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    Homeसाहित्‍यलेखविश्व में हिन्दी पहले स्थान पर कैसे ?

    विश्व में हिन्दी पहले स्थान पर कैसे ?

    मैंने अपनी शोध में यह सिद्ध किया था कि कि विश्व में हिन्दी विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है , इस पर विश्व के अधिकांश विद्वानों ने इस शोध का समर्थन किया है । मुझे कुछ प्रख्यात विद्वानों ने सुझाव दिया कि इस विषय पर एक लेख ऐसा होना चाहिए जिसमे आसान शब्दों में जन सामान्य को भी इसकी जानकारी मिल सके । विख्यात भाषाविद  आदरणीय मोतीलाल गुप्त जी ने भी मुझसे आग्रह किया कि यह शोध बहुत ही महत्वपूर्ण है , इसका प्रचार प्रसार होना चाहिए और यह तथ्य जन जन तक पहुँचना चाहिए । उनके सुझाव पर मैं अपने 40 वर्ष के शोध को बहुत ही संक्षेप में और बहुत ही आसान भाषा में यहाँ दे रहा हूँ ।

    विश्व में भाषाओं कि रैंकिंग कैसे होती है :

    विश्व में भाषाओं कि रैंकिंग  “एथ्नोलोग” नाम की  संस्था करती है । इसका मुख्यालय अमेरिका में है । यह संस्था ,  विश्व की भाषाओं के आकडे  अपने प्रतिनिधियों / प्रतिनिधि संस्थाओं से एकत्र करती है । यह एक गैर सरकारी संस्था है । संसार की सभी भाषाओं का डेटाबेस इनके पास है । यह हर वर्ष भाषाओं के आंकड़े जारी करती है । जिसके बोलने वाले संसार में सबसे अधिक होते हैं वह भाषा पहले नंबर पर आती है । अर्थात संख्या बल के हिसाब से ही रैंकिंग जारी की जाती है । भाषा के जानकारों की संख्या को स्थूल रूप में दो वर्गों में रखा जाता है इन्हें एल-1 और एल-2 कहा जाता है । एल-1 के अंतर्गत वे भाषाभाषी आते हैं जिनकी यह  मातृ भाषा हो अथवा जिन्हें इस भाषा पर दक्षता हासिल हो । भाषाओं की रैंकिंग में एल-2 में वे भाषा भाषी आते हैं जिनकी  वह भाषा अर्जित भाषा हो । उदाहरण के लिए हिन्दी भाषा के लिए एल-1 के अंतर्गत हिन्दी भाषी प्रदेशों की जनसंख्या और जिन्हें हिन्दी मे दक्षता प्राप्त  हो उनकी गणना होगी तथा अन्य जो भी काम चलाऊ हिन्दी जानता है उनकी गिनती एल-2 मे होगी ।

    हिन्दी का विश्व में कौन सा स्थान है ?

    मेरी शोध के अनुसार हिन्दी का विश्व में पहला स्थान है लेकिन एथ्नोलोग इसे तीसरे स्थान पर दिखाता है ।

     विश्व मे भाषा संबंधी आंकड़े परिचालित करने वाली संस्था एथनोलोग ने अपनी 2021 की रिपोर्ट मे अँग्रेजी  को प्रथम माना है, तथा इनके बोलने वालों की संख्या (1348 मिलियन) अर्थात 1 अरब चौंतीस  करोड़ 8 लाख दर्शाई है तथा  मंदारिन को दूसरे स्थान पर रखा है । इसके बोलनेवालों की संख्या (1120 मिलियन ) अर्थात  1 अरब  12 करोड़ बताई है तथा हिन्दी को तीसरे स्थान पर रखा है और इसके बोलनेवालों की संख्या सिर्फ ( 600 मिलियन ) अर्थात 60  करोड़ दर्शाई गई  है , जबकि सत्य यह है कि विश्व मे हिन्दी बोलने वाले ( 1356 मिलियन ) अर्थात  1 अरब 35 करोड़ 60 लाख हैं । अर्थात अँग्रेजी जानने वालों से  1  करोड़ 52 लाख अधिक हैं ।

    अतः  हिन्दी विश्व मे  सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है , विश्व भाषाओं में  यह रैंकिंग में पहले स्थान पर है । यह तथ्य वैश्विक हिन्दी शोध संस्थान द्वारा जारी  भाषा  शोध रिपोर्ट 2021  के अंतिम परिणाम से सिद्ध हो चुका है । अतः हिन्दी निर्विवाद रूप से पहले स्थान पर है । इसे पहले स्थान पर ही दर्शाया जाना चाहिए ।

    हिन्दी को तीसरे स्थान पर क्यों दर्शाया जाता है :

