एक हरियाणा लोक गीत

सावन का महीना है भरतार,
तू मुझे झूला झुलाने आईयो,
तू मुझे झूला झुलााने आईयो
मै करूंगी तेरा घना इंतजार।।

हाथो की चूड़ी लाना,
पैरों की बिछवे लाना,
मांग का सिंदूर लाना,
क्रीम पाउडर भी लाना।
मै करूंगी सोलह सिंगार,
सावन का महीना है भरतार।।

कानों के कुंडल लाना,
माथे का टीका लाना,
नाक की नथ भी लाना
माथे की बिंदिया लाना
भूलना न गले का हार,
सावन का महीना है भरतार।।

बालों के लिए गजरा लाना,
आंखो का सुरमा भी लाना,
पैरों की पायजेब भी लाना,
हाथों में लिए कंगन लाना,
मै सजूगी तेरे लिए भरतार।।
सावन का महीना है भरतार।।

रेशम की डोरी लाना,
चांदी का पटरा लाना
ढोलक मंजीरा लाना,
संगीत की धूम मचाना,
तू झोटे देना मुझको यार,
सावन का महीना है भरतार।।

घाघरा चुन्नी मत लाना,
साड़ी जनफर मत लाना,
ये फैशन से है अब बाहर,
केवल जींस टॉप ही लाना,।
मै मैम बनूंगी तेरी अब यार
सावन का महीना है भरतार

आर के रस्तोगी

Leave a Reply

%d bloggers like this: