साँई बाबा के निधन के बाद समाचार आया था कि उनके निजी कक्ष से बेशुमारनक़द सोने, चाँदी और हीरों के आभूषण मिले। ये कहाँ से आये ? उनके निजी कक्ष में क्या कर रहे थे ? बाद मेइनका क्या हुआ ? इसका कोई खुलासा मीडिया करना भूल गया । ये सही है कि सत्य साँई बाबा ने पेय जल कीयोजनाओं मे पैसा लगाया , अनेक शिक्षण संस्थान और निःशुलक अस्पताल खोले परन्तु इसके लियें एक चमत्कारीबाबा बनकर करोड़ों लोगों की मानसिकता पर राज्य करना कानून की दृष्टि मे भले ही अपराध न हो, पर मानवता कीदृष्टि से देखें तो एक गुनाह है।

बापू आसाराम के आश्रम मे कुछ साल पहले दो बच्चों की हत्या का मामला सामने आया था,उसकी तहक़ीकात केबाद क्या नतीजा आया मीडिया ने नहीं बताया। अभी भी वो काफ़ी बड़ी भक्तों की भीड़ जमा करने मे सक्षम है।शुकर है कि इनके आरोप साबित हुए और ये जेल में है ।

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