हे सांड़ देवता नमस्कार!

हे सांड़ देवता नमस्कार !हे सांड़ देवता नमस्कार!
नित दर्शन दे करते उद्धार, हे सांड़ देवता नमस्कार!

खेतों में रात भर पड़े रहे, सब लाठी लेकर खड़े रहे
पत्ती सब आप ग्रास करते, भूमि में बस जड़ पड़े रहे
क्यों इतना लेते हो आहार , हे सांड़ देवता नमस्कार!

जब मार्ग कोई अवरुद्घ किये ,तो आप भी उसके विरुद्ध हुए
खुद पर न नियन्त्रण कर पाते, जब आप किसी पर क्रुद्ध हुए
सींगो से कर देते प्रहार , हे सांड देवता नमस्कार!

विश्राम वही पर होता जो , स्थान आपको जम जाये
सब राह बदलने लगते है ,जहाँ पाव आपके थम जाये
साइकिल पैदल या मोटर कार, हे सांड देवता नमस्कार!

जब टुकड़ी आपकी चलती है ,तो हवा भी राह बदलती है
डरकर सब पीछे हट जाते, जब नैनें दिशा बदलती हैं
सह पाये न नैनो के मार , हे सांड़ देवता नमस्कार!

आपस मे सब मिलकर रहते, फ्रीजियन जर्सी चाहे देशी हों
ना तंग किसी को करते है, चाहे कोई भले विदेशी हो
मानवता का करते प्रचार, हे सांड देवता नमस्कार!

जब किसी बात पर अड़ जाये, चाहे जो हो फिर लड़ जाये
सम्मान बचाने भिड़ जाते, चाहे चित या पट पड़ जाये
जीवन में कभी न माने हार, हे सांड देवता नमस्कार!

जब तक ये सेवा करते थे, मालिक पर जान लुटाते थे
धरती का सीना चीरते थे , और फसलें हरी उगाते थे
तुम ही थे जीवन के आधार, हे सांड देवता नमस्कार!

कितने ही लाठी डंडे सहे ,पर मुंह से फिर भी कुछ न कहे
बाते भी बहुत सुनी तुमने, पर आप सदा से चुप ही रहे
आया अब समय तुम्हारे द्वार, हे सांड़ देवता नमस्कार!

नेता जनता की जो न सुने, अब उसका तुम संहार करो
कृषकों से दृष्टि हटा करके, इस पर भी आप विचार करो
जनता मागे ये ही उपहार, हे सांड देवता नमस्कार!

हे देव ! आपसे विनती है, पीड़ा का अब एहसास करो
पड़े हैं कुदृष्टि में आम व्यक्ति, कुछ खासों का भी नाश करो
बस इतना सा कर दो उपकार,हे सांड देवता नमस्कार!

    - अजय एहसास

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