‘लेडी विद द लाइट’ के लिये इम्पैक्ट गुरु की सार्थक पहल

 ललित गर्ग 

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर इम्पैक्ट गुरु फाउंडेशन ने अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप के साथ साझेदारी में अपनी अलग तरह की एक अनूठी सामाजिक प्रभाव परियोजना ‘एंजल #थैंक ए नर्स’ की घोषणा करते हुए संकल्प व्यक्त किया गया कि अगले कुछ वर्षों में पूरे भारत में एक लाख से अधिक नर्सों को सशक्त बनाया जायेगा। एंजल का मतलब एडवांस नर्सेज की ग्रोथ, एक्सीलेंस एंड लर्निंग है। हमारी नर्सें कोरोना महामारी में बहुत लंबे समय तक जान को जोखिम में डालकर, भारी सुरक्षात्मक पीपीई गियर पहनकर, असुविधा में रहकर, खुद को अपने परिवार से अलग रखकर, निरन्तर अपनी सेवाएं दे रही है और यह करते हुए वे कोई शिकायत नहीं करती एवं आशा नहीं खोती-वे हर चुनौती का जोरदार मुस्कान के साथ सामना करती है, चाहे परेशानी एवं बीमारी कितनी भी गंभीर क्यों न हो। वास्तव में उनकी निःस्वार्थता एवं सेवाभावना उन्हें रोगियों के लिए स्वर्गदूत बनाती है, एक फरिश्ते के रूप में वे जीवन का आश्वासन बनती है और उनका बलिदान उन्हें देश के लिये कोविड योद्धा बनाता है।
ऐसी अग्रणी एवं प्रथम पंक्ति की कोविड़ योद्धाओं के उन्नत भविष्य एवं कौशल विकास के लिये इम्पैक्ट गुरु फाउंडेशन ने एक सार्थक पहल की है, फाउण्डेशन के संस्थापक श्री पीयूष जैन ने अपनी इस योजना को प्रस्तुति देते हुए कहा है कि नर्से भगवान का रूप होती है, वे ही इंसान के जन्म की पहली साक्षी बनती है और उनमें करुणा का बीज बोती है। एक रोगी को स्वस्थ करने में वे अपना सब कुछ दे देती हैं। कोरोना महामारी में उन्होंने अपना पारिवारिक सुख, करियर, जीवन, और वर्तमान सबकुछ झांेक दिया। अब हमारा यह नैतिक कर्तव्य है कि हम उनकी अनूठी एवं निःस्वार्थ सेवाओं के बदले वापस कुछ लौटाये और उनका भविष्य उन्नत करें- इस उद्देश्य से प्रारंभ किये जा रहे ‘एंजल #थैंक ए नर्स’  कार्यक्रम में उन्होंने जन-सहभागिता की आवश्यकता को उजागर किया। उन्होंने इस दूरगामी सोच से जुड़ी बहुआयामी योजना में हम सभी को हाथ मिलाने, अपनी नर्सों के करियर को फिर से परिभाषित करने, नए सिरे से विकसित करने और कौशल विकास की शक्ति के साथ उनके जीवन को बदलने के लिए यह जन-आह्वान किया हैं। एक लाख नर्सों को इस योजना से जोड़ने एवं उनके कौशल विकास का लक्ष्य रखा गया है, कार्यक्रम की अवधि में उन्नत कौशल प्रशिक्षण के लिए छात्रवृत्ति के माध्यम से प्रति नर्स 50,000 रुपये तक निवेश करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गयी है। जिसमें अपोलो हॉस्पिटल्स ने कम-से-कम एक हजार नर्सों के कौशल विकास के लिये इस योजना से जुड़ने का संकल्प व्यक्त किया है।  इस महत्वपूर्ण परियोजना का उद्देश्य नर्स समुदाय को, जिसने महामारी में अपना सब कुछ दिया है, उनके उन्नत भविष्य के लिये वापस देना है। इस योजना में इम्पैक्ट गुरु फाउण्डेशन के साथ अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप फाउंडिंग सर्कल के प्रमुख सदस्य और प्रिंसिपल डोनर होंगे। कई अन्य साथी जैसे माइक्रोसोफ्ट इंडिया, फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसीआई), एमिटी यूनिवर्सिटी, आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी, इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनएस), सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थान इंपैक्ट और नॉलेज पार्टनर्स के रूप में काम करेंगे।
कोविड़-19 के संकट में एक योद्धा की तरह हर मुश्किल घड़ी में अपनी जान की परवाह किये बिना मरीजों के साथ जो खड़ी रही, वे नर्से ही थी, जिन्हें हम और आप अक्सर सिस्टर कह कर पुकारते हैं। आम दिन हो या कोरोना के खिलाफ जंग, ये नर्स बिना किसी डर के सहजता और उत्साह से अपने कर्तव्य का पालन कर रही है। इसलिए नहीं कि यह उनका काम है और उसके लिए उन्हें पैसे मिलते हैं। इसलिए कि वह सबसे पहले दूसरों के स्वस्थ होने और उनकी जान की फिक्र करती हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में मां के स्वरूप में स्नेहपूर्ण और फिक्र के साथ हर किसी की देखभाल और परवाह करने के शब्द को ही नर्स कहा जाता है। वे अस्पताल की रीड होती है। लियो बुशकाग्लिया ने कहा भी है कि एक नर्स का एक स्पर्श, मुस्कुराहट, प्यारी बोली, ईमानदारी और देखभाल की सबसे छोटी क्रिया में सभी में जीवन को मोड़ने की क्षमता होती है।’
