मध्य प्रदेश में स्वदेशी जागरण का असर, हर माह 4 हजार करोड़ का चीन को हो रहा नुकसान

 – प्रदेश में 06 हजार स्व‍यंसेवी कर रहे जन जागरण 
डॉ. मयंक चतुर्वेदी
भोपाल, 06 नवम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में चीनी सामान का इस दिवाली पिछले वर्ष के मुकाबले अधिक विरोध हो रहा है। बाजार में उपभोक्ता स्वयं ही दुकानों में सावधानीपूर्वक खरीदारी कर रहे हैं और दुकानदार से यह पूछने में जरा भी गुरेज नहीं कर रहे कि यह सामान चाइनीज तो नहीं ? इसका असर यह है कि दुकानदार भी चीनी सामान से अपनी दुकान सजाने में अब तौबा करते देखे जा रहे हैं। यहां प्रधानमंत्री मोदी के दिए मंत्र ‘लोकल के लिए बनें वोकल’ का सीधा असर देखने को मिल रहा है। इस पूरे ‘स्वदेशी आंदोलन’ में बहुत बड़ा रोल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन ”स्वदेशी जागरण मंच” का है।  
इस साल दिवाली से जुड़े देसी समान जैसे दीये, बिजली की लड़ियां, बिजली के रंग बिरंगे बल्ब, सजावटी मोमबत्तियां, सजावट के समान, वंदनवार, रंगोली एवं शुभ लाभ के चिन्ह, उपहार देने की वस्तुएँ, पूजन सामग्री, मिट्टी की मूर्तियां और भी अनेकों उत्पादन मध्य प्रदेश के कारीगरों ने ही तैयार किये हैं जिनको भारतीय ट्रेडर्स बाज़ारों तक पहुंचाने में ”स्वदेशी जागरण मंच”  मदद कर रहा है। 
स्वदेशी वस्तुओं का आग्रह लेकर 6 हजार स्वीयंसेवी जा रहे घर-घर मध्य प्रदेश के संपूर्ण 52 जिलों में ”स्वदेशी जागरण मंच” इस समय जागरण पत्रक, सामूहिक चर्चा, नुक्कड़ नाटक और पढ़े-लिखे वर्ग के बीच डिजिटल वार्ताओं जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।  स्वदेशी के इस संपूर्ण जागरण के लिए 6,000 से अधिक स्वयंसेवी (वालंटियर) अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके लिए स्वदेशी जागरण मंच ने ”आरएसएस” की तर्ज पर ही कार्य के विस्तार की योजना बनाई है। मध्य प्रदेश को तीन भागों में बांटकर ”मंच” काम कर रहा है। मध्य भारत, महाकौशल और मालवा तीनों प्रांतों के लिए तीन संयोजक और पूरी कार्यकारिणी बनाकर तहसील व ग्राम स्तर तक कार्यकर्ताओं की एक लंबी फौज मंच ने अपनी तैयार की है, जो परिवार में अपने घर के प्रत्येक सदस्य के लिए स्वदेशी वस्तुओं का अधिकतम उपयोग तो करते ही हैं, साथ में अपने संपर्क में आनेवालों को भी स्वदेशी जागरण के इस आन्दोलन से जोड़ने के प्रयास में लगे रहते हैं । 
स्वदेशी जागरण के कार्य को लेकर मध्य भारत प्रांत के प्रांत संयोजक अरुषेन्द्र शर्मा हिन्दुस्थान समाचार को बताते हैं कि स्वदेशी जागरण मंच की स्थापना करने वाले संघ प्रचारक दत्तोपंत ठेंगड़ीजी का यह जन्म शताब्दी वर्ष है और इस निमित्त जगह-जगह कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है, जिसका मूल लक्ष्य यही है कि अधिकतम लोगों को स्वदेशी वस्तुओं, स्वदेशी भाव और विचार के साथ जोड़ा जाए । इसी के निमित्त  कोरोना काल में हमने 65 ऑनलाइन कार्यक्रम बड़ी संख्या के आयोजित किए हैं। 
उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि हम चाय पर चर्चा करते हुए स्वदेशी के आग्रह को व्यापक स्तर पर घर-घर पहुंचा रहे हैं। छोटी-छोटी रैली निकालकर और व्यक्तिगत स्तर से घरों में संपर्क कर लोगों के बीच जनजागरण कर रहे हैं। केवल इतना ही नहीं तो छोटे-मझोले उद्योग कैसे खोले जा सकते हैं, व्यक्तिगत स्तर पर कम पूंजी में लोग अपना कौन सा व्यवसाय शुरू करें, जिसमें वे अधिकतम आय प्राप्त कर पाएं, ऐसे तमाम प्रयोग, प्रशिक्षण व मार्गदर्शन के कार्यक्रम इस समय स्वदेशी जागरण मंच के चल रहे हैं। उनका कहना था कि सिर्फ चीन की वस्तुओं का ही विरोध नहीं कर रहे, हम संपूर्ण  स्वदेशी का आग्रह कर रहे हैं। अपने देश की ही वस्तुओं का अधिकतम कैसे उपयोग कर सकते हैं इसके लिए हमारा लगातार जागरण चल रहा है।  मध्य प्रदेश से चीन को हर माह 4 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा मालवा प्रान्तो के संयोजक हरिओम वर्मा कहते हैं कि हर साल भारत में दिवाली के मौके पर करीब 70 हजार करोड़ का कारोबार होता है, इसका करीब 60 फीसदी यानी करीब 40 हजार करोड़ रुपये का सामान बीते वर्षों में चीन से आयात सिर्फ दीपावली से संबंधित होता आ रहा है। इसमें से लगभग 6 से 7 हजार करोड़ का सामान मध्यप्रदेश में आता है, इसमें आज बहुत बड़ी गिरावट आई है। चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने भी इस बात को माना है कि भारत के साथ व्यापारिक संबंधों में खरीदारी के स्तर पर 30 से 35% तक का घाटा हुआ है। 
उन्होंने कहा कि मालवा प्रांत में स्वदेशी पत्रक घर-घर बांटे जा रहे हैं। लोगों को आत्म स्वावलंबन से जोड़ने के लिए स्वदेशी जागरण मंच बड़े स्तर पर कार्य कर रहा है। सरकारी योजनाओं को समझा कर लोगों की मदद हमारे वालंटियर इस वक्त  कर रहे हैं जिसका कि परिणाम यह है कि मालवा के हर जिले में हमारे प्रयासों से प्रेरित होकर बड़ी संख्या में लोगों ने अपने स्वरोजगार आरंभ किए हैं। प्रदेश की आर्थिक राजधानी अकेले इंदौर में ही हमारे 200 वालंटियर इस काम में जुटे हुए हैं। वह यह भी कहते हैं कि हमारी कोशिश यह भी है कि जो लोग अपने परंपरागत काम जैसे कपड़े धुलाई, बर्तन कलई, कटिंग, टेलरिंग या अन्य काम जिन्हें  छोड़ चुके हैं, उनसे फिर से जुड़ें। इसके लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास आवश्यक ट्रेनिंग दिलाकर हम कर रहे हैं । 
महाकौशल में खेती से जुड़े कार्यों पर विशेष फोकस इसी तरह से महाकौशल प्रान्त के संयोजक चंद्रमोहन साहू का हिन्दुस्थान समाचार से कहना था कि देश से हर साल लगभग 3 से 5 करोड़ युवा रोजगार प्राप्त करने के लिए तैयार हो जाते हैं। सबसे अधिक रोजगार भारत में खेती से जुड़े कार्यों से मिलता है, उसके बाद इंडस्ट्री एवं पूरा सर्विस सेक्टर का नम्बर आता है। आज बच्चे जमीन छोड़कर नौकरी की तरफ जा रहे हैं, ऐसे में उन्हें फिर से जमीन से जोड़ना, उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराना, उन्हें जैविक खेती की तरफ, औषधीय खेती के लिए प्रेरित करना जैसे तमाम कार्यों पर स्वदेशी जागरण मंच यहां लगातार फोकस कर आगे बढ़ रहा है। वास्तव में हमारे हर संभव प्रयास स्थानीय लोगों को लोकल रोजगार के लिए प्रेरित करना है। सरकार और निजी स्तर पर कुल मिलाकर 7% से अधिक लोगों को रोजगार नहीं दिया जा सकता। 93% रोजगार का जो आधार है उसमें बहुत बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र से कृषि आधारित है, इसलिए हमारा यहां फोकस ग्रामीण रोजगार पर अधिक बना हुआ है। 
उन्होंने कहा कि जिस तरीके से हमने कोरोना काल में कार्य किया है, उससे दूसरे देशों को भी भारत पीपीई किट, मेडिकल सामग्री, मास्क  इत्याादि उपलब्ध कराकर आर्थिक स्तर पर धन लाभ प्राप्त करने में सफल रहा है, इन सभी कार्यों में मध्य‍ प्रदेश की भूमिका भी अहम है। प्रदेश में शिवराज सरकार की मदद से गांव-गांव तक हम तमाम कार्यों को लेकर जा सके हैं। यही कारण है कि हमारी निर्भरता दूसरे देशों पर लगातार कम होती जा रही है। 
एक वर्ष में होता है भारत और चीन के बीच 5.50 लाख करोड़ रुपये का व्यापारअमेरिका के बाद चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझीदार है। साल 2019-20 के दौरान भारत और चीन के बीच 5.50 लाख करोड़ रुपये का व्यापार हुआ, जो भारत-अमेरिका के बीच 5.85 लाख करोड़ रुपये के व्यापार से सिर्फ थोड़ा कम है। भारत के कुल व्यापार में चीन की हिस्सेदारी करीब 11 फीसदी है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक भारत ने वित्त वर्ष 2019-20 (अप्रैल-फरवरी) के दौरान चीन से कुल 4.40 लाख करोड़ रुपये का आयात किया। इस बीच सभी देशों को मिलाकर भारत का कुल आयात 31.23 लाख करोड़ रुपये का रहा है। इस तरह भारत के आयात में चीन कि हिस्सेदारी सर्वाधिक 14.08 फीसदी रही। इसमें भारत के निर्यात को देखें तो भारत ने वित्त वर्ष 2019-20 (अप्रैल-फरवरी) के दौरान कुल 20.58 लाख करोड़ रुपये का निर्यात किया और चीन को 1.09 लाख करोड़ रुपये का सामान निर्यात किया है। इस तरह चीन के साथ भारत का व्यापार अंतर या घाटा 3.31 लाख करोड़ रुपये का है। 
गौरतलब है कि दीपावली के मौके पर भारत में कई तरह के सामान चीन से आते हैंं जो इस बार बाजार से नदारत हैं और भारतीय सामानों का बोलबाला है। मोदी सरकार की नीति और भारतीयों के मजबूत इरादों ने मेक इन इंडिया को मेड इन चाइना पर हावी कर दिया है। त्योहारी सामानों के साथ साथ चीन के खिलौनों की मांग भी इस साल लगभग खत्म हो चुकी है। भारत ने बाज़ार के लिए देश में बने अच्छे क्वालिटी के माल की सप्लाई तेज़ कर दी है. मेक इन इंडिया का मोर्चा खुलने के बाद भारतीय बाजार तो हमेशा की तरह गुलजार हैं लेकिन चीन कराह रहा है। कुल मिलाकर इस वर्ष के दिवाली सीजन पर करीब 40 हजार करोड़ रुपये का बड़ा झटका भारत से चीन को आर्थिक मोर्चे पर मिलने जा रहा है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल का यही मानना है जिसमें मध्य प्रदेश की भूमिका भी अहम है। 

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