लेखक परिचय

अन्नपूर्णा मित्तल

अन्नपूर्णा मित्तल

एक उभरती हुई पत्रकार. वेब मीडिया की ओर विशेष रुझान. नए - नए विषयों के लेखन में सक्रिय. वर्तमान में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परस्नातक कर रही हैं. समाज के लिए कुछ नया करने को इच्छित.

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हिमाचल प्रदेश का हिमपात के साथ सीधे तौर पर जीवन की सुख-समृद्धि का जुड़ाव हो चूका है। हिमाचल के प्रमुख उद्योगों में एक पर्यटन उद्योग भी शुमार है. यहाँ के सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सर्दियों में हिम की मोटी चादर सी जम जाती है। सर्दियों के दौरान यह सभी जगहें हिम की सफेद चादर में लिपटी रहती हैं। हिमाचल प्रदेश में शिमला, मनाली, धर्मशाला, डलहौजी और कसौली अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन केंद्र हैं।

 

कसौली चंडीगढ़ से मात्र डेढ़ घंटे की दूरी पर है और अक्सर ऐसा होता है कि यहाँ बर्फबारी की सूचना मिलने के बाद चंडीगढ़ और आस-पास के लोग यहाँ पहुँच कर हिमपात का आनंद उठाते हैं। अंग्रेजी हुकूमत के समय से कसौली छावनी क्षेत्र रहा है लिहाजा अभी भी यहाँ ज्यादा निर्माण नहीं होने के कारण इसकी खूबसूरती बरकरार है। कसौली से दो घंटे के सफर के बाद शिमला पहुँचा जा सकता है। अंग्रेजों की यह ग्रीष्मकालीन राजधानी आज भी बर्फ और खासकर ठंड का पर्याय मानी जाती है। करीब सात हजार फुट की ऊँचाई पर बसे इस शहर का नजारा हिमपात के बाद देखते ही बनता है। हालाँकि यहाँ स्नो लाइन नजदीक नहीं है फिर भी जनवरी में यहाँ मुख्य शहर में ही दो से तीन फुट बर्फ गिरती है जबकि कुफरी जैसे आस-पास के इलाकों में दिसंबर से मार्च तक बर्फ जमी रहती है जो सैलानियों के लिए आकर्षण बनी रहती है।

 

पर्यटकों के लिए हिमपात के दिनों में यहाँ स्केटिंग मुख्य आकर्षण रहता है। यहाँ पर 1920 में स्थापित एशिया का सबसे पुराना और अब एकमात्र ओपन एयर स्केटिंग रिंग है जिसमें प्राकृतिक तौर पर पानी जमाकर स्केटिंग करवाई जाती है। इसके अलावा यहाँ पर एशिया का सबसे ऊँचा गो-कर्ट ट्रैक भी है। स्कीइंग वाली ऊँचाई पर गो-कार्टिंग का अपना अलग ही मजा है। हाँ, एक खास बात यह कि यदि आप यहाँ हिमपात के दिनों में आ रहे हैं तो कालका-शिमला के बीच चलने वाली छुक-छुक रेल में जरूर बैठें। विश्व धरोहरका दर्जा हासिल कर चुकी इस रेल लाइन पर हिमपात के दौरान सफर करने का अपना अलग ही आनंद है जो बरसों जेहन में समाया रहता है।

 

शिमला यदि ऐसे लोगों की पसंद है जिनके पास समय कि कमी रहती है तो मनाली उन पर्यटकों को लुभाता है जो लंबे समय तक प्रकृति की गोद में रहकर हिमपात का आनंद लेना चाहते हैं। खास तौर पर मनाली हनीमून पर जाने वालों की पहली पसंद है। हर साल यहाँ हिमपात के दिनों में विशेष तौर पर ऐसे जोड़ों की बहार रहती है जो या तो विवाहित जीवन शुरू कर रहे होते हैं या फिर विशेषतौर पर शादी के बाद का वैलेनटाइंस डे मनाने स्नो प्वांइट पर आते हैं। यहाँ कीसोलंग घाटी में सर्दियों में आप एक साथ स्कीइंग के साथ-साथ पारा-ग्लाइडिंग का भी मजा ले सकते हैं। दोनों चीजें एक साथ एक जगह पर मिलना किसी वरदान से कम नहीं है।

 

मनाली से बेहद नजदीक स्थित है दुनिया के सबसे ऊँचे दर्रों मे से एक रोहतांग दर्रा। कोई भी मौसम हो आप यहाँ दो से तीन मीटर मोटी बर्फ की तह हमेशा देख सकते हैं। मनाली आने के लिए शिमला के अलावा सीधे चंडीगढ़ से भी जाया जा सकता है। यहाँ के लिए नियमित रूप से सरकारी वाल्वो बसें चलती हैं जो शाम को चलकर सुबह आपको मनाली पहुँचा देती हैं। आप चाहें तो हवाई मार्ग से भी मनाली आ सकते हैं। जहाज से हिम के लिहाफ में सोई कुल्लू घाटी का नजारा इतना मोहक दिखता है कि लगता है सफर और लंबा होना चाहिए था। मनाली के बाद हिमपात के नजरिए से जो शहर खास है वह है डलहौजी। पंजाब के आखिरी शहर पठानकोट से डलहौजी की दूरी साठ किलोमीटर है। पठानकोट तक रेल या हवाई मार्ग से भी पहुँचा जा सकता है।