पूरी दुनिया में हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते है कि नर्सिंग सेवाएं दुनिया में सबसे बड़ी स्वास्थ्य देखभाल का पेशा है। रोगियों के स्वास्थ्य और कल्याण को बनाये रखने के लिये नर्सों का प्रशिक्षण एवं कौशल विकास अपेक्षित है, उसी दिशा में इम्पैक्ट गुरु फाउंडेशन की ‘एंजल रुथैंक ए नर्स’  योजना एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे भारत की नर्सों को नयी ऊर्जा, नयी दिशा एवं नया परिवेश मिलेगा और वे अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने में सक्षम होगी। इससे भारत की नर्सों के लिये गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिये अनुकूल वातावरण सुनिश्चित होगा। इससे नर्सें रोगियों की अधिक प्रभावपूर्ण ढंग से शारीरिक, मानसिक एवं भावात्मक भलाई करने में सक्षम होगी। ऐसी योजनाओं को सरकारों को भी प्रोत्साहन देना चाहिए। नर्सों का बस एक ही उद्देश्य होता है कि उनकी देखभाल में आया हुआ मरीज ठीक होकर हंसते हुए घर जाए। मरीज जब ठीक होकर मुस्कुराते हुए अपने परिवार वालों के साथ घर जाता है, तो वह खुशी नर्सों को और भी हिम्मत देती है। इलाज के दौरान नर्सोंे और मरीज के बीच पारिवारिक रिश्ता हो जाता है। सचमुच नर्सों की दुनिया अद्भुत है। वे दवा के साथ उन्हें मानसिक तौर पर मजबूत करती हैं और रोगों से लड़ने की प्रेरणा एवं शक्ति बनती है। यह शक्ति अधिक तेजस्वी एवं प्रखर बने, यही ‘एंजल #थैंक ए नर्स’ योजना का उद्देश्य है।
यह एक अनूठा अवसर है जब भारत में क्राउडफंडिंग के माध्यम से नर्सों के समग्र कौशल विकास एवं उनके ज्ञान को अधिक मानवीय बनाने के लिये एक बहुआयामी योजना आकार लेने जा रही है, भारत में क्राउडफंडिंग के बढ़ते प्रचलन से इस योजना की आर्थिक जरूरतों के लिये जन-अनुदान प्राप्त होगा। इम्पैक्ट गुरु डाॅट काम ने भारत में चिकित्सा के क्षेत्र में क्राउडफंडिंग के कीर्तिमान स्थापित किये हैं। हाल ही में एक असाध्य बीमारी से ग्रस्त बच्चे के लिये क्राउडफंडिंग के माध्यम से 16 करोड़ रुपये जुटाने का ऐतिहासिक लक्ष्य इम्पैक्ट गुरु डाॅट काम ने हासिल किया है। चिकित्सा क्षेत्र में  क्राउडफंडिंग का प्रयोग अधिक देखने में आ रहा है। अभावग्रस्त एवं गरीब लोगों के लिये यह एक रोशनी बन कर प्रस्तुत हुआ है। इसे ‘एक रोशनी स्वास्थ्य चमकाने’ की कहा जा सकता है, जिसके लिये देश के प्रमुख क्राउडफडिंग मंच इम्पैक्ट गुरु के प्रयास उल्लेखनीय है। असाध्य बीमारियों एवं कोरोना महामारी के पीडितों के महंगे इलाज के कारण गरीब, अभावग्रस्त एवं जरूरतमंद रोगियों की क्राउडफंडिंग के माध्यम से चिकित्सा में सहायता करते हुए इसने अनूठेे कीर्तिमान स्थापित किये है। अब क्राउडफडिंग के माध्यम से नर्सों के उत्थान एवं उन्नयन के प्रयत्न हो रहे हैं। ‘लेडी विद द लाइट’ के रूप में जो नर्सें कोरोना पीडितों के साथ जान को जोखिम में डालकर वार्ड़ों में पूरी रात देखभाल करती है, घंटों उनके साथ बिताती है, उनके पास जाती है, उनके स्वस्थ होने के समग्र प्रयास करती है, ऐसी मानवीय सेवा की अद्भूत फरिश्तों के लिये इम्पैक्ट गुरु फाउंडेशन ने दूरगामी एवं मानवीय सोच से जो योजना प्रस्तुत की है, उससे निश्चित ही नर्सों की सेवाएं अधिक सक्षम, प्रभावी एवं मानवीय होकर सामने आयेगी।
इम्पैक्टगुरु फाउण्डेशन के संस्थापक पीयूष जैन और खुशबू जैन एशिया के सबसे बड़े हेल्थकेयर समूह अपोलो हॉस्पिटल्स के मिलकर एवं अन्य संगठनों केे सहयोग से ‘एंजल #थैंक ए नर्सश् के लिये अति उत्साहित है। श्री पीयूष जैन इस बात की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं कि आम नागरिक को चिकित्सा सेवा और जनकल्याण के कार्यों में जीवन समर्पित करने वाली नर्सों के लिये क्राउडफंडिंग के माध्यम से सहयोग के लिये आगे आना चाहिए।  इम्पैक्ट गुरु ने क्राउडफंडिंग के माध्यम से करोड़ों रूपयों की चिकित्सा सहायता एवं अन्य जरूरतों के लिये आर्थिक संसाधन जुटाये हैं। केवल चिकित्सा के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी क्राउडफंडिंग का प्रचलन बढ़ रहा है। भारत के सुनहरे भविष्य के लिए क्राउडफंडिंग अहम भूमिका निभा सकती है। क्योंकि क्राउडफंडिंग से भारत में दान का मतलब सिर्फ गरीबों और लाचारों की मदद करना समझते आ रहे हैं जबकि अब कला, विज्ञान, शिक्षा, चिकित्सा और मनोरंजन को समृद्ध करने के साथ ‘एंजल #थैंक ए नर्स’ जैसी योजनाओं को सफल बनाने का सशक्त माध्यम है। 

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