आखिरी दौर में हुर्रियत गैंग और पत्थरबाज

ललित कौशिक

सांप मरने के काफी समय बाद फङफङाता रहता है, उसका फड़फड़ाना देखकर काफी समय तक लोग उसके नजदीक नही आते, नजदीक नही आने का मूल कारण सांप का फड़फड़ाना है, उसका फड़फड़ाना इस बात की ओर इंगित है, कि सांप अपनी आखिरी सांसे गिन रहा है.

वर्तमान समय में वहीं हाल इस समय पाक प्रायोजित आतंकवाद का है जो कि साऊथ कश्मीर के साढ़े तीन जिलों में है. जब देश की सेना के जवानों को देश के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी शासन ने आतंकवादियों को गोली का जवाब गोली से देने की बात कही है तब से सेना आतंकवादियों की हर प्रतिक्रिया का जवाब दें रही है, तबसे सेना के हाथ आतंक के खिलाफ मजबूत हुए है, तबसे सेना कश्मीर में घर से निकालकर आतंकियों को शूट कर रही है, और आतंकवादी मारे-मारे फिर रहे है, इस समय आतंक के साथ साऊथ कश्मीर में सेना का शायद आखिरी क्षण चला हुआ है.

जिस कारण आतंकवादी नए-नए तरीकों के साथ कश्मीर में दस्तक देने की कोशिशों में लगे हुए है, कभी वो आईएसआईएस के झंडों को आतंकियों के शव पर रख कर सरकार को डर दिखाने की कोशिशों में है, तो कभी वो केमिकल्स बम से कश्मीर पर हमला करने का आडियो दिखाकर दहशतगर्दी दिखाने की फ़िराक में है.

क्योंकि भारतीय सेना के जवानों ने पिछलें काफी दिनों से आतंक के खिलाफ ऑपरेशन क्लीन स्वीप जो छेड़ा हुआ है, उससे सेना के जवानों ने आतंक को करारा जवाब दिया है. जिस कारण सेना के जवानों का भय आतंकियों में साफ नजर आ रहा है, जिस कारण वो छुपने के लिए जानवरों की गुफाओं का सहारा ले रहें है, गुफाओं का सहारा लेने का कारण आतंकियों के चेहरों पर भय का मंजर साफ नजर आ रहा है.

वहीं साऊथ कश्मीर में आतंक के पनाहगारों पर एनआईए ने सख्ती से दिखानी शुरू कर दी, क्योंकि कश्मीर में मिनी आतंकवाद इन्ही के इशारों पर ही खड़ा हो रहा था, हाल ही में एनआईए को अलगाववादी नेताओं के आतंकियों से संबंध के पर्याप्त सबूत मिले जिसकें आधार पर एनआईए ने सात अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार कर उनकें खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है.

हुर्रियत गैंग पर एनआईए सख्त
एनआईए ने कश्मीर में हिंसा फैलाने और पाकिस्तान से फंडिंग के मामले में सात अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार किया है, जिसमें बिट्टा कराटे को दिल्ली जबकि नईम खान, अलताफ, अयाज़ अकबर, पीर सैफुल्ला, मेराजुद्दीन, शाहिद उल इस्लाम को श्रीनगर से गिरफ्तार किया था. जिसके बाद कश्मीर के अलगाववादी नेताओं ने बंद की कॉल बुलाई बंद का असर ऐसा हुआ की पूरे दिन मार्किट में लोगों की आवाजाही जारी रही, जिससे आम जनजीवन से जुड़ें हुए लोग अब इनकी कॉल को नकारने लगें ये साफ देखा जा सकता है.

वहीं पाकिस्तान से कश्मीर में हिंसा के लिए हवाला के जरिए फंडिंग, आतंकी संगठनों से कनेक्शन और मनी लॉंड्रिग से जुड़े मामलों मे शामिल होने के शक के आधार पर अलगाववादी नेताओं के घर समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी.

पत्थरबाजों का खाका भी बनाया एनआईए ने
जम्मू कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी देखने को मिल रही है.. पत्थरबाजी पर लगाम लगने की बड़ी वजह ये है कि पाकिस्तान से आने वाले फण्ड को पत्थरबाजों तक पहुंचाने वाले अलगाववादी नेता और ट्रेडर्स अब एनआईए के शिकंजे में आ गए हैं.. जिसका असर ये हो रहा है कि घाटी में पत्थरबाजी की घटनाएं कम हो रही हैं.. दरअसल एनआईए लगातार अलगाववादी नेताओं की जांच कर रही है.. बताया जा रहा है कि ये अलगाववादी नेता पत्थरबाजों को 500 और 1000 रुपए एक दिन की पत्थरबाजी के लिए देते थे.. एनआईए का शिकंजा कसने के बाद अब अलगाववादी नेता अपनी कारगुजारियों में कामयाब नहीं हो पा रहे और पत्थरबाजों तक पैसा नहीं पहुंच रहा जिसके चलते घाटी में पत्थरबाजी की घटनाएं अब ना के बराबर हैं..

वही अलगाववादियों की गिरफ्तारी के बाद जम्मू-कश्मीर में एनआईए ने पत्थरबाजों का एक डोजियर बनाया है, जिसमें बताया गया है, अलगाववादियों से पैसा लेकर पत्थरबाज आतंकियों की साईट पर बने रहते है. एनआईए ने सेना के साथ आतंकियों की होने वाली मुठभेड़ में होने वाली पत्थरबाजी और पत्थरबाजों की पूरी प्रोफाइल बनाई है, जिसमे उनका एफबी, व्हाट्सआप और मोबाइल नंबर के आधार पर इन पत्थरबाजों की पहचान की गई है, एनआईए ने अपनी जाँच में 48 मोबाईल नंबर और उनके गैंग लीडर की लिस्ट बनाई है, जो एनकाउंटर के वक्त सोशल साइटों के जरिए सक्रिय हो जातें है.

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