    इसके दो कारण हैं , पहला यह कि एथ्नोलोग को हिन्दी मे कोई रुचि नहीं है इसलिए हिन्दी से संबन्धित एक   दशक पुराना जनगणना का  सरकारी आंकड़ा जिस भी स्रोत से   उनके हाथ लगा उन्होने वह ही लिख दिया । किसी भी भारतीय विद्वान ने इस पर आपत्ति नहीं की  और न ही भारत की  किसी भी संस्था ने एथ्नोलोग को आंकड़े में संशोधन करने को कहा । इसलिए दूसरी भाषाओं को बोलने वालों ने अपनी भाषा के  नवीनतम आंकड़े दिये और हमने अपने 11 साल  पुराने आंकड़ों को ही स्वीकार कर लिया ।

    इस गलत गणना का दूसरा कारण यह था कि दूसरी भाषाओं मे थोड़ा सा भी अक्षर ज्ञान होने पर उसे भाषा के जानकारों में गिन लिया जाता है , लेकिन हिन्दी के लिए मापदंड अलग ही बना दिया गया है ।   जिनकी मातृभाषा हिन्दी है सिर्फ उनकी  की  ही गणना हिन्दी भाषा के  जानकारों में की  गई । यह भारत की गरिमा को गिरने के लिए सोची समझी चाल है ।  इसे उदाहरण से इस प्रकार समझ सकते हैं ।  पहला उदाहरण अँग्रेजी का ही लें । भारत में अँग्रेजी जानने वाले सिर्फ 6 प्रतिशत हैं अर्थात आठ करोड़ चालीस लाख हैं लेकिन इसे कहीं कहीं 10 प्रतिशत दिखाया जाता है अर्थात 14 करोड़ । कई जगह  तो यह संख्या 20 प्रतिशत दिखाई जाती है अर्थात 28 करोड़ । जबकि सच्चाई यह है भारत मे अँग्रेजी के जानकार 8 करोड़ से थोड़ा अधिक हैं ।  

    इसी प्रकार मंदारिन भाषा को ही लें । चीन में 70 अन्य बोलियाँ है । ये एक दूसरे से बिलकुल नहीं मिलती हैं , अर्थात ये आपस में बोधगम्य नहीं हैं । मंदारिन जानने वालों में इन बोलियों को बोलने वालों को  भी काफी बड़ी मात्र में  शामिल कर लिया गया है ,  वस्तुतः यह संख्या भी बढ़ा- चढ़ा  कर दिखाई जाती है  । इस प्रकार इनकी संख्या   1 अरब 12 करोड़ बताई गई है । इसे दूसरे नंबर पर दिखाया गया है ।

    अब हिन्दी का विश्लेषण करते हैं । भारत में हिन्दी मातृभाषा वाले 11 राज्यों की जनसंख्या है 65 करोड़ 58 लाख । ( इन्हें राजभाषा नियम के अनुसार “ क “ क्षेत्र माना जाता है ) यहाँ सभी हिन्दी जानते हैं , इसलिए क क्षेत्र में इनकी संख्या 65 करोड़ 58 लाख है ।

      जिन राज्यों में हिन्दी और उनके राज्य की भाषा मिलती जुलती है और वे प्रायः हिन्दी समझते हैं, इन्हें “ख” क्षेत्र कहा जाता  इनकी राज्यों की कुल  जन संख्या है 22 करोड़ 49  लाख । इनमे 90 प्रतिशत जनता हिन्दी जानती है इसलिए इस क्षेत्र में हिन्दी जाननेवाले 20 करोड़ 24 लाख हैं  । तीसरा क्षेत्र है,  हिंदीतर भाषी क्षेत्र जहां हिन्दी का प्रचालन कम है लेकिन हिन्दी के जानने वाले बड़ी संख्या में हैं । इस क्षेत्र को “ग “ क्षेत्र कहा जाता है , इसकी जनसंख्या है 49 करोड़ 98 लाख और इनमे हिन्दी के जानकार हैं 29 करोड़ 78 लाख । इन तीनों क्षेत्रों  को जोड़ कर भारत में हिन्दी जानने वालों की संख्या है :  65 करोड़ 55 लाख + 20 करोड़ 24 लाख + 29 करोड़ 78 लाख = 1 अरब 16 करोड़ । ( योग  पूर्णांकित किया गया है )

