आज के इस्लामिक देश सऊदी अरब में कभी पूर्ण विकसित थी हिन्दू सभ्यता

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                                       अरब में मिला प्राचीन मंदिर, 8000 साल पुरानी सभ्यता की हुई खोज 

     संजय सक्सेना

        सऊदी अरब में पुरातत्व विभाग के सर्वे में खुदाई के दौरान करीब 8 हजार साल पुराने शहर की खोज की है, जिसमें प्राचीन मंदिर मिला है,जिसके आधार पर दावा किया जाने लगा है कि अरब आज भले ही मुस्लिम देश हो,लेकिन यहां कभी हिन्दू सभ्यता पनपी और विकसित हुई होगी।ं सऊदी अरब को आधिकारिक रुप से किंगडम ऑफ सऊदी अरब कहा जाता है। यह पश्चिमी एशिया का इस्लामी देश है। सऊदी अरब को इस्लाम की दो मस्जिदों के कारण पवित्र स्थान कहा जाता है यहां मक्का में अल मस्जिद अल हरम और मदीना में अल मस्जिद अन नवाबी नाम की दो पवित्र मस्जिदें हैं। सऊदी अरब में 3 मार्च 1938 को पेट्रोल की खोज हुई थी। तेल की खोज होने के बाद सऊदी अरब की किस्मत पूरी तरह से बदल गई। एक बंजर और वीरान देश से यह चमक-धमक भरे देश में बदल गया। सऊदी अरब के सबसे प्राचीन शहर में प्राचीन मंदिर मिलने की ये घटना पूरी दुनिया में फैल गई है। वहीं, खुदाई में मंदिर मिलने के साथ साथ कई ऐसी चीजें मिली हैं, जिसने पुरातत्वविदों को हैरान कर दिया है। सऊदी अरब की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये प्राचीन मंदिर सऊदी अरब की राजधानी रियाद के दक्षिण पश्चिम इलाके में बसा शहर अल-फॉ में मिला है, जहां पुरातत्वविद खुदाई कर रहे थे।

     अरब न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब हेरिटेज कमीशन, जो सऊदी अरब और फ्रांस के पुरातत्वविदों का संगठन है, उसने अल-फॉ शहर में खुदाई के दौरान मंदिर की खोज की है। इस खुदाई के दौरान एक प्राचीन मानव बस्ती भी मिली है, जिसके बारे में अनुमान लगाया जा रहा है, कि यहां पर इंसानों की बड़ी आबादी रहा करती होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, ये बस्ती नवपाषाण काल की हो सकती हैं और बस्तियों के अवशेषों की खोज व्यापक जमीनी सर्वेक्षण कार्य, पुरातात्विक जांच वितरण, लेजर स्कैनिंग और ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार के उपयोग से की गई थी। अरब न्यूज ने कहा है कि, सऊदी विरासत आयोग ने देश की राजधानी रियाद के दक्षिण-पश्चिम में अल-फ़ॉ की साइट पर 8000 साल पुराने पुरातात्विक स्थल की खोज की है।

     पुरातत्वविदों ने ऐतिहासिक निष्कर्षों की खोज के लिए फोटोग्राफी, ड्रोन सर्वेक्षण, भूभौतिकीय सर्वेक्षण और लाइट डिटेक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया था। लेकिन, यहां पर मंदिर मिलना सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात है। मंदिर के पास ही जांच के दौरान वेदी के अवशेष मिले हैं, जिसको लेकर पुरातत्वविदों का कहना है, कि ऐसा प्रतीत होता है, कि यहां पर रहने वाले लोग पूजा पाठ करने के अलावा धार्मिक अनुष्ठान भी किया करते थे और यहां जो मानव बस्ती मिला है, उनकी पूजा पाठ में काफी गहरी आस्था रही होगी। अरब न्यूज के मुताबिक, इस मंदिर का हालांकि ज्यादातर हिस्सा अब खत्म हो गया है, लेकिन मंदिर के पत्थरों के अवशेष अभी भी मौजूद हैं, वहीं, तुवाईक पहाड़ों के किनारे पर एक वेदी का हिस्सा पाया गया है। इस मंदिर का उपयोग अल-फ़ॉ शहर के निवासियों द्वारा पूजा स्थल के रूप में किया जाता था।

   अरब न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, खुदाई के दौरान पुरातत्वविदों को इस साइट पर 2,807 बिखरे हुए मकबरे मिले हैं, जिन्हें छह समूहों में वर्गीकृत किया गया है, जो दफनाने की अलग-अलग समय अवधि का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं, यहां पर एक धार्मिक शिलालेख भी मिला है, जिनमें से एक प्राचीन देवता को संबोधित किया गया है। इस देवता का नाम पत्थर पर ’खल’ लिखा हुआ है। अरब न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि ये खोजें प्राचीन शहर अल-फ़ॉ की धार्मिक प्रथाओं को गहराई से देखने और समझने की सुविधा प्रदान करती हैं। इसके साथ ही, केंद्रित सर्वेक्षण कार्य और रिमोट सेंसिंग छवियों ने कई कृषि क्षेत्रों का भी खुलासा किया, जो पुरातत्वविदों का मानना है कि, प्राचीन शहर के निवासियों के लिए फसलों और खाद्य सुरक्षा के विकास में योगदान दिया होगा। इसके साथ ही पुरातत्वविदों को चार स्मारकीय भवनों की नींव भी मिली है। इन खोजों ने सिंचाई प्रणाली की पहचान की है। इंसानों की जो बस्ती मिली है, उसमें हैरान करने वाली बात ये है, कि वहां पर सैकड़ों भूमिगत जलाशय मिले हैं, यानि वहां पर पानी को जमा करके रखा जाता था और दैनिक कार्य के अलावा खेती के कार्यों में भी उनका इस्तेमाल किया जाता था। तुवाईक पर्वत के किनारे पर जो चट्टानों पर कई तस्वीरें भी बनाई हुई मिली हैं, जो उस वक्त की स्थिति और लड़ाईयों के साथ साथ दैनिक गतिविधियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। वादी अल-दावासेर और नजरान शहरों को जोड़ने वाली आधुनिक सड़क पर वाडी अल-दावासर के दक्षिण में 100 किमी की दूरी पर ये खोज की गई है। अल-फ़ॉ साइट की खुदाई और फील्डवर्क सऊदी पुरातत्वविद् डॉ अब्दुलरहमान अल-अंसारी के नेतृत्व में किंग सऊद विश्वविद्यालय के प्रयासों से शुरू हुआ था, जो पिछले 40 वर्षों से जारी है।

   अरब न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जगह पर खुदाई के दौरान आवासीय क्षेत्र, बाजार, मंदिर और मकबरे मिले हैं, जिन्हें प्रकाशित किए गए सात अलग अलग खंडों में बनाया गया था। आयोग सऊदी इतिहास को बढ़ावा देने और संरक्षित करने की उम्मीद में किंगडम में सांस्कृतिक विरासत स्थलों की खोज और सुरक्षा के अपने प्रयासों को जारी रख रहा है। 

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