 

डलहौजी बरतानवी काल से छावनी शहर है और सीमित निर्माण के चलते आज भी किसी अंग्रेजी शहर का आभास यहाँ आकर मिलता है। डलहौजी के बिलकुल साथ ही खजियार स्थित है। खजियार को भारत के मिनी स्विट्जरलैंड का दर्जा हासिल है। ऊंचे देवदारों से घिरे खजियार केमैदान पर बिछी बर्फ की मोटी चादर और बीच में स्थित छोटी सी झील किसी भी कवि के कल्पनालोक का अहसास करवाती है। डलहौजी के अलावा धर्मशाला भी हिमपात के शौकीनों का पसंदीदा शहर है। हालाँकि यहाँ बर्फबारी अपेक्षाकृत कम होती है तथापि स्नो लाइनकाफी नजदीक है। हाँ, धर्मशाला से मात्र सात किलोमीटर दूर बसे मैक्लॉडगंज मैं जमकर बर्फ गिरती है।

 

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने अमीर पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए को हेलिकॉप्टर टैक्सी सेवा की शुरुआत की है। इस सेवा के लिए सरकार ने तीन निजी कम्पनियों से समझौते किए हैं। ये कम्पनियां हैं – सिम सैम एयरलाइंस, मेस्को एयरलाइंस और शिवा एयरलाइंस। इन कम्पनियों को पूर्व निर्धारित मार्ग पर सेवा संचालित करने की अनुमति दी गई है।

 

पर्यटन विभाग ने राज्य में कुल 57 हेलिपैड की पहचान की है और 28 रास्ते तय किए हैं। इन का किराया 2,000 रुपए से 13,000 रुपए के बीच होगा। इस सेवा से लाहौल और स्पीति जिले में जाना सुविधाजनक हो जाएगा, जहां ताबो, धनकर, गुंगरी, लिदांग, हिकिम, सगन्म और नाको जैसे अनेक बौद्ध मठ हैं। पर्यटन हिमाचल प्रदेश में बागवानी और जलविद्युत परियोजना के साथ एक महत्वपूर्ण उद्योग है। साल 2010 में राज्य में 1.3 करोड़ पर्यटक आए थे।

 

हिमाचल प्रदेश को पर्यटन क्षेत्र में तीन और राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए गए हैं। आउटलुक पत्रिका ने नीलसन द्वारा किए गए देश के सभी पर्यटक गंतव्यों के लिए किए गए स्वतंत्र सर्वेक्षण के आधार पर प्रदेश को यह पुरस्कार प्रदान किए हैं। हिमाचल प्रदेश को ‘फेवरेट हिल डेस्टिनेशन-मनाली’, ‘आउटलुक टैªवलर्स अवार्ड-2010’ तथा ‘फैवरेट एड्वेंचर डेस्टिनेशन’ पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। हिमाचल पर्यटन विश्व भर के सैलानियों को श्रेष्ठ पर्यटक सेवाएं उपलब्ध करवाने वाले राज्य के रूप में उभर रहा है।

 

पर्यटन उद्योग को हिमाचल प्रदेश में उच्च प्राथमिकता दी गई है और हिमाचल सरकार ने इसके विकास के लिए समुचित ढांचा विकसित किया है जिसमें जनोपयोगी सेवाएं, सड़कें, संचार तंत्र हवाई अड्डे यातायात सेवाएं, जलापूर्ति और जन स्वास्थ्य सेवाएं शामिल है। राज्य में तीर्थो और वैज्ञानिक महत्व के स्थलों का समृद्ध भंडार है। राज्य को व्यास, पाराशर, वसिष्ठ, मार्कण्डेय और लोमश आदि ऋषियों के निवास स्थल होने का गौरव प्राप्त है। गर्म पानी के स्रोत, ऐतिहासिक दुर्ग, प्राकृतिक और मानव निर्मित झीलें, उन्मुक्त विचरते चरवाहे पर्यटकों के लिए असीम सुख और आनंद का स्रोत हैं।

 

हिमाचल प्रदेश में पर्यटन विभाग ऩे सैलानियों को आकर्षित करने का नया तरीक़ा ईज़ाद किया है। विभाग ने शिमला की कहानी को एक किताब के ज़रिए लोगों के सामने पेश किया है। किताब का नाम “हर घर कुछ कहता है” रखा गया है। इसमें अंग्रेज़ों के समय से लेकर आज़ादी मिलने और भारत-पाक विभाजन के साथ भारत-पाक शांति वार्ता को शामिल किया गया है। इस बारे में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल का मानना है कि इससे पर्यटकों को शिमला के बारे में ज़्यादा जानकारी मिलेगी और इससे वो ज़्यादा वक़्त शिमला में गुज़ारना चाहेंगे।

 

बर्फीली जगहों पर घूमने वालों शकीनों के लिए वास्तव में एक स्वर्ग के समान है. ऐसी जगहों की कल्पना से ही दिल खिल उठता है. तीन पहाड़ियों पर बसे इस शहर में आप भले ही स्कीइंग जैसे बर्फबारी से जुड़े खेलों का आनंद नहीं ले सकते लेकिन यदि आप के पास समय है तो निश्चित तौर पर आप यहाँ से नई ऊर्जा हासिल कर लौटेंगे।

 

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