    अब विश्व में इसकी गणना करते हैं । प्रत्येक उर्दू जानने वाला हिन्दी जानता है , इसलिए इनकी संख्या भी हिन्दी जाननेवालों में जोड़ी जाएगी । एथ्नोलोग के अनुसार विश्व में उर्दू जाननेवाले 17 करोड़ हैं  । एक अरब 16 करोड़ में यह संख्या जोड़ देने पर हिन्दी जाननेवालों की संख्या हो जाती है 1 अरब 33 करोड़  । एथ्नोलोग के अनुसार विश्व के अन्य देशों में हिन्दी जाननेवालों की संख्या है  42 लाख ( मेरे शोध के अनुसार यह संख्या 2 करोड़ है लेकिन मैं एथ्नोलोग के आंकड़ों को लेकर ही चल रहा हूँ ताकि विश्व स्तर  पर विवाद न हो )। भारत में  अवैध आप्रवासी जो हिन्दी बोलते हैं उनकी संख्या है 1 करोड़ 60 लाख । इस प्रकार विश्व में हिन्दी भाषा के जानकार इस प्रकार हैं : 1 अरब 33 करोड़ + 42 लाख + 1 करोड़ 60 लाख = 1 अरब 35 करोड़  से अधिक । यह गणना बहुत ही कृपणता से की गए है जबकि अँग्रेजी  और मंदारिन में बड़ी उदारता से आंकड़े दिखाये गए हैं । कम से कम संख्या हिसाब में लेने पर भी 1 करोड़ 35 लाख से अधिक हैं । इसलिए विश्व में हिन्दी की रैंकिंग इस प्रकार है :

    क्रम संभाषाविश्व में बोलनेवालों की संख्याविश्व में स्थान /रैंकिंग
    1हिन्दी1 अरब 35 करोड़ ( 1350 मिलियन )प्रथम                   ( 1 )
    2अँग्रेजी1 अरब 26 करोड़ (1268 मिलियन )द्वितीय                 ( 2 )
    3मंदारिन1 अरब 12 करोड़ ( 1168 मिलियन )तृतीय                  ( 3 )

    रैंकिंग की वर्तमान स्थिति :

    मैंने अपनी शोध एथ्नोलोग को हिन्दी को प्रथम स्थान पर दिखाने के लिए भेजी थी । उन्होने सुझाव दिया था की हिन्दी में उर्दू भाषा को विलीन करने के लिए आइ एस ओ में परिवर्तन करने की आवश्यकता है । इसलिए मुझे लाइब्रेरी ऑफ कॉंग्रेस से संपर्क करके आगे की कार्रवाई करनी चाहिए । मैंने एथ्नोलोग को उत्तर भेजा कि उर्दू भाषा का अस्तित्व मिटाने कि आवश्यकता नहीं है सिर्फ उर्दू जानने वालों कि गणना हिन्दी जानने वालों मे भी की  जानी है जैसे कि अन्य भाषाओं के मामले मे किया जाता है । यह तर्क संगत है तथा एथ्नोलोग के मानदंडों के अनुरूप भी है । अतः यह मामला संपादक मण्डल के पास विचारार्थ है । शीघ्र ही वे हिन्दी को प्रथम स्थान पर दर्शाने कि प्रक्रिया आरंभ करेंगे ।

    कानूनी स्थिति :

    हिन्दी आज कि तारीख में तथ्यतः ( D Facto ) विश्व में पहले स्थान पर है व एथ्नोलोग से रैंकिंग बदलने के बाद  यह विधितः ( D  Jure ) भी प्रथम स्थान पर होगी ।

    प्रमाणीकरण :

     यह शोध प्रमाणीकरण के 20 चरण पूर्ण कर चुकी है । यह पूरी तरह प्रामाणिक हैं ।  राजभाषा विभाग , गृह मंत्रालय , भारत सरकार ने इस शोध को फ़ैक्ट चेक हेतु केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा को भेजा था । संस्थान ने इस शोध के  तथ्यों की जांच के लिए एक्सपर्ट नियुक्त किया था । एक्सपर्ट ने इस रिपोर्ट को प्रामाणिक मानते हुए  इसकी प्रबल रूप में संपुष्टि की है तथा अपनी विस्तृत रिपोर्ट दी है । भारत सहित विश्व के शीर्ष 172 भाषाविदों, विशेषज्ञों व विद्वानों ने इस रिपोर्ट की प्रामाणिकता की पुष्टि की है । संसदीय राजभाषा समिति के माननीय सदस्य राजभाषा निरीक्षण के दौरान  इस शोध की  सगर्व  चर्चा  करते हैं । इस शोध की प्रामाणिकता को देखते हुए वित्त मंत्रालय , वित्तीय सेवाएँ विभाग , भारत सरकार ने बैंकों, वित्तीय संस्थाओं एवं बीमा कंपनियों द्वारा आयोजित कार्यशालाओं में इस को प्रशिक्षण  में अनिवार्य कर दिया है साथ ही उक्त सगठनों द्वारा प्रकाशित पत्रिकाओं में भी इस शोध को प्रकाशित करने के सरकारी आदेश जारी किए गए । यदि किसी भी पाठक को मूल शोध रिपोर्ट की आवश्यकता हो अथवा इस शोध के प्रमाणीकरण संबंधी दस्तावेज़ या  इनके प्रमाण देखने हों तो मुझे ई  मेल करें , मैं  आपका मेल मिलते ही आपको वांछित सूचनाएँ उपलब्ध करा दूँगा । सुधी पाठकों के सुझावों का स्वागत है । 

    डॉ जयंती प्रसाद नौटियाल

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