जीवित रहते सुभाष तो न होता बंटवारा, नेहरू व जिन्ना के चलते उदय हुआ शैतानी मुल्क पाकिस्तान: इंद्रेश

नई दिल्ली। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार ने कहा कि अगर सुभाष चंद्र बोस जीवित रहते तो देश का बंटवारा नहीं होता और विस्थापित होकर पाकिस्तान गए लाखों लोगों को अब भी मुहाजिर के रूप में नहीं जीना पड़ता। उन्होंने कहा कि नेहरू और जिन्ना के कारण ये बंटवारा हुआ और शैतानी मुल्क के रूप में पाकिस्तान का उदय हुआ, जहां बलुचिस्तान के साथ सिंधी व पख्तून के साथ एक बड़ी आबादी दर्दनाक जिंदगी जी रही है। इस मौके पर आरएसएस के वरिष्ठ नेता ने कहा है कि योग की उत्पत्ति भारत में हुई और यह दुनिया के हर कोने में यह फैला, चाहे वहां की सभ्यता, भाषा और धर्म कोई सी भी रही हो।

संविधान और सामाजिक एकता
इंद्रेश कुमार नई दिल्ली के ऐवान-ए-गालिब में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच व सैटरडे क्लब आफ लिटरेचर द्वारा आयोजित रोजा इफ्तार से पहले सभागार में मौजूद लोगों को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम ‘डॉ बी आर आंबेडकर: संविधान और सामाजिक एकता’ विषय पर किया गया था। भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार बाबा साहब आंबेडकर की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। बाबा साहेब के जीवन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह जानकारी भी बहुत ही कम लोगों को है कि बाबा साहेब को आंबेडकर उपनाम उनके शिक्षक से मिला, जो ब्राह्मण थे। इसी तरह उन्होंने जब सनातनी धर्म छोड़ने को कहा तो मुस्लिम और ईसाईयों ने बहुत कोशिश की अपने धर्म में लाने को, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाहर के धर्म हमारी पहचान खा जाते हैं। यहां तक की नाम भी खा जाते हैं। इसलिए उन्होंने बौद्ध धर्म ग्रहण किया।

मां व मातृभूमि का नहीं तो किसी का नहीं
इस मौके पर उन्होंने दो टूक कहा कि जो मां और मातृभूमि का नहीं हुआ। वह किसी का नहीं हुआ। इसी मातृभूमि से हम एक-दूसरे के साथ रहते हैं। उन्होंने समाज से ऐसे मुस्लिम क्रांतिकारियों और बलिदानियों का नाम आगे लाकर प्रचारित करने का आग्रह किया जिन्होेंने देश के लिए अपना जीवन कुर्बान किया। उन्होंने कहा कि यह बड़े अफसोस की बात है कि अधिकांश मुस्लिम समाज की जुबान पर ऐसे चंद नाम ही है, जबकि उनकी संख्या कहीं अधिक है।

योग की जन्मस्थली भारत
संघ नेता ने योग की भी तारीफ करते हुए कहा कि सदियों से दुनिया भर के लोगों ने योग को अपनाया और मानवता की भलाई के लिए इसका अभ्यास किया। उन्होंने कहा कि, ‘‘यद्यपि योग का जन्मस्थान भारत है, लेकिन इसका उपयोग पूरी दुनिया में सदियों से मानव की भलाई के लिए किया जा रहा है।’’ उन्होंने कहा कि, ‘‘इसलिए हर कोई, किसी न किसी रूप में, अपने मन और शरीर को स्वस्थ और खुश रखने के लिए योग का अभ्यास करता है, और इसका उपयोग लोगों के कल्याण के लिए, मनुष्य की भलाई के लिए करता है।’’ उन्होंने कहा कि इसी वजह से दुनिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने के प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा, ‘‘यह पहला ऐसा प्रस्ताव था जिसे बिना किसी बहस के सभी ने स्वीकार कर लिया। शत प्रतिशत समर्थन के साथ, आज दुनिया भर में योग दिवस मनाया जाता है।’’

इफ्तार पर शांति सद्भाव की अपील
कार्यक्रम के आयोजकों ने सद्भाव और शांति का संदेश देने के लिए रमजान के पवित्र महीने को ‘सद्भावना’ के महीने के रूप में मनाने के एमआरएम के फैसले के तहत इफ्तार की मेजबानी की। इंद्रेश कुमार ने लोगों को देशभक्ति और भाईचारे का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि लोग बांटने की कोशिश करेंगे। लड़वाने की काेशिश करेंगे, लेकिन हमें जोड़ने की कोशिश करना है। इस मौके पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के पदाधिकारी शाहिद अख्तर, इमरान चौधरी, हाफिज मोहम्मद साबरीन, जैबिहुल्लाह जबीह, खुर्शीद राजका, शाहिद सईद के साथ ही कई विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व छात्र भी मौजूद थे।

1 COMMENT

  1. नेहरु, जिन्ना, अथवा १८८५ में उपजी इंडियन नेशनल कांग्रेस में कोई भी अन्य व्यक्ति केवल फिरंगी-षड्यंत्र में रचाई शतरंज का मात्र एक मोहरा रहा है|

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